मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बैठक में शामिल होने के लिए कुछ लोग दिल्ली पहुंच चुके हैं और कुछ लोग रविवार को पहुंचेंगे. उन्होंने कहा कि हमलोग शुरू से ही जातीय जनगणना को लेकर अपनी बात कहते रहे हैं, यह हो जाती है तो अच्छी बात होगी. बिहार ही नहीं, पूरे देश में लोग इसके बारे में सोचते हैं. इसी दृष्टिकोण को लेकर हमलोग अपनी बात रखेंगे.

इससे पहले भी कई मसलों पर बिहार के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन प्रधानमंत्रियों से मुलाकात कर चर्चा की है. 2002 में पूर्व मध्य रेलवे के अस्तित्व को बचाना था मुद्दा वर्ष 2002 में भी बिहार से एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से नयी दिल्ली में मुलाकात की थी. इस दौरान पूर्व रेलवे को बांटकर हाजीपुर में बने पूर्व मध्य रेलवे नाम से बने नये जोन को बचाने के मुद्दे पर बातचीत हुई थी. उस समय तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार थे. बिहार के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे भी मुलाकात की थी. दरअसल, उस समय रेलवे जोन की वजह से पश्चिम बंगाल और बिहार के बीच तनाव जैसे हालात पैदा हो गये थे.

19 अक्तूबर, 2008 को मुंबई में राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस के कार्यकर्ताओं ने बिहार से रेलवे की परीक्षा देने गये अभ्यर्थियों पर हमला किया था. इस संबंध में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लालू प्रसाद, रामविलास पासवान, कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा, माकपा के सर्वोदय शर्मा और भाकपा के यूएन मिश्रा ने मुलाकात की थी. इस मुलाकात में केंद्र ने सकारात्मक रुख दिखाया था.

वर्ष 2012 के अप्रैल में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह से बिजली के मुद्दे पर मुलाकात की थी. इस दौरान बिहार में एनटीपीसी की दो बिजली उत्पादन इकाइयों से 50% बिजली मिलने सहित बरौनी थर्मल पावर के 500 मेगावाट यूनिट को कोल लिंकेज देने पर चर्चा हुई थी. दोनों मामलों में केंद्र सरकार ने बिहार के लिए निर्णय लिये थे.

Input: Prabhat Khabar

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