केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद सोमवार को पहली बार बिहार आए आरसीपी सिंह ने उन तमाम सवालों के दिए जो उनकी गैर-हाजिरी में पूछे जाते थे। सबसे बड़ा सवाल कि वह अपनी मर्जी से मंत्री बन गए। प्रदेश जदयू कार्यालय में आयोजित स्वागत समारोह में उन्होंने कहा-बिना नेता की सहमति के कोई सांसद केंद्र में मंत्री बन सकता है क्या? आरसीपी ने नेताओं कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा-लोग मेरे बारे में तरह-तरह की चर्चा करते हैं। कहते हैं कि मैं बारात में गया था। दूल्हा बन गया। यह गलत प्रचार है। ऐसा होने लगा तो कल किसी पार्टी का एमपी प्रधानमंत्री के पास जाएगा। कहेगा कि हमको मंत्री बना दीजिए। ऐसे सांसद को प्रधानमंत्री अपने कैबिनेट में जगह दे देंगे क्या?

आरसीपी ने जोर देकर कहा-मैं नीतीश कुमार की सहमति से ही मंत्री बना हूं। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह से अदावत के बारे में भी उन्होंने जवाब दिया-हम दोनों के रिश्ते बहुत अच्छे हैं। हमारे रिश्ते के बारे में दुष्प्रचार करने वालों को नहीं पता कि हम दोनों कितने करीब हैं। लगे हाथ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी खूब तारीफ की। कहा कि यह प्रधानमंत्री की उदारता है कि उन्होंने सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में जगह दिया। सरकार को अपने दम पर पूर्ण बहुमत है। ऐसे में सहयोगी दलों को मंत्री बनाना उनकी उदारता ही कही जाएगी।

अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी

सिंह ने मंत्री पद पर रहते हुए संगठन में काम करने के बारे में भी अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी। बोले-बीते 11 वर्षों से वह संगठन की मजबूती के लिए काम करते रहे हैं। मंत्री बन जाने से वह संगठन का काम नहीं करेंगे, यह संभव नहीं है। संगठन को जब कभी उनकी जरूरत महसूस होगी, उपलब्ध रहेंगे। हालांकि जातीय जनगणना के बारे में उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश से अलग राय रखी। उनके मुताबिक जब सभी लोगों को समान सुविधाएं मिल रही हैं, जातीय जनगणना अप्रसांगिक हो गई है। स्वागत समारोह में पार्टी के सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, दुलालचंद गोस्वामी, गिरिधारी यादव, महाबली सिंह, मंत्री शीला मंडल, सुनील कुमार एवं जयंत राज सहित कई विधायक शामिल हुए।

Input: Dainik Jagran

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