उत्तर बिहार सहित दक्षिण बिहार के डेढ़ दर्जन जिलों के किसानों के लिए राहत की खबर है। बिहार में घोड़परास (नीलगाय) की नसबंदी शुरू कर दी गई। पर्यावरण वन, एवं जलवायु परितर्वन विभाग द्वारा पहली बार घोड़परास को पकड़कर नसबंदी की गई है। बिहटा एयरपोर्ट स्टेशन के अंदर पकड़कर 6 घोड़परास को नसबंदी की गई है। पर्यावरण मंत्री नीरज कुमार सिंह सोमवार को पटना जू के गेट नंबर एक सभी घोड़परास को हरी झंडी दिखाकर बेतिया स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के लिए रवाना करेंगे। दैनिक भास्कर में किसानों की दर्द छपा तो 25 दिन के अंदर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 6 घोड़परास को पकड़कर नसबंदी की।

पहली बार पहल
घोड़परास (नीलगाय) के बढ़ते संख्या को नियंत्रण करने के लिए सरकार के द्वारा नई पहल की गई है। पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिर्वतन विभाग के द्वारा 2019 तक किसानों के आवेदन पर घोड़परास (नीलगाय) को मारने की अनुमति दे रही थी। अब संख्या नियंत्रण करने के लिए विभाग घोड़परास की नसबंदी कर जंगल में छोड़ेगी।

बिहटा के जंगलों में घोड़परास को पकड़ने के लिए करीब 60 लोगों की टीम लगी है
विभाग के पदाधिकारी के निर्देश पर पटना डीएफओ के नेतृत्व में छह घोड़परास को नसबंदी करने में दो डॉक्टर, रेंज ऑफर, दो फोरेस्टर सहित अन्य कर्मियों की टीम बनी। इसमें टोटल लगभग 60 लोगों की टीम लगी थी। यह टीम लगभग 25 दिन के अंदर बिहटा एयरपोर्ट के अंदर जंगल से 6 घोड़परास को पकड़कर नसबंदी की है।

किसानों के आवेदन पर विभाग मारने और पकड़कर नसंबदी दोनों काम करेगा
घोड़परास से परेशान किसान अगर पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को इसे मारने के लिए आवेदन देंगे तो उन्हें अनुमति दी जाएगी। काफी संख्या में घोड़परास है तो उसे मारने के लिए भी अनुमति मिलेगी। इतना ही विभाग की तरफ से घोड़परास पकड़कर नसबंदी भी करेगा।
मारने के अंतिम आदेश 2019 में दिया गया था
किसानों को हो रहे फसल बर्बादी को रोकने के लिए पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के द्वारा चार साल में 4829 घोड़परास मारे गए हैं। विभाग द्वारा इस संबंध में अंतिम आदेश 2019 में दिया गया था, तब 995 घोड़परास मारे गए थे।
Source : Dainik Bhaskar




