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शहाबुद्दीन की बेटी की शादी में शाहरूख खान औऱ संजय दत्त को न्योता, सिवान में शाही तरीके से निकाह की तैयारी

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सिवानः 15 नवंबर को सिवान के पूर्व सांसद और दिवंगत शहाबुद्दीन की बड़ी बेटी हेरा शहाब की शादी होने वाली है. इसकी तैयारी जोरशोर से चल रही है. अतिथियों के लिए लगभग पांच एकड़ में व्यवस्था की जा रही है. पिछले 10 दिनों से लगातार काम चल रहा है. शादी की पूरी तैयारियां शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा की देखरेख में हो रही है. इसमें देश और दुनिया के कई बड़े-बड़े चेहरों को न्योता भेजा गया है. 15 नवंबर को दोपहर 12 बजे से कार्यक्रम शुरू हो जाएगा.

एक तरह का होगा सबके लिए खाना

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15 नवंबर को शहाबुद्दीन की बड़ी बेटी हेरा शहाब की बारात उनके पैतृक गांव प्रतापपुर में आने वाली है. शहाबुद्दीन के भांजे मो. नदीम ने बताया कि वीआईपी हो या आम, सभी अतिथियों के लिए एक समान खाने पीने की व्यवस्था हो रही है. शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन की अलग-अलग व्यवस्था की गई है. 15 नवंबर को दोपहर 12 बजे से खाना खिलाया जाएगा. भोजन बनाने के लिए बिहार के साथ-साथ बंगाल और यूपी से कारीगर बुलाए गए हैं.

Haldiram Bhujiawala, Muzaffarpur - Restaurant

संजय दत को भी भेजा गया न्योता

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बता दें हाल ही में परिणय सूत्र में बंधे ओसामा का ओलिमा (रिसेप्शन) भी इसी दिन होगा. इसलिए सिवान के प्रतापपुर स्थित शहाबुद्दीन के पैतृक घर को शाही अंदाज में सजाया जा रहा है. वहीं ओसामा ने खुद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह, अबु आजमी, बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, संजय दत्त सहित अन्य कई वीआईपी को आमंत्रित किया है. इसके लिए पटना व गोरखपुर एयरपोर्ट पर अतिथियों के लिए गाड़ियों को व्यवस्था रहेगी जिन्हें सीधे प्रतापपुर लाया जा सके. वहीं अतिथियों के ठहरने के लिए सिवान के लगभग सभी होटल को बुक किया गया है.

शहाबुद्दीन के वकील बेटे ओसामा का डॉक्टर दुल्हन से हुआ निकाह, बेटी-दामाद भी है डॉक्टर

मोतिहारी के मो. शादमान बनेंगे शहाबुदीन के दामाद

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शहाबुद्दीन की बेटी हेरा शहाब की शादी मोतिहारी के प्रतिष्ठित और चर्चित किसान सैयद इफ्तिखार खान के बेटे मो. शादमान के साथ हो रही है. दोनों ने एमबीबीएस की पढ़ाई की है. दोनों की शादी के दिन ही ओसामा का भी रिसेप्शन होगा.

Source : ABP News

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बिहार के हर मंदिर को देना होगा चार प्रतिशत टैक्‍स, सार्वजनिक देवस्‍थलों के निबंधन के लिए चलेगा अभियान

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बिहार के सभी मंदिरों को अब टैक्‍स देना होगा। राज्‍य के सार्वजनिक मंदिरों के निबंधन के लिए बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड व्यापक अभियान चला रहा है। एक दिसंबर से इसे तेज किया जाएगा। इसमें बोर्ड के अलावा आम लोग भी हिस्सा ले सकते हैं। आपके आसपास कोई सार्वजनिक मंदिर है तो उसके बारे में बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर या डाक के माध्यम से सूचना दे सकते हैं। मंदिरों के निबंधन के लिए सूचना के साथ संबंधित कागजात भी मुहैया कराना होगा। धार्मिक न्यास बोर्ड उक्त कागजातों की जांच कर उसका निबंधन करेगा।

Haldiram Bhujiawala, Muzaffarpur - Restaurant

4,600 मंदिरों का अब तक है निबंधन

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बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष एके जैन का कहना है कि बोर्ड की ओर से कुल 4,600 मंदिरों का निबंधन हुआ है। अभी भी राज्य के कई प्रमुख मंदिर हैं, जिनका निबंधन नहीं है। कुछ बड़े मंदिर निबंधन के बावजूद नियमित बोर्ड को टैक्स नहीं दे रहे हैं। पूर्व में निबंधित मंदिरों की जमीन के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए जिलाधिकारियों को विधि मंत्रालय की ओर से पत्र लिखा गया है। अब तक मात्र भोजपुर के लिए जिलाधिकारी ने कुछ मंदिरों की जमीन के बारे में जानकारी मुहैया कराई है। अन्य जिलों के डीएम को भी निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द मंदिरों की जमीन के बारे में जानकारी मुहैया कराएं।

hondwing in Muzaffarpur

सार्वजनिक एवं निजी मंदिरों में है अंतर

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धार्मिक न्यास बोर्ड के नियमों के अनुसार, अगर कोई मंदिर किसी व्यक्ति के घर की चारदीवारी के अंदर स्थित है और उसमें उसी घर या परिवार के लोग पूजा करते हैं तो उसको निजी या व्यक्तिगत माना जाएगा। कोई मंदिर किसी घर या मकान के चारदीवारी के बाहर है और उसमें एक से अधिक परिवार की पूजा करते हैं और चढ़ावा देते हैं तो उसे सार्वजनिक माना जाएगा। प्रत्येक सार्वजनिक मंदिर को धार्मिक न्यास बोर्ड में पंजीयन कराना होगा। पंजीयन के उपरांत बोर्ड को कुल आय का चार प्रतिशत टैक्स देना होता है।

Source : Dainik Jagran

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लिट्टी-चोखा का वर्ल्‍ड रिकार्ड! बिहार का ये पूरा शहर आज खाएगा केवल एक ही चीज

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बिहार का बक्‍सर शहर आज अनोखा रिकार्ड बना रहा है। शहर के प्राय: हर घर में आज अपने राज्‍य का मशहूर व्‍यंजन लिट्टी-चोखा जरूर बनेगा। शहर में लिट्टी-चोखा बनाने और खाने का क्रम रविवार की अल सुबह पौ फटने के साथ ही शुरू हो गया है, जो देर रात तक चलेगा। दरअसल, बक्‍सर में पिछले पांच दिनों से चल रहे पंचकोसी मेले का आज आखिरी दिन है। इस दिन लोग बक्‍सर शहर के चरित्रवन में लिट्टी-चोखा खाते हैं। कुछ लोगों के लिए यह पिकनिक है तो कई लोग इसे एक देसी अंदाज वाला एक फूड फेस्टिवल मानते हैं। लोक कथाओं के अनुसार इस मेले का अतीत भगवान श्रीराम से जुड़ा है। पंचकोसी मेले का असल अंदाज भी धार्मिक ही है। इसके जरिए बिहार की सांस्‍कृतिक पहचान और खाने की देसी डिशेज की ब्रांडिंग भी होती है। हालांकि, इतने बड़े आयोजन को बड़ी पहचान दिलाने के लिए सरकार और प्रशासन के स्‍तर से कोई प्रयास नहीं हाेने पर स्‍थानीय लोगों में अफसोस भी है।

बक्‍सर के पंचकोशी मेले का आज आखिरी दिन। जागरण

दिल्‍ली से कोलकाता के लिए रेल के रास्‍ते चलने पर पटना से पहले बिहार का पहला बड़ा शहर बक्‍सर पड़ता है। आज बक्‍सर का नजारा बेहद अलग है। बक्‍सर में आज अनोखा लिट्टी-चोखा मेला लगा है। वस्‍तुत: इस मेले का नाम पंचकोशी मेला है, जिसका आज बक्‍सर में लिट्टी-चाेखा खाकर समापन होगा। मेले का आज पांचवां और आखिरी दिन है। मेले के आखिरी पड़ाव पर बक्‍सर में गंगा नदी में स्‍नान करने के बाद लोग लिट्टी-चाेखा बनाकर खाएंगे। लिट्टी-चोखा बनाने के लिए गोबर के उपले का इस्‍तेमाल होता है, जिसके धुएं से पूरे शहर का आसमान भर गया है। सुबह होने के साथ ही शहर के किला मैदान और चरित्रवन आदि इलाकों में लिट्टी-चोखा बनाने का क्रम शुरू हुआ, जो रात तक चलता रहेगा। वैसे तो आज इस शहर के लगभग हर घर में लिट्टी-चोखा बनाया और खाया जाएगा।

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भगवान राम से जुड़ी है कथा

पंचकोशी मेले की लोककथा भगवान राम से जुड़ी है। लोक मान्‍यता के अनुसार भगवान राम ने बक्‍सर और इर्द-गिर्द के चार गांवों में पांच दिनों तक घूमते हुए अलग-अलग व्‍यंजन खाए थे। बसांव मठ के महंत अच्‍युत प्रपन्‍नाचार्यजी ने बताया कि मुनि विश्‍वामित्र बक्‍सर में डेरा जमाए राक्षसों के संहार के लिए भगवान राम और उनके भाई लक्ष्‍मण को अयोध्‍या से अपने साथ लेकर बक्‍सर आए थे। बक्‍सर में ही ताड़का का वध हुआ था। उन्‍होंने बताया कि मेले में आए साधु-संतों को आज पंचकोशी परिक्रमा समिति की ओर से विदाई दी जाएगी।

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पांच दिनों में पांच तरह के व्‍यंजन

पंचकोशी मेले की शुरुआत बक्‍सर से सटे गांव अहिरौली में पुआ खाकर होती है। इसके बाद अगले दिन नदांव में खिचड़ी, भभुअर में चूड़ा-दही और नुआंव में सत्तू-मूली का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। कई श्रद्धालु तो इन पांच दिनों तक अपने घर नहीं लौटते। मेले के आखिरी दिन बक्‍सर के चरित्रवन में लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण कर लोग धन्‍य होते हैं।

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Haldiram Bhujiawala, Muzaffarpur - Restaurant

उपलों का कारोबार एक करोड़ तक जाने की उम्‍मीद

इस मेले में करीब एक करोड़ रुपए के उपलों का कारोबार होने की उम्‍मीद है। लिट्टी-चोखा तैयार करने के लिए लोग गोबर के उपलों का इस्‍तेमाल करते हैं। उपले बेचने वाले दुकानदार बताते हैं कि कोरोना काल से पहले 50 से 60 लाख रुपए तक उपले पंचकोशी मेले में बिक जाते थे। पिछले साल मेले में रौनक नहीं थी। इस बार भीड़ अच्छी दिख रही है, इसलिए कारोबार भी अधिक होने की उम्‍मीद है। इसके अलावा टमाटर, आलू, बैगन, मूली, हरी मिर्च, लहसून, प्‍याज और अदरक की खपत भी बढ़ गई है।

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In buxar devotees bath in ganga and makes prasad of litti chokha

हनुमान जी के ननिहाल में अंजनी सरोवर की श्रद्धालुओं ने की परिक्रमा

पंचकोसी परिक्रमा में शनिवार को श्रद्धालुओं ने भभुअर से चलकर उन्नाव स्थित उद्दालक आश्रम में सत्‍तू-मूली का प्रसाद ग्रहण किया। स्‍थानीय लोग इस गांव को हनुमान जी की ननिहाल मानते हैं। यहां अंजनी सरोवर में स्नान व पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। पौराणिक मान्यता के अनुसार पंचकोसी परिक्रमा के चौथे दिन भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण को सत्तू-मूली खिलाकर महर्षि उद्दालक ने उनकी आवभगत की थी। जिसके उपलक्ष्य में पंचकोसी के चौथे पड़ाव उन्नाव में सत्तू एवं मूली प्रसाद के रूप में खाया जाता है। इससे पहले भभुअर में रात्रि विश्राम के बाद सुबह श्रद्धालु एवं संत-महात्मा उन्नाव पहुंचे। यहां अंजनी सरोवर में स्नान कर हनुमानजी तथा माता अंजनी के मंदिर में जाकर उन्हें मत्था टेके। फिर, सत्तू-मूली का प्रसाद खाकर रात्रि विश्राम किए।

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अनूठी परंपरा है बक्सर की पंचकोस परिक्रमा, लिट्टी-चोखा का बनता है प्रसाद,  जुटते हैं हजारों लोग

पंचकोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष सह बसांव पीठाधीश्वर श्री अच्युत प्रपन्नाचार्यजी महाराज के सान्निध्य में बसांव मठ के संतों द्वारा सत्तू-मूली प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर वहां कथा-प्रवचन का आयोजन भी हुआ। जिसमें दामोदराचार्य जी, सुदर्शनाचार्य जी, छविनाथ त्रिपाठी, अहिरौली मठ के मधुसूदनाचार्य जी काली बाबा, आदि ने कथा के माध्यम से महर्षि उद्दालक एवं बाल हनुमान तथा माता अंजनी के जीवन चरित्र का वर्णन किया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सचिव डॉ. रामनाथ ओझा, सुरेश राय, सुबेदार पांडेय, टुनटुन वर्मा, रोहतास गोयल, आदि मठिया के अन्य परिकरों का सहयोग रहा।

अंजनी सरोवर के नाम से विख्यात है तालाब

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मान्यता के अनुसार नुआंव स्थित उद्दालक आश्रम के समीप राम भक्त हनुमान की माता अंजनी अपने पुत्र के साथ रहती थीं। जहां बचपन में हनुमानजी खेला करते थे। अंजनी के निवास के चलते ही यहां का मौजूद सरोवर अंजनी के नाम से विख्यात हो गया। उन गाथाओं को याद दिलाते हुए वहां एक मंदिर का निर्माण कराया गया है। जिसमें माता अंजनी के साथ हनुमान जी विराजमान हैं। इसकी चर्चा साकेतवासी पूज्य संत श्रीनारायणदास जी भक्तमाली उपाख्य मामाजी द्वारा रचित पुस्तक में भी की गई है। जिसका उल्लेख करते हुए पंचकोसी समिति के सचिव डॉ. रामनाथ ओझा ने बताया कि पौराणिक काल में यहां माता अंजनी निवास कर उक्त तालाब में स्नान करती थीं। जिससे यह तालाब अंजनी सरोवर के नाम से विख्यात हो गया।

hondwing in Muzaffarpur

लिट्टी-चोखा के मेला को एक दिन पूर्व किला मैदान पहुंचे श्रद्धालु

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पंचकोसी परिक्रमा के पांचवें दिन लिट्टी-चोखा के मेला को लेकर एक दिन पूर्व शनिवार से ही श्रद्धालु चरित्रवन पहुंचने लगे थे। पंचकोसी के अवसर पर लिट्टी-चोखा का प्रसाद बनाने व खाने के लिए एक दिन पूर्व ही दूर-दराज से लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी हो गया था। इस दौरान गाजीपुर, मोहनिया, कुदरा, कथुआ (पिरो), जगदीशपुर (आरा) आदि से उमड़े श्रद्धालुओं ने मां गंगा के पवित्र जल से आटा गूंथकर लिट्टी-चोखा बनाकर प्रसाद के रूप में भी ग्रहण किए। मौके पर मेनका देवी, शकुंतला देवी, शांता देवी, मीना देवी आदि ने कहा की शनिवार का दिन होने से आज भी बना लिए हैं, रविवार को भी बनाकर खाएंगे। जबकि, कुछ का कहना था की रविवार को भीड़ ज्यादा रहेगी इस कारण आज ही खाकर चले जाएंगे।

नुआंव की परिक्रमा भगाती है दरिद्रता

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पंचकोसी परिक्रमा के दौरान उन्नाव स्थित उद्दालक आश्रम की परिक्रमा व रात्रि विश्राम करने से श्रद्धालुओं की दरिद्रता समाप्त हो जाती है। पौराणिक गाथाओं का उल्लेख करते हुए कथा वाचकों ने कहा कि माता लक्ष्मी की बड़ी बहन का नाम दरिद्रा है। उसके दरिद्रता एवं निर्धनता के भय के चलते दरिद्रा से कोई विवाह करना नहीं चाहता था। परंतु भगवान विष्णु की इच्छा पर उनके परम भक्त महर्षि उद्दालक, माता लक्ष्मी की बड़ी बहन दरिद्रा से शादी करने पर राजी हो गए। समझने की बात यह है कि इससे पहले महर्षि ने अहंकार को श्री नारायण के चरणों में समर्पित कर दिया था। जिसके चलते उनके साथ दरिद्रा के रहने पर भी दरिद्रता फटक नहीं पाती थी और अंतत: दरिद्रा को उद्दालक ऋषि को छोड़कर भगवान के पास जाना पड़ गया।

संकट में उन्नाव मेला का अस्तित्व

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पंचकोसी परिक्रमा के चौथे विश्राम स्थल उन्नाव में आयोजित होने वाले मेला के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। समय रहते यदि प्रशासन सचेत नही हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब उन्नाव पंचकोसी मेला केवल यादों में सिमटकर रह जाएगा। इसका कारण अंजनी सरोवर का अतिक्रमण बताया जाता है। अतिक्रमण के चलते न केवल इस पौराणिक धरोहर का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है बल्कि, प्रति वर्ष होने वाला सरोवर का परिक्रमा भी संचालित नहीं हो सका। इस संबंध में पंचकोसी परिक्रमा समिति के सचिव डॉ. रामनाथ ओझा व सुरेश राय ने बताया कि रास्ते के अतिक्रमण के कारण मेलार्थी एवं संत समाज परिक्रमा की रस्मअदायगी नहीं कर सके। जबकि इस समस्या से प्रशासन को पूर्व में ही अवगत करा दिया गया था। अतिक्रमण का सिलसिला अगर इसी प्रकार जारी रहा तो वह दिन दूर नही जब पंचकोसी यात्रा मेला के चौथे पड़ाव का अस्तित्व ही मिट जाएगा।

panchkoshi mela buxar 2020 litti chokha mela in chartiravan bihar news :  कभी देखा है बिहारी व्यंजन लिट्टी-चोखा का मेला... ये तस्वीर और जानकारी आपको  हैरान न कर दे तो कहिएगा -

मेले को राष्‍ट्रीय स्‍तर पर दिलाई जानी चाहिए पहचान

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बक्‍सर के जाने-माने अधिवक्‍ता और समाजसेवी रामेश्‍वर प्रसाद वर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम से जुड़ा यह मेला बिहार की सांस्‍कृतिक पहचान और धार्मिक परंपरा को राष्‍ट्रीय स्‍तर पर पहचान बना सकता है। उन्‍होंने कहा कि स्‍थानीय सामाजिक संगठनों के साथ ही प्रशासन और सरकार को भी इसके लिए पहल करनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र मिश्र ने कहा कि प्रशासन चाहे तो इस मेले की बदौलत बक्‍सर का नाम विश्‍व रिकार्ड की सूची में दर्ज हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि एक साथ ऐसा आयोजन शायद ही कही होता हो, जहां लाखों लोग केवल लिट्टी-चोखा ही खाते हैं। अधिवक्‍ता विनय सिन्‍हा ने कहा कि‍ मेले में हिस्‍सा लेने के लिए अगल-बगल के कई जिलों के लोग आते हैं। दूसरी तरफ, शहर के लोग मेले में जाएं न जाएं, अपने घर में ही सही, इस दिन लिट्टी-चोखा ही खाते हैं। बक्‍सर से सटे गांवों में भी लोग आज के दिन लिट्टी-चोखा जरूर बनाते और खाते हैं। यहां तक कि दूसरे जिलों, प्रदेशों, यहां तक कि विदेश में रहने वाले बक्‍सर के लोग भी आज के दिन लिट्टी-चोखा खाना नहीं भूलते हैं।

Source : Dainik Jagran

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पीएमसीएच से भागा अपराधी, पटना से मुजफ्फरपुर तक पुलिस का छूटा पसीना; संगीन मामलों में है आरोपित

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पटनाः बिहार पुलिस अपने अजब-गजब कारनामे के लिए अक्सर सुर्खियों में रहती है. ताजा मामला राजधानी पटना के पीएमसीएच (PMCH) से जुड़ा है जहां पुलिस की लापरवाही की वजह से एक कैदी को फरार होने का मौका मिल गया. कैदी की पहचान मुजफ्फरपुर निवासी राजकुमार राय के रूप में हुई है. फरार कैदी पिछले पांच महीने से आर्म्स एक्ट और रंगदारी के आरोप में मुजफ्फरपुर जेल में बंद था. शनिवार को पीएमसीएच में जैसे ही उसे मौका मिला वह फरार हो गया. वहीं दूसरे कैदी का अभी इलाज हो रहा है.

Haldiram Bhujiawala, Muzaffarpur - Restaurant

शनिवार को मुजफ्फरपुर जेल से दो कैदियों को पीएमसीएच रेफर किया गया था. दोनों कैदियों के साथ दो सुरक्षाकर्मियों को भी भेजा गया था. पीएमसीएच पहुंचे दोनों पुलिसकर्मियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि शनिवार दोपहर एक बजे वे दोनों कैदियों को लेकर ओपीडी आए, लेकिन उस समय ओपीडी बंद थी. किसी तरह दोनों कैदियों को डॉक्टर से दिखाया. एक कैदी के सीने में दर्द था जिसे इंदिरा गांधी हार्ट वार्ड में एडमिट किया गया. फरार होने वाले कैदी राजकुमार राय को डॉक्टर ने एडमिट नहीं किया. चिकित्सक का कहना था कि उसे इलाज की जरूरत नहीं है. इसके बाद विश्वास पर उस कैदी को नीचे छोड़कर दोनों पुलिसकर्मी दूसरे कैदी को वार्ड में छोड़ने आ गए तबतक वह फरार हो गया.

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जल्द पकड़ा जाएगा कैदी

कैदियों के साथ आए पुलिस ने बताया कि फरार होने वाले कैदी ने कहा था कि उसका हाथ पहले जिस जगह टूटा था उसी जगह में दर्द है. अगर बड़े डॉक्टर को नहीं दिखाया गया तो कैंसर होने का डर है. सुरक्षा में आए पुलिस जवानों का कहना था कि जल्द ही फरार कैदी पकड़ लिया जाएगा.

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बता दें कि पीएमसीएच से पहले भी कैदियों के फरार होने का मामला सामने आता रहा है. वहीं दूसरी ओर मुजफ्फरपुर जेल प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं. जब राजकुमार को कोई बीमारी नहीं थी तो जेलर या मुजफ्फरपुर जेल प्रशासन ने कैसे बिना जांच के उसे पीएमसीएच भेज दिया?

Source : ABP News

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