बिहार सरकार के एक फैसले ने कई लोगों को निराश कर दिया है। इस फैसले के कारण देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व पर सरकार के मंत्रियों को एक अहम जिम्मेदारी से वंचित कर दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस बार कोविड के प्रकोप को देखते हुए झंडोत्तोलन की जिम्मेदारी मंत्रियों की बजाय जिलाधिकारी और प्रमंडलों में कमिश्नर की होगी। मंत्रिमंडल सचिवालय ने इस संबंध में जिलों को निर्देश भेजे हैं। इसमें स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर विस्तृत जानकारियां दी गई हैं। इसमें बताया गया है कि समारोह के दौरान क्या करना है और क्या नहीं करना है।
पटना में नहीं प्रभावी होगा यह निर्देश
जारी निर्देश में कहा गया है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जिलों में झंडोत्तोलन की जिम्मेदारी मंत्रियों की थी, लेकिन कोरोना के प्रकोप को देखते हुए इस बार समारोह में मंत्री की बजाय जिलों में जिलाधिकारी और प्रमंडलों में आयुक्त द्वारा किया जाएगा। पटना को छोड अन्य जिलों में यह आदेश प्रभावी होगा। मंत्रिमंडल सचिवालय द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार भी आमजन का प्रवेश राजकीय समारोह में नहीं होगा।

ई-कार्ड के जरिये ही मिलेगा समारोह में प्रवेश
समारोह में अति-विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित करने के लिए प्रमंडलों के आयुक्त और जिलाधिकारियों को अधिकृत किया गया है। गृह विभाग तय करेगा परेड में कितने जवान और कितनी टुकडिय़ां भाग लेंगी। एनसीसी और स्काउट को परेड में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई है। जिन लोगों को समारोह के लिए आमंत्रित किया जाना है उन्हें प्रवेश पत्र ई-कार्ड के आधार पर ही दिया जाएगा। झांकियां निकालने की छूट दी गई है लेकिन झांकियां सात-आठ से ज्यादा नहीं होंगी।

प्रभारी मंत्री करते रहे हैं झंडोत्तोलन
बिहार में कुछ सालों से ऐसी परंपरा है कि जिलों में स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में प्रभारी मंत्री झंडोत्तोलन करते रहे हैं। इसके अलावा दलित बस्तियों में सरकार के स्तर से समारोह आयोजित करने और बस्ती के किसी सम्मानित बुजुर्ग से झंडोत्तोलन करवाने की परंपरा भी कुछ साल पहले शुरू की गई थी।




