बिहार पंचायत चुनाव में परिवर्तन की लहर चल रही है। अधिकतर जगहों पर नये चेहरे पर जनता ने भरोसा जताया है। वैशाली जिले के ज्यादातर प्रखंडों में जहां 70 से 80 फीसदी मुखिया सीट गंवा दे रहे हैं। वहीं भगवानपुर प्रखंड की हुसेना खुर्द पंचायत एक ऐसी पंचायत है, जहां के मुखिया का ताज 53 वर्षों से एक ही परिवार के लोगों सिर पर है।

बिहार पंचायत चुनाव: 53 साल से एक ही परिवार के पास मुखिया का पद, परिवर्तन की लहर के बीच कायम की परंपरा

निवर्तमान मुखिया शिवप्रसाद सुमन उर्फ शिव शंकर कुशवाहा ने मुखिया पद का चुनाव जीतकर परिवार की 53 वर्षों से चली आ रही परंपरा को कायम रखा है। उन्होंने हिन्दुस्तान से बातचीत के दौरान बताया कि सर्वप्रथम 1968 में स्वर्गीय कपिलदेव प्रसाद सिंह मुखिया बने थे। वे उसके बाद से 38 वर्षों तक मुखिया पद पर रहे । उनके बाद जब महिला आरक्षित सीट हुई तो 2006 में उनकी पतोहू ममता देवी मुखिया बनीं। इसके बाद मुखिया ममता देवी शिक्षिका के लिए चयनित हो गईं। तब 2011 में उनकी बड़ी पतोहू अमिता मुखिया बनीं। इसके बाद जब सीट सामान्य हुई तो उनके छोटे पुत्र शिव प्रसाद सुमन कुशवाहा 2016 में हुए चुनाव में मुखिया पद पर चुनाव लड़े और निर्वाचित हुए।

मुखिया सुमन के पुन: मुखिया बनने पर पंचायत के लोगों ने उन्हें बधाई दी। इस दौरान उन्होंने बताया कि 1968 में मेरे पिता पहली बार मुखिया बने थे। इतने वर्षं तक पंचायत के लोगों ने प्यार जो मेरे परिवार को दिया है। वह ईमानदारी और मेहनत से पंचायत का विकास करने का फल है। लोगों के हर सुख-दु:ख में साथ देने का प्रयास मैं और मेरा पूरा परिवार करता है। आम लोगों को मान-सम्मान देते हैं। जिसके कारण 53 वर्षों से पंचायत के लोगों ने सेवा करने का मौका दिया। मुखिया ने बताया कि उनके पिता का 2012 में निधन हो गया था।

Source : Hindustan

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