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लिट्टी-चोखा का वर्ल्‍ड रिकार्ड! बिहार का ये पूरा शहर आज खाएगा केवल एक ही चीज

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बिहार का बक्‍सर शहर आज अनोखा रिकार्ड बना रहा है। शहर के प्राय: हर घर में आज अपने राज्‍य का मशहूर व्‍यंजन लिट्टी-चोखा जरूर बनेगा। शहर में लिट्टी-चोखा बनाने और खाने का क्रम रविवार की अल सुबह पौ फटने के साथ ही शुरू हो गया है, जो देर रात तक चलेगा। दरअसल, बक्‍सर में पिछले पांच दिनों से चल रहे पंचकोसी मेले का आज आखिरी दिन है। इस दिन लोग बक्‍सर शहर के चरित्रवन में लिट्टी-चोखा खाते हैं। कुछ लोगों के लिए यह पिकनिक है तो कई लोग इसे एक देसी अंदाज वाला एक फूड फेस्टिवल मानते हैं। लोक कथाओं के अनुसार इस मेले का अतीत भगवान श्रीराम से जुड़ा है। पंचकोसी मेले का असल अंदाज भी धार्मिक ही है। इसके जरिए बिहार की सांस्‍कृतिक पहचान और खाने की देसी डिशेज की ब्रांडिंग भी होती है। हालांकि, इतने बड़े आयोजन को बड़ी पहचान दिलाने के लिए सरकार और प्रशासन के स्‍तर से कोई प्रयास नहीं हाेने पर स्‍थानीय लोगों में अफसोस भी है।

बक्‍सर के पंचकोशी मेले का आज आखिरी दिन। जागरण

दिल्‍ली से कोलकाता के लिए रेल के रास्‍ते चलने पर पटना से पहले बिहार का पहला बड़ा शहर बक्‍सर पड़ता है। आज बक्‍सर का नजारा बेहद अलग है। बक्‍सर में आज अनोखा लिट्टी-चोखा मेला लगा है। वस्‍तुत: इस मेले का नाम पंचकोशी मेला है, जिसका आज बक्‍सर में लिट्टी-चाेखा खाकर समापन होगा। मेले का आज पांचवां और आखिरी दिन है। मेले के आखिरी पड़ाव पर बक्‍सर में गंगा नदी में स्‍नान करने के बाद लोग लिट्टी-चाेखा बनाकर खाएंगे। लिट्टी-चोखा बनाने के लिए गोबर के उपले का इस्‍तेमाल होता है, जिसके धुएं से पूरे शहर का आसमान भर गया है। सुबह होने के साथ ही शहर के किला मैदान और चरित्रवन आदि इलाकों में लिट्टी-चोखा बनाने का क्रम शुरू हुआ, जो रात तक चलता रहेगा। वैसे तो आज इस शहर के लगभग हर घर में लिट्टी-चोखा बनाया और खाया जाएगा।

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भगवान राम से जुड़ी है कथा

पंचकोशी मेले की लोककथा भगवान राम से जुड़ी है। लोक मान्‍यता के अनुसार भगवान राम ने बक्‍सर और इर्द-गिर्द के चार गांवों में पांच दिनों तक घूमते हुए अलग-अलग व्‍यंजन खाए थे। बसांव मठ के महंत अच्‍युत प्रपन्‍नाचार्यजी ने बताया कि मुनि विश्‍वामित्र बक्‍सर में डेरा जमाए राक्षसों के संहार के लिए भगवान राम और उनके भाई लक्ष्‍मण को अयोध्‍या से अपने साथ लेकर बक्‍सर आए थे। बक्‍सर में ही ताड़का का वध हुआ था। उन्‍होंने बताया कि मेले में आए साधु-संतों को आज पंचकोशी परिक्रमा समिति की ओर से विदाई दी जाएगी।

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पांच दिनों में पांच तरह के व्‍यंजन

पंचकोशी मेले की शुरुआत बक्‍सर से सटे गांव अहिरौली में पुआ खाकर होती है। इसके बाद अगले दिन नदांव में खिचड़ी, भभुअर में चूड़ा-दही और नुआंव में सत्तू-मूली का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। कई श्रद्धालु तो इन पांच दिनों तक अपने घर नहीं लौटते। मेले के आखिरी दिन बक्‍सर के चरित्रवन में लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण कर लोग धन्‍य होते हैं।

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Haldiram Bhujiawala, Muzaffarpur - Restaurant

उपलों का कारोबार एक करोड़ तक जाने की उम्‍मीद

इस मेले में करीब एक करोड़ रुपए के उपलों का कारोबार होने की उम्‍मीद है। लिट्टी-चोखा तैयार करने के लिए लोग गोबर के उपलों का इस्‍तेमाल करते हैं। उपले बेचने वाले दुकानदार बताते हैं कि कोरोना काल से पहले 50 से 60 लाख रुपए तक उपले पंचकोशी मेले में बिक जाते थे। पिछले साल मेले में रौनक नहीं थी। इस बार भीड़ अच्छी दिख रही है, इसलिए कारोबार भी अधिक होने की उम्‍मीद है। इसके अलावा टमाटर, आलू, बैगन, मूली, हरी मिर्च, लहसून, प्‍याज और अदरक की खपत भी बढ़ गई है।

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In buxar devotees bath in ganga and makes prasad of litti chokha

हनुमान जी के ननिहाल में अंजनी सरोवर की श्रद्धालुओं ने की परिक्रमा

पंचकोसी परिक्रमा में शनिवार को श्रद्धालुओं ने भभुअर से चलकर उन्नाव स्थित उद्दालक आश्रम में सत्‍तू-मूली का प्रसाद ग्रहण किया। स्‍थानीय लोग इस गांव को हनुमान जी की ननिहाल मानते हैं। यहां अंजनी सरोवर में स्नान व पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। पौराणिक मान्यता के अनुसार पंचकोसी परिक्रमा के चौथे दिन भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण को सत्तू-मूली खिलाकर महर्षि उद्दालक ने उनकी आवभगत की थी। जिसके उपलक्ष्य में पंचकोसी के चौथे पड़ाव उन्नाव में सत्तू एवं मूली प्रसाद के रूप में खाया जाता है। इससे पहले भभुअर में रात्रि विश्राम के बाद सुबह श्रद्धालु एवं संत-महात्मा उन्नाव पहुंचे। यहां अंजनी सरोवर में स्नान कर हनुमानजी तथा माता अंजनी के मंदिर में जाकर उन्हें मत्था टेके। फिर, सत्तू-मूली का प्रसाद खाकर रात्रि विश्राम किए।

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अनूठी परंपरा है बक्सर की पंचकोस परिक्रमा, लिट्टी-चोखा का बनता है प्रसाद,  जुटते हैं हजारों लोग

पंचकोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष सह बसांव पीठाधीश्वर श्री अच्युत प्रपन्नाचार्यजी महाराज के सान्निध्य में बसांव मठ के संतों द्वारा सत्तू-मूली प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर वहां कथा-प्रवचन का आयोजन भी हुआ। जिसमें दामोदराचार्य जी, सुदर्शनाचार्य जी, छविनाथ त्रिपाठी, अहिरौली मठ के मधुसूदनाचार्य जी काली बाबा, आदि ने कथा के माध्यम से महर्षि उद्दालक एवं बाल हनुमान तथा माता अंजनी के जीवन चरित्र का वर्णन किया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सचिव डॉ. रामनाथ ओझा, सुरेश राय, सुबेदार पांडेय, टुनटुन वर्मा, रोहतास गोयल, आदि मठिया के अन्य परिकरों का सहयोग रहा।

अंजनी सरोवर के नाम से विख्यात है तालाब

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मान्यता के अनुसार नुआंव स्थित उद्दालक आश्रम के समीप राम भक्त हनुमान की माता अंजनी अपने पुत्र के साथ रहती थीं। जहां बचपन में हनुमानजी खेला करते थे। अंजनी के निवास के चलते ही यहां का मौजूद सरोवर अंजनी के नाम से विख्यात हो गया। उन गाथाओं को याद दिलाते हुए वहां एक मंदिर का निर्माण कराया गया है। जिसमें माता अंजनी के साथ हनुमान जी विराजमान हैं। इसकी चर्चा साकेतवासी पूज्य संत श्रीनारायणदास जी भक्तमाली उपाख्य मामाजी द्वारा रचित पुस्तक में भी की गई है। जिसका उल्लेख करते हुए पंचकोसी समिति के सचिव डॉ. रामनाथ ओझा ने बताया कि पौराणिक काल में यहां माता अंजनी निवास कर उक्त तालाब में स्नान करती थीं। जिससे यह तालाब अंजनी सरोवर के नाम से विख्यात हो गया।

hondwing in Muzaffarpur

लिट्टी-चोखा के मेला को एक दिन पूर्व किला मैदान पहुंचे श्रद्धालु

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पंचकोसी परिक्रमा के पांचवें दिन लिट्टी-चोखा के मेला को लेकर एक दिन पूर्व शनिवार से ही श्रद्धालु चरित्रवन पहुंचने लगे थे। पंचकोसी के अवसर पर लिट्टी-चोखा का प्रसाद बनाने व खाने के लिए एक दिन पूर्व ही दूर-दराज से लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी हो गया था। इस दौरान गाजीपुर, मोहनिया, कुदरा, कथुआ (पिरो), जगदीशपुर (आरा) आदि से उमड़े श्रद्धालुओं ने मां गंगा के पवित्र जल से आटा गूंथकर लिट्टी-चोखा बनाकर प्रसाद के रूप में भी ग्रहण किए। मौके पर मेनका देवी, शकुंतला देवी, शांता देवी, मीना देवी आदि ने कहा की शनिवार का दिन होने से आज भी बना लिए हैं, रविवार को भी बनाकर खाएंगे। जबकि, कुछ का कहना था की रविवार को भीड़ ज्यादा रहेगी इस कारण आज ही खाकर चले जाएंगे।

नुआंव की परिक्रमा भगाती है दरिद्रता

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पंचकोसी परिक्रमा के दौरान उन्नाव स्थित उद्दालक आश्रम की परिक्रमा व रात्रि विश्राम करने से श्रद्धालुओं की दरिद्रता समाप्त हो जाती है। पौराणिक गाथाओं का उल्लेख करते हुए कथा वाचकों ने कहा कि माता लक्ष्मी की बड़ी बहन का नाम दरिद्रा है। उसके दरिद्रता एवं निर्धनता के भय के चलते दरिद्रा से कोई विवाह करना नहीं चाहता था। परंतु भगवान विष्णु की इच्छा पर उनके परम भक्त महर्षि उद्दालक, माता लक्ष्मी की बड़ी बहन दरिद्रा से शादी करने पर राजी हो गए। समझने की बात यह है कि इससे पहले महर्षि ने अहंकार को श्री नारायण के चरणों में समर्पित कर दिया था। जिसके चलते उनके साथ दरिद्रा के रहने पर भी दरिद्रता फटक नहीं पाती थी और अंतत: दरिद्रा को उद्दालक ऋषि को छोड़कर भगवान के पास जाना पड़ गया।

संकट में उन्नाव मेला का अस्तित्व

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पंचकोसी परिक्रमा के चौथे विश्राम स्थल उन्नाव में आयोजित होने वाले मेला के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। समय रहते यदि प्रशासन सचेत नही हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब उन्नाव पंचकोसी मेला केवल यादों में सिमटकर रह जाएगा। इसका कारण अंजनी सरोवर का अतिक्रमण बताया जाता है। अतिक्रमण के चलते न केवल इस पौराणिक धरोहर का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है बल्कि, प्रति वर्ष होने वाला सरोवर का परिक्रमा भी संचालित नहीं हो सका। इस संबंध में पंचकोसी परिक्रमा समिति के सचिव डॉ. रामनाथ ओझा व सुरेश राय ने बताया कि रास्ते के अतिक्रमण के कारण मेलार्थी एवं संत समाज परिक्रमा की रस्मअदायगी नहीं कर सके। जबकि इस समस्या से प्रशासन को पूर्व में ही अवगत करा दिया गया था। अतिक्रमण का सिलसिला अगर इसी प्रकार जारी रहा तो वह दिन दूर नही जब पंचकोसी यात्रा मेला के चौथे पड़ाव का अस्तित्व ही मिट जाएगा।

panchkoshi mela buxar 2020 litti chokha mela in chartiravan bihar news :  कभी देखा है बिहारी व्यंजन लिट्टी-चोखा का मेला... ये तस्वीर और जानकारी आपको  हैरान न कर दे तो कहिएगा -

मेले को राष्‍ट्रीय स्‍तर पर दिलाई जानी चाहिए पहचान

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बक्‍सर के जाने-माने अधिवक्‍ता और समाजसेवी रामेश्‍वर प्रसाद वर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम से जुड़ा यह मेला बिहार की सांस्‍कृतिक पहचान और धार्मिक परंपरा को राष्‍ट्रीय स्‍तर पर पहचान बना सकता है। उन्‍होंने कहा कि स्‍थानीय सामाजिक संगठनों के साथ ही प्रशासन और सरकार को भी इसके लिए पहल करनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र मिश्र ने कहा कि प्रशासन चाहे तो इस मेले की बदौलत बक्‍सर का नाम विश्‍व रिकार्ड की सूची में दर्ज हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि एक साथ ऐसा आयोजन शायद ही कही होता हो, जहां लाखों लोग केवल लिट्टी-चोखा ही खाते हैं। अधिवक्‍ता विनय सिन्‍हा ने कहा कि‍ मेले में हिस्‍सा लेने के लिए अगल-बगल के कई जिलों के लोग आते हैं। दूसरी तरफ, शहर के लोग मेले में जाएं न जाएं, अपने घर में ही सही, इस दिन लिट्टी-चोखा ही खाते हैं। बक्‍सर से सटे गांवों में भी लोग आज के दिन लिट्टी-चोखा जरूर बनाते और खाते हैं। यहां तक कि दूसरे जिलों, प्रदेशों, यहां तक कि विदेश में रहने वाले बक्‍सर के लोग भी आज के दिन लिट्टी-चोखा खाना नहीं भूलते हैं।

Source : Dainik Jagran

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जहरीली शराब से हुई मौतों पर CM नीतीश पर बरसे चिराग, कहा- शराबबंदी सरकार की विफलता

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बिहार के नालंदा जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों (Alcohol Death) को लेकर राजनीति गर्मा गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के गृह जिले में शराब से ग्यारह लोगों की मौत (Nalanda Hooch Tragedy) पर तमाम विपक्षी पार्टियां उन पर हमलावर हैं. यहां तक की जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) की सहयोगी बीजेपी ने भी उस पर सवाल खड़े किए हैं. इस मुद्दे पर अब लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के सांसद चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा है.

रविवार को दिल्ली से पटना पहुंचे चिराग पासवान ने कहा कि नालंदा उनका (नीतीश कुमार) गृह जिला है, और वहां पर जहरीली शराब से मौत होती है. यह नीतीश सरकार के शराबबंदी की विफलता है. सरकार जब तक इसे समझेगी नहीं, तब तक इसको आप खत्म नहीं कर सकते. नीतीश सरकार को पीड़ितों के घर जाना चाहिए और उनसे मुलाकात करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जहरीली शराब जिलों में ही नहीं, अब प्रखंड और पंचायतों में बन रही है. नीतीश सरकार इस पर अधिकारी स्तर पर कड़ी कार्रवाई करे ताकि जहरीली शराब का कारोबार बंद हो सके. इस काले कारोबार में शामिल जो बड़े लोग हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए.

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एलजेपी सांसद ने कहा कि सरकार की सहयोगी पार्टियां भी इसका (शराबबंदी कानून) विरोध कर रही हैं. नीतीश कुमार को सोचने की जरूरत है कि शराबबंदी कानून में किस तरह की खामी है. चिराग ने कहा कि शराबबंदी का समर्थन उनकी पार्टी भी करती है. लेकिन इसकी आड़ में चल रहे गोरखधंधे का हम विरोध करते हैं.

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‘विधान पार्षद चुनाव अकेले लड़ेगी लोक जनशक्ति पार्टी’

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वहीं, विधान पार्षद चुनाव पर चिराग पासवान ने कहा कि हमने पहले ही फैसला किया है कि हमारी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी. इस संबंध में रविवार की शाम को बैठक की जाएगी और प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा होगी. इसके बाद नामों की घोषणा कर दी जाएगी.

Source : News18

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ट्रक चालक के प्यार में घर छोड़कर युवती छत्तीसगढ़ से पहुंच गई बिहार, पश्चिम में अनोखा मामला

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छत्तीसगढ़ की एक युवती प्यार में दीवानगी की सारी हदें पार कर दी। छत्तीसगढ़ में बस्तर जिला के बोधघाट से भागकर आई लड़की लौरिया थाना क्षेत्र के ठाकुर टोला गांव में मिली। छत्तीसगढ़ से आई पुलिस ने लौरिया पुलिस के सहयोग से ठाकुर टोला गांव निवासी धर्मेन्द्र ठाकुर के घर छापेमारी की। जहां से लड़की मिली और आरोपित मंजय ठाकुर को गिरफ्तार किया गया। छत्तीसगढ़ के बोधघाट के दारोगा प्रेम कुमार ने बताया कि छतीसगढ़ के परमा नाका नीम गांव निवासी लड़की के पति ने अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई है।

बता दें कि अगवा लड़की के पिता की छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में सब्जी की दुकान हैं । लड़की भी दुकान चलाती थी। आरोपित मंजय ठाकुर ट्रक चालक है। वह छतीसगढ में ट्रक चलाता था। इस दौरान सब्जी खरीदने के लिए उसकी दुकान पर आता था। दोनों की नजदीकियां बढ़ी और लड़की को लेकर भाग आया। जहां दोनों एक दूसरे के करीब आ गए और भाग कर शादी कर ली। कुछ दिनों पूर्व छतीसगढ की पुलिस लौरिया के ठाकुर टोला गांव से प्रिया कुशवाहा को लेकर गई। लेकिन कुछ दिनों के बाद फिर दोनों छतीसगढ से भागकर ठाकुर टोला गांव चले आए थे। आरोपित के स्वजनों का कहना है कि दोनों ने शादी कर ली है।

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Source : Dainik Jagran

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दरभंगा-रोसड़ा एनएच के निर्माण को केंद्र की मंजूरी

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नेशनल हाईवे 527 ई दरभंगा-रोसड़ा सड़क बनने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने इसे बनाने की मंजूरी दे दी है। जल्द इस सड़क को बनाने के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। सड़क की कुल लंबाई 39.5 किलोमीटर होगी। सूबे के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने बताया कि केंद्र सरकार ने दरभंगा-रोसड़ा सड़क बनाने बनाने में 495 करोड़ खर्च आएगा। सड़क बनाने के लिए जल्द निविदा जारी की जाएगी। एनएच 527ई नवघोषित राष्ट्रीय उच्च पथ है, जो दरभंगा के रामनगर से प्रारम्भ होकर समस्तीपुर जिला होते हुए रोसड़ा तक जाएगी। इस पथ का निर्माण पेव्ड सोल्डर के साथ दो लेन में होना है। निर्माण वर्ष 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य है। निर्माण के बाद इस सड़क को अगले 10 वर्षों तक अर्थात वर्ष 2034 तक मेंटेनेंस अवधि में ही रखा जाएगा।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार हमेशा बिहार के विकास के लिए तत्पर रहती है। उन्होंने राज्य में आधारभूत संरचनाओं के विकास में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से प्राप्त हो रहे समर्थन हेतु आभार व्यक्त किया।

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ये होंगे फायदे

● यह पथ रोसड़ा को आमस-दरभंगा पथ से जोड़ेगा।

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● दरभंगा से रोसड़ा जाना सुगम होगा।

● उत्तर बिहार व दक्षिण बिहार में आवागमन और आसान होगा।

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Source : Hindustan

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