पटना कटिहार स्पेशल इंटरसिटी ट्रेन (patna katihar special intercity train) को लोग इन दिनों घास ट्रेन के नाम से जानते हैं. जैसे ही यह ट्रेन खगड़िया स्टेशन पर रुकती है तो ट्रेन की खिड़कियों पर हरी हरी घास के बोझे रस्सी के सहारे बांध दिए जाते हैं. यह किसी एक खिङकी में नहीं टंगा होता है, बल्कि पुरी ट्रेन के दोनों ओर की खिड़कियों पर इसी तरह से घास का बोझा लटका हुआ मिलता है. बिहार में बाढ़काल के दौरान यह ट्रेन पशुपालकों के लिए खास हो जाती है. खिड़की पर जगह नहीं मिले तो ट्रेन की बोगी के गेट पर भी घास के बोझा को रख दिया जाता है, जिसके कारण ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों को भी परेशानी होती है. यह देख यात्री झल्लाते तो जरुर हैं, लेकिन पशुपालकों की परेशानी को देखते हुए विरोध नहीं करते.

क्या कहते हैं पशुपालक
खगङिया, बेगुसराय, सहरसा, नवगछिया सहित कई इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं. चारों ओर पानी ही पानी नजर आता है, ऐसे में पशुपालकों को हरे चारे का आभाव रहता है. ट्रेन में घास लेकर बरौनी से नारायणपुर घास लेकर जा रहे पशुपालक नवीन कुमार का कहना है कि नवगछिया के नारायणपुर में चारों ओर से बाढ़ का पानी आ गया है. ऐसे में पशुओं को हरे चारे का आभाव हो जाता है. इसलिए गांव के पशुपालक सुबह कटिहार पटना इंटरसिटी स्पेशल ट्रेन से जाते हैं और फिर सूखी जगह से घास को काटकर स्टेशन लाते हैं. ट्रेन आने के बाद सभी लोग इसी ट्रेन से घास लेकर नारायणपुर लौट जाते हैं.

हर साल बाढ़ग्रस्त इलाके के लोगों को होती है परेशानी
खगड़िया के लोग बाढ़ के समय घास लादकर चलने वाली ट्रेन को घास ट्रेन के नाम से पुकारते हैं. पूर्व मध्य रेलवे की ओर से मनोनीत सलाहकार सुभाष चन्द्र जोशी ने बताया कि पिछले साल कोरोना के बजह से ट्रेन नहीं चल पाई, लेकिन उससे पहले समस्तीपुर सहरसा पैंसेजेंर, राजेन्द्र नगर सहरसा इंटरसिटी में सहित अन्य ट्रेन में सहरसा और खगड़िया के पशुपालक काफी संख्या में इस ट्रेन से घास ले जाते रहे हैं. खासकर धमहारा, खोपङिया सहित अन्य जगहों के बाढ़ पीड़ित ट्रेन के माध्यम से सूखी जगह से घास ट्रेन के सहारे लाते थे. लेकिन इसबार अभी सिर्फ पटना कटिहार इंटरसिटी से ही जा रहे हैं. जैसे बाढ का पानी अन्य इलाकों में फैलेगा ज्यदा संख्या में पशुपालक ट्रेन से घास लाने के लिए निकलने लगते हैं.

सरकार के दावे पर भरोसा नहीं करते पशुपालक
खगड़िया के डीएम आलोक रंजन घोष के निर्देश पर खगड़िया के परबता में पशुपालकों को पशु चारा की व्यवस्था करवाई गई है, लेकिन ट्रेन में बैठे पशुपालकों का कहना है सरकार के दावे पर विश्वास नहीं है. पशुओं को जिंदा रखने के लिए महेनत करनी पड़ती है.
Input: News18



