लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के सांसद चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी कानून  को लेकर हुई समीक्षा बैठक पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बंद कमरे में अपने अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे हैं, जो खुद तमाम कार्यों में लिप्त रहते हैं. एलजेपी सांसद ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री अपने हवामहल से बाहर नहीं निकलेंगे, जब जनता का भला कर नहीं सकते. जहरीली शराब कांड में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है लेकिन मुख्यमंत्री किसी से मिलने नहीं गए. जब तक आप लोगों से मिलेंगे नहीं और उनके विचार को जानेंगे नहीं, इन समस्याओं का कुछ नहीं होने वाला है.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विकास की बातें करते हैं जो मेरी समझ से बाहर है. उन्होंने किया क्या है, नीतीश कुमार अपने कार्यकाल की पांच उपलब्धि को बता दें. 16 साल से आप राज्य के मुख्यमंत्री हैं. इन 16 वर्षों में बिहार का आपने क्या किया है. आप मुख्यमंत्री होने के बावजूद भी अपना इलाज कराने दिल्ली जाते हैं, तो फिर राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था का क्या मतलब है. चिराग ने कहा कि देश कितनी तरक्की कर गया है. लेकिन बिहार अभी भी उस अनुपात में तरक्की नहीं कर पाया है.

‘CM नीतीश से दो साल से मिलने की कोशिश कर रहा हूं’

चिराग पासवान ने कहा कि नीतीश कुमार पूछ रहे हैं कि हम कहां रहते हैं. तो मैं उन्हें बता दूं कि मैंने कोई अधिक प्रॉपर्टी अर्जित कर के नहीं रखी है. मेरा रहना दो जगहों पर होता है. पहला दिल्ली में सरकारी आवास में और दूसरा पटना के श्रीकृष्णापुरी में रहता हूं. मैं दो साल से आपसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा हूं. मेरे पिता दो महीने तक दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थे. लेकिन आपने उनसे मुलाकात करना जरूरी नहीं समझा और न ही मुझसे कभी फोन पर बात की. उन्होंने कहा कि मैं दो साल से आपकी (नीतीश कुमार) खबर लेने की कोशिश कर रहा हूं. लेकिन आप खुद पूछ रहे हैं कि चिराग पासवान कहां रहते हैं. मेरी पार्टी के कार्यकर्ता मेरे पिता की बरसी का कार्ड देने के लिए आपके दरवाजे पर खड़े रहे. लेकिन आप उनसे नहीं मिले और आप मुझसे पूछ रहे हैं कि मैं कहां हूं.

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‘कृषि कानून वापस लेने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद’

वहीं, चिराग पासवान ने कृषि कानून वापसी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है. उन्होंने कहा कि आखिरकार प्रधानमंत्री ने किसानों के दर्द को समझा और कृषि कानूनों को वापस लिया. हम समझते हैं कि जिनके लिए कानून बनाया गया था, जब वो ही इससे संतुष्ट नहीं थे तो फिर किस के लिए कानून. प्रधानमंत्री ने उनकी मांगों को समझा और फिर कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा की. चिराग ने कहा कि किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की भी मांग है जिसका हम लोग भी समर्थन करते हैंं. मैं उम्मीद करता हूं कि प्रधानमंत्री ने जिस तरह से देश के किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है, सरकार किसानों की इस मांग को भी पूरा करेगी.

Source : News18

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