बिहार में नया नियम लागू होने के बाद सड़क दुर्घटना के हताहतों में मुआवजा लेने की दिलचस्पी कम हो गई है। परिवहन विभाग की ओर से बनाए गए नियम को लागू हुए तीन महीने होने को हैं, लेकिन अब तक मात्र 100 लोगों ने ही डीटीओ कार्यालय में आवेदन दिया है, जिसमें से 10 की मंजूरी मिली। जबकि चार लोगों को ही सरकारी सहायता मिल सकी है।

नए नियम के तहत डीटीओ कार्यालय में आवेदन देने की जटिलता के कारण यह स्थिति बनी है। दरअसल, पहले सड़क दुर्घटना होने पर मृतक के परिजनों या घायलों को सरकारी सहायता आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से मिला करती थी। प्रखंड कार्यालय में लोग आवेदन दिया करते थे और जिलों से पैसा मिलने पर पैसा आसानी से मिल जाया करता था। आपदा प्रबंधन के माध्यम से मृतक के परिजनों को चार लाख मिला करता था। 15 सितम्बर से राज्य में बिहार मोटरगाड़ी (संशोधन-एक) नियमावली-2021 लागू किया गया है। इस नियम के बाद राज्य में सड़क दुर्घटना के फलस्वरूप गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50 हजार और मृतक के आश्रितों को पांच लाख दिए जाते हैं। परिवहन विभाग ने इसके लिए बिहार वाहन दुर्घटना सहायता निधि नाम से रिवॉल्विंग फंड का गठन किया है।

नए नियम के तहत सड़क दुर्घटना होने पर उसकी सूचना स्थानीय थाना को अनिवार्य रूप से देना है और साथ ही, एफआईआर भी दर्ज करना है। मौत की स्थिति में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सरकारी अस्पताल से प्राप्त करना है।
जबकि गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में स्थानीय सरकारी अस्पताल से इंजूरी रिपोर्ट प्राप्त करनी है। इसके बाद इन दस्तावेजों के साथ संबंधित जिले के जिला परिवहन पदाधिकारी के यहां आवेदन करना है। विभाग ने यह भी कहा है कि आवेदन देते समय आवेदकों को उस गाड़ी का नंबर भी एफआईआर में दर्ज करना है, जिससे दुर्घटना हुई है। इस जटिलता के कारण बिहार में अब लोग सड़क दुर्घटना होने पर आवेदन देने सामने नहीं आ रहे हैं।

खासकर दूरदराज गांवों में दुर्घटना होने पर लोग जिला मुख्यालय आकर डीटीओ ऑफिस में आवेदन देने से परहेज कर रहे हैं। कई मामलों में पुलिस-प्रशासन के लोग ही खुद पहल कर लोगों से आवेदन दिलवा रहे हैं।
100 लोगों ने डीटीओ के पास दिए आवेदन
15 सितंबर से लागू इस नियम के बाद 11 अक्टूबर को पहला मुआवजा खगड़िया में मिला। इसके बाद अब तक बमुश्किल 100 लोगों ने डीटीओ के यहां आवेदन दिए। इसमें से 10 लोगों के आवेदन की मंजूरी दी गई है और चार को ही अब तक सरकारी सहायता मिल सकी है। जबकि इस अवधि में बिहार में दुर्घटना में कई गुना अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

नहीं हो पा रहा आवेदन : परिवहन विभाग ने ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू की है, पर यह अब तक लागू नहीं हो सका है। इस कारण लोग साईबर कैफे या वसुधा केंद्र से भी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। स्पष्ट है कि विभाग की यह योजना तभी कारगर साबित होगी जब आवेदन लेने की सुविधा प्रखंड कार्यालय से हो।
Source : Hindustan
(मुजफ्फरपुर नाउ के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)



