रोहतास और कैमूर जिलों के किसानों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब इन दोनों जिलों के लाखों किसानों को जमीन की खरीद-बिक्री के लिए चकबंदी पदाधिकारी की इजाजत नहीं लेनी होगी। सरकार ने दोनों जिलों के 249 मौजों को चकबंदी के लिए अधिसूचित किया था। चकबंदी तो नहीं हुई, लेकिन जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लग गई। इससे किसानों में भारी नाराजगी थी। गुरुवार को राज्य सरकार ने पाबंदी वापस लेने की घोषणा की। राज्य सरकार ने पांच साल पहले इन दोनों जिलों के गांवों में चकबंदी की घोषणा की थी। कर्मचारियों की कमी के कारण अब तक चकबंदी शुरू नहीं हुई है।


चकबंदी के लिए अधिसूचित जमीन की खरीद-बिक्री पर लग जाती है रोक
मालूम हो कि चकबंदी के लिए अधिसूचित इलाके में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लग जाती है। अगर किसी किसान को जमीन बेचनी है तो उसके लिए वाजिब कारण बता कर चकबंदी पदाधिकारी से इजाजत लेनी होती है। इस प्रक्रिया में किसानों ने अत्यधिक देरी के अलावा रिश्वतखोरी की भी शिकायत की थी। किसानों ने पाबंदी हटाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को ज्ञापन दिया था। विभागीय मंत्री रामसूरत राय ने विभाग से पाबंदी हटाने का प्रस्ताव मांगा था। गुरुवार को उन्होंने इस पर दस्तखत कर दिया। कुमार ने कहा कि सरकार के फैसले से किसानों को राहत मिली है। जल्द ही इन जिलों में चकबंदी का काम शुरू हो जाएगा। मंत्री ने बताया कि चकबंदी अधिनियम की धारा पांच(1) में जमीन के निबंधन से मुक्ति का प्रविधान है। उन्होंने इसी आधार पर आदेश दिया है। मंत्री का आदेश एक-दो दिनों के भीतर प्रभावी हो जाएगा। चकबंदी निदेशालय के संयुक्त निदेशक युगल किशोर ने बताया कि सरकार के आदेश की आधिकारिक प्रति रोहतास और कैमूर के चकबंदी पदाधिकारियों को भेजी जा रही है। इसमें एक-दो दिन का समय लग सकता है। किसान नए आदेश का लाभ ले सकते हैं।
Source : Dainik Jagran






