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मोदी सरकार का अहम फैसला, अब भारतीय शिक्षकों के लिए भी खुलेगा विदेश जाने का रास्ता

Santosh Chaudhary

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ग्लोबल इनीशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क (ज्ञान) कार्यक्रम के तहत भारतीय शिक्षकों को भी दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में भेजने का फैसला किया है। ज्ञान कार्यक्रम के इस अगले चरण को अमलीजामा पहनाने के लिए मंत्रालय ने तैयारी शुरू कर दी है।

अभी तक इस कार्यक्रम के तहत सिर्फ विदेशी शिक्षकों को ही भारत बुलाया जाता था

अभी इस कार्यक्रम के तहत सिर्फ विदेशी शिक्षकों को भारत बुलाया जाता है। विदेशी शिक्षक देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में एक तय समय तक पढ़ाने का काम करते हैं। कार्यक्रम के तहत पिछले साल 800 से ज्यादा विदेशी शिक्षक भारत आए।

शिक्षक उन्हीं देशों में जाएंगे जहां पर सबसे ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं

ज्ञान कार्यक्रम के अगले चरण के तहत विदेशी संस्थानों में कुछ समय के लिए पढ़ाने के इच्छुक भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। हालांकि, भारतीय शिक्षकों को सिर्फ उन्हीं देशों या संस्थानों में भेजा जाएगा, जहां मौजूदा समय में सबसे ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और वहां के संस्थानों से मांग भी आई है। इस दृष्टि से भारतीय प्रबंधन संस्थान (आइआइएम), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) आदि के शिक्षकों की मांग सबसे ज्यादा है।

ज्ञान कार्यक्रम सफल रहा, तो विदेश में भारतीय शिक्षकों के लिए खुलेगी नई राह

सरकार का मानना है कि यदि ज्ञान कार्यक्रम का नया चरण सफल रहा, तो विदेश में भारतीय शिक्षकों के लिए नई राह खुलेगी। वे विदेशी संस्थानों के अध्ययन के तरीके (स्टडी पैटर्न) को अच्छे से समझ सकेंगे, जो बाद में उनके संस्थानों को उसी स्तर पर खड़ा करने में मददगार साबित होगा।

विदेशी शिक्षकों को बुलाने की प्रक्रिया आसान हुई

पहले किसी भी विश्वविद्यालय या संस्थान को विदेशी शिक्षकों को बुलाने अथवा अपने शिक्षकों को विदेश भेजने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और मंत्रालय स्तर पर अनुमति लेनी होती थी। इसमें संस्थानों का काफी समय खराब होता था। साथ ही उन्हें एक लंबी प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता था। ज्ञान कार्यक्रम की शुरुआत के बाद विदेशी शिक्षकों को बुलाने की प्रक्रिया आसान हो गई।

भारतीय शिक्षकों के सामने विदेश जाने की प्रक्रिया में पेचीदगी बरकरार हैं

इच्छुक संस्थानों को इसके लिए अब सिर्फ ऑनलाइन अनुरोध करना होता है जो सीधे संबंधित संस्थान तक को भेज दिया जाता है। बाद में शिक्षकों की उपलब्धता के आधार पर उनका कार्यक्रम तय हो जाता है। हालांकि, भारतीय शिक्षकों के सामने अध्यापन कार्य के लिए विदेश जाने की प्रक्रिया में पेचीदगी बरकरार हैं, जिसका ज्ञान कार्यक्रम के नए चरण के जरिये निराकरण किया जाएगा।

सरकार ने यह कवायद भारतीय संस्थानों को विश्वस्तरीय रैकिंग में पहुंचाने के लिए शुरू की

यूजीसी से जुड़े अधिकारियों की मानें तो मंत्रालय ने यह सारी कवायद भारतीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय रैकिंग में पहुंचाने के लिए शुरू की है।

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चौथी बार MP के मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह, अकेले ही राजभवन में ली शपथ

Muzaffarpur Now

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भोपाल. मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान पर विराम लगाते हुए सोमवार रात 9 बजे बीजेपी के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान ने सूबे के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. राजभवन में राज्यपाल लालजी टंडन ने उन्हें शपथ ‌दिलवाई. इस दौरान कोरोना के चलते लॉकडाउन होने के कारण उनके साथ किसी अन्य मंत्री ने शपथ नहीं ली है. एक सादे समारोह के दौरान अकेले ही शिवराज सिंह ने शपथ ली. गौरतलब है कि शिवराज प्रदेश के 32वें और सीएम पद पर चार बार काबिज होने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं.

तीन बसों में पहुंचे विधायक

शिवराज के शपथ समारोह में शामिल होने के लिए बीजेपी के विधायक तीन बसों में सवार होकर राजभवन पहुंचे. हालांकि कोरोना के चलते समारोह में कोई भी कार्यकर्ता मौजूद नहीं रहे. वहीं विधायक भी बिना अपने समर्थकों के ही राजभवन पहुंचे.

इससे पहले बीजेपी के भोपाल स्थित कार्यालय में हुई बैठक के दौरा शिवराज स‌िंह को विधायक दल का नेता चुना गया था. पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव ने शिवराज के नाम का प्रस्ताव रखा था. बैठक में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, राजेंद्र शुक्ल सहित अन्य विधायक मौजूद थे. बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर अरुण सिंह और विनय सहस्‍त्रबुद्धी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े.

पार्टी मेरी मां, इसकी लाज रखूंगा

विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शिवराज ने कहा कि पार्टी मेरी मां है और मैं मां के दूध की लाज रखने में कोई कसर नहीं छोड़ूंगा. उन्होंने कहा सबको साथ लेकर चलेंगे. कमलनाथ सरकार के बारे में शिवराज सिंह चौहान ने कहा-पिछले 15 महीने में पूरे प्रदेश की व्यवस्था चौपट हो गई है और अब उसे सुधारा जाएगा.

आनन-फानन में बैठक

शिवराज के नाम पर सोमवार दोपहर पार्टी आलाकमान ने मोहर लगाई. उसके बाद आनन-फानन में बीजेपी विधायक दल की फिर बैठक बुलाई गई. इससे पहले कोरोना संक्रमण के कारण बैठक टाल दी गई थी और विधायकों को अपने क्षेत्र में जाने का निर्देश दे दिया गया था. लेकिन आलाकमान का फैसला आते ही फौरन विधायकों को भोपाल पहुंचने का निर्देश दिया गया.

Input : News18

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अगर करते हैं लॉकडाउन का उल्लंघन तो इन धाराओं में आप पर हो सकता है केस

Muzaffarpur Now

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देश में कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 22 राज्य के 82 जिलों को पूरी तरह 31 मार्च तक बंद कर दिया गया है. जिसमें यूपी के 15 जिलों में 25 मार्च तक बंदी रहेगी, जबकि तीन राज्यों में आंशिक बंद की घोषणा की गई है. इस लॉकडाउन के बावजूद लोगों ने अपने घर से बाहर निकलना जारी रखा है. लेकिन शायद ऐसे लोगों को पता नहीं है कि लॉकडाउन तोड़ने यानी इस नियम का उल्लंघन करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

लॉकडाउन का उल्लंघन करने की खबरें लगातार आ रही हैं, बॉर्डर एरिया पर लोग बेवजह दूसरे राज्यों में जाने की कोशिश कर रहे हैं. जबकि लॉकडाउन में कुछ ही लोगों को जरूरी छूट मिलती है. इसके चलते पीएम नरेंद्र मोदी ने सभी राज्य सरकारों को लॉकडाउन को सख्ती से पालन करने को कहा.

जनता कर्फ्यू के बाद लॉकडाउन की स्थिति पर पीएम मोदी ने ट्वीट किया है, ”लॉकडाउन को अभी भी कई लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. कृपया करके अपने आप को बचाएं, अपने परिवार को बचाएं, निर्देशों का गंभीरता से पालन करें. राज्य सरकारों से मेरा अनुरोध है कि वो नियमों और कानून का सख्ती से पालन करवाएं.”

अगर कोई प्रशासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. इसमें आईपीसी की कई धाराओं में उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.

  • – IPC की धारा 188 के तहत ज़िला अधिकारी कार्रवाई कर सकता है.
  • – अगर कोई व्यक्ति अपने कोरोना पॉजीटिव होने की जानकारी छिपाता है तो उस पर कनिका कपूर जैसी FIR भी हो सकती है, IPC की धारा 269 और 270 के तहत भी कार्रवाई हो सकती है.
  • – सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 400 से अधिक मामले आ चुके हैं. इसमें से 41 विदेशी हैं जबकि देश में 8 लोगों की मौत भी हो चुकी है. इस महामारी से बचने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें जनहित में सख्त से सख्त फैसले लेने से भी पीछे नहीं हट रही हैं.

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कोरोना वायरस: सुप्रीम कोर्ट ने की मोदी सरकार की तारीफ, कहा- आलोचक भी उनके काम के हुए मुरीद

Muzaffarpur Now

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी से निपटने के लिये केन्द्र द्वारा उठाये गये कदमों की तारीफ की है. कोर्ट ने कहा कि कहा कि उसके आलोचक भी इन प्रयासों की सराहना कर रहे हैं.

‘सरकार मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए सक्रिय’

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबड़े, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा, ‘हम संतुष्ट हैं कि सरकार मौजूदा स्थिति से निपटने के लिये बहुत सक्रिय हो गयी है और उसके आलोचक भी कह रहे हैं कि वे (सरकार) अच्छा काम कर रहे हैं.’

पीठ ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिये कोविड-19 के संदिग्ध मामलों की जांच करने वाली प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने के साथ ही ज्यादा एहतियाती उपायों का निर्देश संबंधित प्राधिकारियों को देने के लिये दायर याचिकओं पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं. शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे इस संबंध में सरकार के पास अपना प्रतिवेदन दें.

याचिकाकर्ता ने किया था ये अनुरोध

याचिकाकर्ताओं में से एक याचिकाकर्ता ने इस स्थिति से निपटने तथा संदिग्ध व्यक्तियों को अलग रखने के लिये बने केन्द्रों की संख्या बढ़ाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था.

बता दें कि पीएम मोदी कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. पहले उन्होंने विदेशों मे फंसे भारत के हज़ारों लोगों को सुरक्षित एयरलिफ्ट कराया. अब सरकार अलग-अलग शहरों को लॉकडाउन कर रही है. ट्रेन और बसों की आवाजाही भी रोक दी गई हैं. इसके अलावा टेस्ट का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है.

Input : News18

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