अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थी अगर इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रवेश परीक्षा में सफल होते हैं तो उन्हें सरकार तोहफे में लैपटॉप देगी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत 12वीं के बाद की महत्वपूर्ण प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल होने वाले विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। राज्य मंत्रिपरिषद की सहमति के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।

प्रतिष्ठित प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षाओं में हिस्सेदारी बिना या सीधे इंजीनियरिंग-मेडिकल में नामांकन वाले विद्यार्थियों को इसका फायदा नहीं मिलेगा। किन प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षाओं के जरिए इंजीनियरिंग में नामांकन पाने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप का लाभ मिलेगा, इसकी सूची अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की ओर से तैयार की जाएगी। पात्रों के चयन की प्रक्रिया भी आगामी 23 दिसंबर को होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में तय होगी। सरकार के उच्च स्तर से इसकी सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है।

प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए दूसरे राज्यों के इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने वाले बिहार के अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थी भी पात्र होंगे। यह प्रवेश प्रतियोगिता अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की चयनित सूची में शामिल होनी चाहिए। दूसरी राज्य सरकारों के इंजीनियरिंग एवं मेडिकल कॉलेज भी इसके तहत शामिल हैं।

राज्य के 1800 से अधिक विद्यार्थियों को होगा लाभ
अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग की प्रस्तावित योजना का लाभ 1800 से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल नौ हजार सीटें हैं। अनुसूचित जाति समुदाय के लिए इनमें से 16 फीसदी आरक्षित हैं। इस तरह कुल 1440 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। अनुसूचित जनजाति के लिए एक फीसदी आरक्षित सीट के हिसाब से यह संख्या 90 है। इसी तरह मेडिकल कॉलेजों में लगभग 1400 सीटें हैं। इनमें अनुसूचित जाति के लिए लगभग 224 सीट आरक्षित है। अनुसूचित जनजाति के लिए 14 सीटें रिजर्व हैं। इसके अलावा अनारक्षित सीटों पर भी मेधा के आधार पर दोनों समुदायों के विद्यार्थियों का नामांकन होता है। दूसरे राज्यों में प्रवेश परीक्षाओं के जरिए भी ये विद्यार्थी नामांकन पाते हैं।
Source : Hindustan
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