बिहार में ऑक्सीजन और उपकरणों की कमी या रोग की गंभीरता पहचानने में त्रुटि से किसी की मौत नहीं हुई है. सरकार चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने की तैयारी कर रही है. यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने मंगलवार को विधान पार्षद प्रेमचंद मिश्रा के तारांकित प्रश्न के जवाब में दी है. बता दें कि इससे पहले राज्यसभा में मोदी सरकार ने बताया था कि देश में एक भी कोरोना मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं हुई थी.

प्रेमचंद मिश्रा ने अपने प्रश्न में पूछा था कि क्या यह सही है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में संक्रमित मरीजों की मौत हुई? इसमें 30 फीसदी से अधिक मौत आइसीयू में इंफेक्शन की वजह से हुई है? उन्होंने कहा कि आइसीयू में बेहतर हाइजीन मेंटेन और इस्तेमाल उपकरणों को ठीक से स्टेरिलाइज किया जाता तो कई जानें बतायी जा सकती थीं. संक्रमितों की अधिक मौतों की वजह ऑक्सीजन की कमी और राेग की गंभीरता पहचानकर तत्काल आइसीयू वेंटिलेटर मुहैया कराने में विफलता भी रही.

मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि सरकार सभी मेडिकल कॉलेज में लिक्विड मेडिकल स्टोरेज टैंक बना रही है. मेडिकल गैस पाइप लाइन सहित प्रेशर स्विंग एब्जॉर्बशन ऑक्सीजन प्लांट लग रहे हैं. बीएमएसआइसीएल के माध्यम से सभी जिला अस्पतालों को 10 हजार 924 बी टाइप, 3696 डी टाइप ऑक्सीजन सिलिंडर और 6183 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर उपलब्ध करवाये गये हैं. डी टाइप 5000 को खरीदने का आदेश दिया जा चुका है.

तीसरी लहर से सुरक्षा के लिए सभी मेडिकल कॉलेज में 30, सभी सदर अस्पतालों में 10-10 पेड्रियाटिक आइसीयू बनाये जा रहे हैं. सभी मेडिकल कॉलेजों के पिकू वार्डों में बेडों को ऑक्सीजन पाइप लाइन से जोड़ा जा रहा है. सरकारी अस्पतालों में कुल 28 हजार 594 बेड तैयार हैं. इसमें से 16 हजार 986 बेड ऑक्सीजन और 2584 आइसीयू बेड हैं. सभी सरकारी अस्पतालों में 1150 वेंटीलेटर उपलब्ध करवाये गये हैं.

मोदी सरकार ने दिया था सदन में बयान- इससे पहले मोदी सरकार के मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यसभा में कहा था कि देश में एक भी मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई थी. मांडविया ने कहा था कि राज्यों से मिली जानकारी के अनुसार एक भी मरीज की मौत ऑक्सीजन से नहीं हुई थी.

Input: prabhat khabar

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