गया. कोरोना के कारण अब भी मंदिर बंद हैं. भक्त बाहर से ही पूजा कर वापस चले जाते हैं ऐसे में बिहार के गया में हर साल लगने वाले पितृपक्ष मेला (Gaya Pitru Paksha Mela) पर भी संशय बरकरार है. इसको लेकर मुख्यमंत्री को भी चिट्ठी लिखी गई है. हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व माना गया है. पितृपक्ष में पितरो को याद किया जाता है. एक पखवारे तक अपने प्रिय जनों का श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है लेकिन इस वर्ष मोक्ष नगरी गयाजी (Gaya) में आगामी 19 सितंबर से 6 अक्टूबर तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला-2021 के आयोजन पर संशय बना हुआ है.

20 Foreign Nationals Perform Pindadaan Ritual In Gaya

बिहार सरकार द्वारा पितृपक्ष मेला को राज्यकीय मेले का दर्जा दिया गया है. मेले के आयोजन को लेकर श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर मेले के आयोजन की अनुमति मांगी है. समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शंभूलाल विट्ठल व अन्य सदस्यों ने सीएम को ध्यान आकृष्ट कराते हुए पितृपक्ष मेला के धार्मिक, पौराणिक महत्व के साथ आर्थिक पक्ष की चर्चा करते हुए कहा कि प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से गया जिले के लोगों को रोजी-रोटी व रोजगार से जुड़ा हुआ है. विश्वविख्यात विष्णुपद मंदिर में पितृपक्ष मेला के दौरान अपने पूर्वजों के निमित्त मोक्ष कामना हेतु पिंडदानियों एवं तीर्थयात्रियों का आगमन होता है.

उन्होंने पत्र में लिखा है कि पिंडदान का प्रमुख स्थल फल्गु नदी, प्रेतशिला, राम शिला, विष्णुपद और बोधगया है. पिंडदान करने के लिए बहुत बड़ा जगह उपलब्ध है जहां सामाजिक दूरी का पालन करते हुए लोग कर्मकांड कर सकते हैं. सरकार द्वारा तय कोविड गाइडलाइन का सही पालन कर पितृपक्ष मेला के आयोजन करने की अनुमति दी जाए जिसमें पिंडदानियो एवं पंडों को मास्क पहनना अनिवार्य, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे व एयरपोर्ट से आने वाले तीर्थ यात्रियों के कोरोना जांच के बाद ही जिले में प्रवेश करने की अनुमति, यात्रियों के डबल वैक्सीनेशन के बाद ही कर्मकांड की अनुमति दी जाए.

विष्णुपद मंदिर के आसपास के सैकड़ों दुकानदारों की मानें तो 2020 में भी पितृपक्ष मेला का आयोजन नहीं किया गया था जिसमें उससे जुड़े कई लोगों के बीच रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई थी और इस वर्ष भी अगर पितृपक्ष मेले का आयोजन की अनुमति ने दी जाती है तो हम लोग भुखमरी की स्थिति में आ जाएंगे. हम सरकार से मांग करते हैं कि कोरोना गाइडलाइंस के अनुसार मंदिर खोलने और पितृपक्ष मेला का होने की अनुमति दी जाए. बता दें कि 15 दिनों तक चलने वाली पितृपक्ष मेला में लगभग 200 करोड़ का कारोबार होता है लेकिन पिछले साल पितृपक्ष मेला नहीं होने से लोगो के बीच काफी समस्या उत्पन्न हो गई. अब 2021 में भी पितृपक्ष मेला होने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है ब सभी की निगाह सरकार पर टिकी हुई है.

Source : News18

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