नेशनल व स्टेट हाईवे की तर्ज पर जल्द ही ग्रामीण सड़कों पर भी क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे। इससे दुर्घटना के बाद गाड़ियों के लुढककर सड़क से नीचे गिरने की आशंका कम हो जाती है और जान-माल का नुकसान भी कम होता है। सड़क सुरक्षा को लेकर पिछले दिनों आयोजित परिवहन विभाग की बैठक में यह निर्णय लिया गया है, जिसके कार्यान्वयन के लिए सड़कों को चिह्नित करने का काम शुरू हो गया है।

काफी हद तक पूरा हो चुका है कार्य

केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश के बाद राज्य में नेशनल व स्टेट हाईवे के किनारे क्रैश बैरियर लगाने का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है। जानकारी के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तहत नेशनल हाईवे की 2680 किमी में 399 किलोमीटर सड़क दुर्घटना के लिए संवेदनशील है। इसमें से लगभग 300 किमी में क्रैश बैरियर लगाया जा चुका है, जबकि 100 किलोमीटर में क्रैश बैरियर लगाने का काम जारी है।

200 स्थानों पर लगाया जा रहा क्रैश बैरियर

वहीं पथ निर्माण विभाग के अधीन 2686 किलोमीटर सड़कों में से 937 स्थानों को सड़क दुर्घटना के लिहाज से खतरनाक माना गया है। इसमें अब तक 700 से अधिक स्थानों पर क्रैश बैरियर लग चुके हैं, जबकि 200 स्थानों पर क्रैश बैरियर लगाया जा रहा है। बता दें बिहार के ग्रामीण इलाकों में आवागमन सुविधा बेहतर करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सड़कों का निर्माण हो रहा है।

इसके बावजूद कई स्थानों से शिकायतें भी मिल रही हैं। अभी भी सड़कों का जाल नहीं पहुंच पाया है। ऐसे में अब नेशनल व स्टेट हाईवे की तर्ज पर जल्द ही ग्रामीण सड़कों पर भी क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे। इससे फायदा यह होगा कि दुर्घटना के बाद गाड़ियों के लुढककर सड़क से नीचे गिरने की आशंका कम हो जाती है और जान-माल का नुकसान भी कम होता है।

Input: Dainik Jagran

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