अब जिले में डीएल (ड्राइविंग लाइसेंस) के लिए ड्राइविंग टेस्ट एमवीआई के बदले कंप्यूटर लेगा। इसके लिए लाइसेंस लेने वालों को विशेष रूप से डिजाइन किए गए ट्रैक पर सेंसर और हाई-डेफिनिशन क्लोज सर्किट कैमरों के माध्यम से ड्राइविंग टेस्ट से गुजरना होगा। साल के अंत तक जिले में कंप्यूटराइज ड्राइविंग टेस्ट सेंटर बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है।

इसके निर्माण की जिम्मेवारी भवन निर्माण विभाग को दी गई है। अब तक ड्राइविंग लाइसेंसके आवेदक पुलिस लाइन मैदान में मैनुअल ड्राइविंग टेस्ट से गुजरते हैं, जहां एमवीआई मैन्युअल रूप से टेस्ट लेकर पास करते हैं। जिला परिवहन अधिकारी लाल ज्योति नाथ शाहदेव ने बताया कि कंप्यूटराइज ड्राइविंग टेस्ट सेंटर स्थापित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआईआरटी) ने इसे डिजाइन किया है। दोपहिया और चारपहिया वाहन के लिए कुछ अलग-अलग अनिवार्य मानदंड होंगे, जिन्हें आवेदकों को पूरा करना होगा। उसके बाद ही उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाएगा। टेस्ट में फेल होने वालों को एक सप्ताह बाद फिर मौका दिया जाएगा। चारपहिया वाहनों के डीएल के लिए आवेदकों को 6 चरणों के टेस्ट से गुजरना होगा। वहीं, दोपहिया वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदक को टेस्ट के तीन चरणों से गुजरना होगा।
एक दिन में कम से कम 300 आवेदकों का लिया जा सकेगा ड्राइविंग टेस्ट
कंप्यूटराइज ड्राइविंग टेस्ट सेंटर खुल जाने के बाद लोगों को अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सॉफ्टवेयर के माध्यम से उन्हें टेस्ट के लिए नियत समय और तिथि की जानकारी एसएमएस से दी जाएगी। उस तिथि पर आकर अपना टेस्ट दे सकेंगे। यहां एक दिन में कम से कम 300 आवेदकों का ड्राइविंग टेस्ट लिया जा सकेगा। जबकि अभी मैन्युअल रूप से महज 100 लोगों का ही बुधवार व शुक्रवार को टेस्ट लिया जाता है। वहीं, मैनुअल व्यवस्था में रिश्वतखोरी की शिकायत खत्म हो जाएगी और समय भी कम लगेगा।
Source : Dainik Bhaskar




