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HEALTH

उपवास रखने के गज़ब फायदे, इनके बारे मे जान हैरान रह जाएंगे आप.

Md Sameer Hussain

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शरीर के सम्पूर्ण स्वास्थय के लिए उपवास रखना एक बेहतर विकल्प है जैसे खाना खाना जरुरी है वैसे ही उपवास रखना भी जरुरी है, हमारे शरीर के सही रीति से कार्य करने की क्षमता को बनाये रखने के लिए ये आवशयक हो जाता है की उपवास करे।

ये एक ऐसा कार्य है जिससे शरीर के विषैले पदार्थो और गन्दगी को शरीर से साफ़ होने के लिए समय मिलता है और अनावशयक फैट कम होने लगता है इसलिए जरुरी है की उपवास किया जाए। आज हम आपके साथ कुछ टिप्स शेयर करने जा रहे है जो आपको इसके फायदों के बारे में बताएँगे.

उपवास रखने के फायदे

उपवास रखने से आपका इम्यून सिस्टम यानी रोगों से लड़ने की क्षमता भी बेहतर होती है क्योंकि यह शरीर में मौजूद फ्री रैडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करता है, शरीर में किसी भी तरह की सूजन और जलन की समस्या को कम करता है। अब आपकी इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग रहेगी तो जाहिर सी बात है आप बीमार नहीं पड़ेंगे।

दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम

दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे से बचने का सबसे बेस्ट तरीका है अपनी डायट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना और बहुत सी रिसर्च में यह बात साबित भी हो चुकी है कि फास्टिंग यानी उपवास रखना हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है। दरअसल, उपवास रखने से शरीर में मौजूद बैड कलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है, ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। ऐसे में जब बीपी और कलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में रहेगा तो जाहिर सी बात है आपके दिल को किसी तरह का कोई खतरा नहीं होगा और आप दिल की बीमारियों से दूर रहेंगे।

मेटाबॉलिज्म तेज

उपवास रखने या फास्टिंग करने का एक और फायदा ये है कि इससे आपका मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है। जब आपका मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है तो आपके शरीर पर एजिंग के निशान नजर आने लगते हैं। ऐसे में आपका मेटाबॉलिज्म जितना फास्ट होगा बेहतर तरीके से काम करेगा आपका शरीर उतना ही जवां बना रहेगा। जब आपकी इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होगी, बीमारियां नहीं होगी, आप कम खाएंगे तो पाचन तंत्र पर भार भी ज्यादा नहीं पड़ेगा तो ये सारी चीजें मिलकर आपकी उम्र को बढ़ा देंगी।

डायबीटीज का खतरा

जिन लोगों को डायबीटीज का खतरा है उनके लिए उपवास रखना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि फास्टिंग करने से ब्लड शुगर कंट्रोल बेहतर तरीके से हो पाता है। इतना ही नहीं टाइप 2 डायबीटीज के मरीज अगर थोड़े समय के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग रखें तो उनके ब्लड शुगर लेवल में भी काफी कमी आ जाती है। साथ ही उपवास रखने से इंसुलिन रेजिस्टेंस घटता है और शरीर में इंसुलिन के प्रति सेंसिटिविटी बढ़ती है जिससे खून में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाना आसान हो जाता है।

Input : Pradesh Jagran

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HEALTH

ओडिशा में 15 दिनों में 1 हजार बेड का अस्पताल बनेगा

Himanshu Raj

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भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम कोव-इंड-19 का दावा है कि यही रफ्तार रही तो मई के मध्य तक 1 लाख से 13 लाख तक संक्रमितों की संख्या पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति से निपटने लिए भारत में मौजूदा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल उपकरण नाकाफी है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2019  के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में करीब 32 हजार सरकारी, सेना और रेलवे के अस्पताल हैं। इनमें करीब 4 लाख बेड हैं। निजी अस्पतालों की संख्या 70 हजार के करीब हैं। इसके अलावा क्लीनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, कम्युनिटी सेंटर भी हैं। सब मिलाकर करीब 10 लाख बेड होते हैं। आबादी के लिहाज से देखा जाए तो भारत में करीब 1700 लोगों पर एक बेड है। अब आईसीयू और वेंटिलेटर की स्थिति देखें तो यह भी काफी कम है। इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर के मुताबिक, देश भर में तकरीबन 70 हजार आईसीयू बेड हैं। जबकि 40 हजार वेंटिलेटर मौजूद है। इसमें भी महज 10 प्रतिशत ही खाली हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से निपटने के लिए भारत को अगले एक महीने के अंदर अतिरिक्त 50 हजार वेंटिलेटर और अस्पतालों में 2 लाख से ज्यादा बेड की जरूरत पड़ सकती है। जबकि आईसीयू बेड की करीब 70 हजार जरूरत पड़ सकती है। दूसरी ओर देर से ही सही, लेकिन अलग-अलग स्तरों पर सरकारों ने कोशिशें शुरू कर दी हैं। एक तरफ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिला अस्पतालों में एक-एक बिल्डिंग केवल कोरोना पीड़ितों के लिए तैयार करने का आदेश दिया है तो ओडिशा सरकार ने 15 दिनों में 1 हजार बेड का अस्पताल तैयार करने का फैसला लिया है। हालांकि, ये कोशिशें जरूरत के हिसाब से काफी कम हैं।

दुनियाभर में वेंटिलेटर का संकट
कोरोना से संक्रमित मरीजों के इलाज में वेंटिलेटर की सबसे अहम भूमिका होती है। सांस लेने में तकलीफ होने पर वेंटिलेटर का ही सहारा होता है। पूरी दुनिया इस वक्त वेंटिलेटर के इंतजाम में लगी है। यूरोप के कई देश वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनियों को आर्डर कर रहे हैं। ब्रिटेन सरकार ने वहां की कई इंजीनियरिंग कंपनियों से पूछा है कि क्या दो हफ्ते में 15 से 20 हजार वेंटिलेटर का इंतजाम हो सकता है? जर्मनी ने 10 हजार और इटली ने 5 हजार वेंटिलेटर का आर्डर किया है। दोनों देश आईसीयू की क्षमता भी दोगुना करने में जुटे हुए हैं। दुनियाभर में वेंटिलेटर बनाने वाली चार-पांच ही बड़ी कंपनियां हैं। इस वक्त इनके पास भी वेंटिलेटर बनाने की इतनी क्षमता नहीं रह गई है, क्योंकि दुनिया के कई बड़े देश बड़ी संख्या में आर्डर दे रहे हैं और सभी को जल्दी चाहिए।

अन्य देशों के अस्पतालों में भी है बेड का संकट 
अस्पतालों में बेड का संकट केवल भारत में नहीं है। बल्कि कोरोना की शुरूआत करने वाले चीन में भी हैं। यहां प्रत्येक 1 हजार नागरिकों पर 4.2 बेड है। यही कारण है जब कोरोना का संकट यहां ज्यादा था तो बड़ी संख्या में होटल्स को अस्थाई हॉस्पिटल में बदल दिया गया था। इसी तरह फ्रांस में प्रत्येक 1 हजार नागरिक पर 6.5, दक्षिण कोरिया में 11.5, चीन में 4.2, इटली में 3.4 और अमेरिका में 2.8 बेड हैं। ये आंकड़े वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) से लिए गए हैं।

भारत में आईआईटी और एम्स तैयार करेंगे वेंटिलेटर
जब पूरी दुनिया वेंटिलेटर के लिए परेशा है तो ऐसी मुश्किल की घड़ी में भारतीय शिक्षण व शोध संस्थानों ने मदद को हाथ बढ़ाया है। आईआईटी कानपुर ने 1 महीने के अंदर 1 हजार पोर्टेबल वेंटीलेटर तैयार करने का ऐलान किया है। संस्थान के प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय ने दैनिक भास्कर से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत की स्थिति को देखते हुए अगले एक महीने में कम से कम 50 हजार वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए वे और उनकी टीम दिन रात एक करके इसके लिए काम करेगी। आईआईटी के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर कहते हैं कि उनकी एक अन्य टीम कोरोना की जांच के लिए किट तैयार करने पर काम कर रही है। जल्द ही उसके भी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। एम्स नई दिल्ली ने भी एक निजी कंपनी के साथ हाथ मिलाया है। दोनों मिलकर प्रोटोटाइप वेंटिलेटर तैयार करेंगे। एम्स के निदेशक प्रो. रंदीप गुलेरिया ने बताया कि  जरूरत पड़ी  तो प्रोटोटाइप वेंटिलेटर का ही प्रयोग किया जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तकरीबन 1200 और वेंटिलेटर का ऑर्डर किया है।

भारत में 30 करोड़ लोग हाइपरटेंशन के शिकार 
कोव-इंड-19 टीम के वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत में 30 करोड़ से अधिक पुरुष और महिलाएं हाईपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) के शिकार हैं। कोरोनावायरस के लिए हाइपरटेंशन बड़ा जोखिम है। वैज्ञानिकों दावा है कि संक्रमण के मामलों की संख्या भारत में अस्पताल के बेड की अनुमानित क्षमता से अधिक हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक संक्रमण के चलते गंभीर रूप से बीमार 5 से 10 प्रतिशत मरीजों को इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) बेड की जरूरत पड़ेगी।

डॉक्टरों की संख्या भी बहुत कम है
डॉक्टरों की संख्या पर नजर डाली जाए तो यह भी जरूरत की अपेक्षा बहुत कम है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल के मुताबिक देश भर में 2018 तक साढ़े 11 लाख एलोपैथिक डॉक्टर उपलब्ध हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है कि हर 1 हजार मरीज पर 1 डॉक्टर का होना चाहिए। 135 करोड़ की भारत की जनसंख्या में डॉक्टरों की संख्या बेहद कम है और डब्ल्यूएचओ के नियम के मुताबिक़ तो बिलकुल भी नहीं है।


ऐसे बढ़ रहा भारत में कोरोना

  • पहले 40 दिन में 50 मामले आए
  • फिर इसके 4 दिनों में यह आंकड़ा 100 तक पहुंच गया
  • इसके अगले 4 दिनों में 150 मामलों की पुष्टि हुई
  • इसके दो दिनों में 200 पॉजिटिव केस सामने आ गए
  • और अब हर दिन लगभग 50 नए मामले सामने आ रहे हैं

Input:Dainik Bhaskar

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HEALTH

सैनिटाइजर-मास्‍क महंगा मिलने की शिकायत करें यहां, तुरंत होगी कार्रवाई

Ravi Pratap

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कोरोनावायरस (Coronavirus) के कहर से बचने के उपाय के तौर पर इस्तेमाल हो रहे फेस मास्क (Face Mask) और हैंड सैनिटाइजर (Hand Sanitizer) को अब आवश्यक वस्तुओं (Essential Goods) की कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है, लेकिन दोनों वस्तुएं बाजार से गायब हैं. यहां तक की सरकार ने मास्क और सैनिटाइजर की अधिकतम खुदरा कीमतें भी तय कर दी हैं, लेकिन देश की राजधानी और आसपास के इलाकों में निर्धारित कीमतों पर ये दोनों वस्तुएं उपलब्ध नहीं हैं. जहां मिल भी रही हैं तो दोगुने-तिगुने दाम पर.

सरकार ने ऐसी किसी भी जमाखोरी, अफवाह की घटना को साझा करने के लिए एक WhatsApp हेल्‍पलाइन शुरू की है, जिस पर जानकारी दी जा सकती है. इस चैटबॉट को ‘Mygov कोरोना हेल्पडेक्स’ नाम दिया गया है और +91 9013151515 नंबर पर WhatsApp संदेश भेजकर इससे जुड़ा जा सकता है. यहां कोरोना वायरस के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सभी सवालों के जवाब हैं.

उधर, भारतीय औषधि गठबंधन (IPA) ने भी कहा है कि वह अपने सदस्यों के साथ ही सरकार, भारत में विभिन्न दवा उद्योग संघों और दवा आपूर्ति श्रृंखला के अन्य भागीदारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहा है कि भारत और विदेश में मरीजों को लगातार दवाएं मिलती रहें.

संगठन ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय दवा संघों, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के स्विट्जरलैंड स्थित मुख्यालय और भारत स्थित कार्यालय के साथ लगातार नजदीकी के साथ मिलकर काम कर रहा है. संगठन ने कहा है कि वह अमेरिका, यूरोप और कई अन्य देशों के संघों के साथ संपर्क में है और दवाओं की आपूर्ति पर किसी भी संभावित प्रभाव पर नजर रखे हुये है. वक्तव्य में कहा गया है कि आईपीए भारत और दुनियाभर में बीमारों को उच्च गुणवत्ता की दवायें उपलब्ध कराने के लिये प्रतिबद्व है.

इस बीच, देश में बड़े स्तर पर ड्रग या दवाओं के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 14,000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है. इससे देश में सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक (API) के उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा. इस फैसले से हमारी चीन से आयात निर्भरता भी कम हो सकेगी.

कोरोनावायरस के प्रकोप से भारत में थोक दवाओं और एपीआई के आयात पर पूरी तरह रोक लग गई है. इससे यह डर पैदा हो गया है कि अगर महामारी की समयसीमा और भी लंबी खिंच गई तो देश में दवाओं की कमी हो सकती है.

Input : Zee Biz

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HEALTH

भारत में कोरोना वायरस दूसरे स्टेज पर, तीसरे स्टेज पर पहुंचा तो स्थिति होगी बेहद गंभीर

Himanshu Raj

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जानलेवा कोरोना वायरस से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें हर मुमकिन तैयारी कर रही हैं, लेकिन जनता की कोशिशों के बिना कोरोना वायरस को नहीं हराया जा सकता. भारत में कोरोना अभी दूसरे स्टेज पर है. अगर ये तीसरे स्टेज पर पहुंच गया तो इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाएगा और स्थिति बेहद गंभीर हो जाएगी. तीसरे स्टेज तक कोरोना ना पहुंचे उसके लिए जरूरी है कि सार्वजनिक जगहों पर भीड़ कम रहे ताकि संक्रमण का खतरा कम हो.

आंकड़ों से समझिए कोरोना की स्टेज का खेल

इटली में 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण से 475 लोगों की मौत हुई है. ये आंकड़ा किसी भी देश में एक दिन में सबसे ज्यादा मौत का है. पिछले तीन दिन में ही इटली में 1 हजार 169 मौत हुई है. चीन में तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इटली में पहले दिन चार से पांच मामले आए थे और फिर धीरे-धीरे बढ़ने लगे. ऐसा ही भारत में भी हो रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण सही से जांच न करना और भीड़ को कम न करना है.

कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा ज्यादा

डब्लूएचओ की रिजनल डायरेक्टर डॉ पूनम खेत्रपाल सिंह ने कोरोना के कम्युनिटी ट्रांसमिशन के खतरे से आगाह किया है. पूनम खेत्रपाल ने कहा है कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन में बहुत सारे लोग प्रभावित होते हैं. चौथे स्टेज को संभलाना मुश्किल हो जाता है. एक्शन लेने में इटली ने काफी देरी की, इसलिए वहां इस वायरस का प्रकोप बढ़ा है.

 

पहली स्टेज- पहली स्टेज में कोरोना वायरस से संक्रमित वो लोग थे, जो विदेश यानी चीन, इटली जैसे देशों की यात्रा करके आए हैं.

 

दूसरी स्टेज- भारत अभी दूसरी स्टेज में है. इस स्टेज में देश को लोगों में विदेश से आए लोगों के जरिए संक्रमण फैल रहा है.

 

तीसरी स्टेज- तीसरी स्टेज में यह कम्यूनिटी ट्रांसमिशन पर होता है. इसका जिक्र हम ऊपर कर चुके हैं.

 

चौथी स्टेज- चौथी स्टेज में कोरोना वायरस इतना फैल चुका होगा कि इसे रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा. इसका अंत कब होगा, नहीं पता. चीन के बाद इटली में यही हो रहा है.

 

पीएम का संदेश- भीड़ मत बनाइए अलग रहिए

आज रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कोरोना पर देश को अपनी बात कहेंगे. देश के नाम से संबोधन से पहले प्रधानमंत्री ने सफदरजंग के एक डॉक्टर के मैसेज को री ट्वीट किया. डॉक्टर ने मैसेज में लिखा है ‘मैं आपके लिए काम पर हूं, आप हमारे लिए घर पर रहिए’. इस ट्वीट के जरिए पीएम का संदेश साफ है कि भीड़ मत बनाइए, अलग रहिए और एकांतवास में रहकर कोरोना को भगाइए.

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने विदेश से लौटी अपनी बहन की ट्रैवल जानकारी सरकार के पोर्टल पर डाली, ताकि उसका टेस्ट हो सके. नवीन पटनायक के इस कदम की पीएम मोदी ने तारीफ की और लिखा कि ये बढ़िया उदाहरण है. उम्मीद करता हूं कि दूसरे लोग भी इससे सीखेंगे. कोरोना को रोकने को लिए हम भी छोटी कोशिश कर सकते हैं.

 

दूसरे देश आए संक्रमित लोगों की वजह से फैला वायरस
सरकार की इस चिंता और तैयारी की वजह है कि अभी कोरोना के जो भी केस सामने आए हैं वो दूसरे देश आए संक्रमित लोग हैं या फिर उनके करीबी या उनके संपर्क में आए कुछ लोग, लेकिन अब खतरा कम्युनिटी ट्रांसमिशन का है यानी समुदाय के स्तर पर कोरोना का फैलने का है.

 

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