प्राकृतिक या गैर प्राकृतिक आपदा में मौत के बाद शव बरामद न होने पर भी परिजन को अनुग्रह अनुदान दिया जाएगा। आपदा प्रबंधन विभाग ने पूर्व के नियमों को शिथिल किया है। पूर्व में अनुदान के लिए शव बरामद होना व पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि की अनिवार्यता थी।

विभाग ने प्राकृतिक या कृत्रिम आपदा में मौत पर मिलने वाले अनुग्रह अनुदान के पुराने नियमों को शिथिल कर दिया है। नए प्रावधान में कहा गया है कि यदि आपदा के दौरान किसी की मौत होती है और शव बरामद नहीं होता है, तब भी परिजन को मुआवजे का भुगतान सशर्त किया जाएगा। इसमें व्यवस्था की गई है कि पुलिस स्टेशन में संबंधित व्यक्ति की मौत या लापता होने की एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। इसके बाद यदि शव बरामद नहीं होता है तो जिला प्रशासन की ओर से उसकी तस्वीर सहित विज्ञापन का प्रकाशन किया जाएगा। विज्ञापन प्रकाशन के बाद एक माह तक उचित रिस्पॉन्स का इंतजार किया जाएगा। यदि इस अवधि में व्यक्ति के जिंदा होने के कोई सबूत नहीं मिलते हैं या कोई दावा सामने नहीं आता है तो उसके मरने की पुष्टि समझी जाएगी। इसके बाद परिजन से इस आशय का शपथ पत्र लिया जाएगा कि यदि व्यक्ति भविष्य में जीवित पाया जाता है तो अनुग्रह अनुदान की राशि वसूलनीय होगी। इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है। आपदा विभाग के इस निर्णय के बाद अब उन मामलों के निष्पादन में सहूलियत होगी, जिनमें शव की पहचान या बरामदगी नहीं हो पाती है।

Source : Hindustan
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