पटना. पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी के ब्राह्मणों पर दिए आपत्तिजनक बयान से बिहार की सियासत गर्मा गई है. तमाम राजनीतिक पार्टियों ने इसे लेकर मांझी पर हमला बोला है और उन्हें नसीहत दी है कि वो भविष्य से कभी इस तरह के बयान न दें. लेकिन बिहार बीजेपी के उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक मिथिलेश तिवारी ने इससे हट कर 11 बिंदुओं को सिलसिलेवार लिख कर जीतन राम मांझी को यह बताने का प्रयास किया है कि ब्राह्मणों का समाज को एक साथ जोड़े रखने में बड़ा योगदान है.

मिथिलेश तिवारी ने कहा कि एक यज्ञ में ब्राह्मण इतने समाज के लोगों को एक साथ जोड़ता है यह बात शायद जीतन राम मांझी नहीं जानते हैं.
1. डाला के लिए डोम
2. मानर पुजाई के लिए चमईन
3. मिट्टी का बर्तन के लिए कुम्हार
4. लकड़ी की आसनी के लिए लोहार
5. नौ ग्रह की लकड़ी एवं मुंडन के लिए हजाम
6. गाय का दूध, दही, घी, मूत्र, गोबर के लिए यादव
7. फूल के लिए माली
8. कपड़ा सिलाई के लिए दर्ज़ी
9. पूजा-पाठ में फल के लिए कुशवाहा
10. मिठाई एवं चूल्हा पुजाई के लिए हलवाई
11. पान और तामबुल के लिए पनहेरी की आवश्यकता होती है

वहीं, बीजेपी के विधायक नीतीश मिश्रा ने भी जीतन राम मांझी के बयान को गलत बताते हुए कहा कि हिंदू धर्म और ब्राह्मणों के प्रति की गई उनकी टिप्पणी से जनमानस आहत है. इस तरह का बयान समाज के सौहार्द को बिगाड़ने का काम करता है. हम सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि समाज को जोड़कर एक साथ रखें न कि उसमें वैमस्यता पैदा करें.
भरी सभा में ब्राह्मणों के लिए किया था आपत्तिजनक शब्दावली का प्रयोग
बता दें कि शनिवार की शाम पटना में एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए जीतन राम मांझी ने ब्राह्मणों और देवी-देवताओं के लिए बेहद अपमानजनक शब्द का प्रयोग किया था. मांझी ने कहा कि लोग आज कल सत्यनारायण भगवान की पूजा करवा रहे हैं, ओर पंडित **** (गाली) आते हैं तो बोलते हैं हम खायेंगे नहीं, नगद (पैसा) दीजिये. मांझी यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि पहले गरीबों के बीच याह पूजा देखने को नहीं मिलती थी. लेकिन आज कल खूब हो रही है. बाबा भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम दौर में बाबा साहब ने हिंदू धर्म को खराब बताया था. उनका निधन बौद्ध होकर हुआ था. जीतन राम मांझी के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है.

हालांकि बयान पर बवाल बढ़ने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने रविवार को ट्वीट कर इस पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को लेकर उनके वीडियो के उस पार्ट को ही केवल वायरल किया जा रहा है जिससे विवाद खड़ा हो सके. मांझी ने कहा कि बयान को समझने के लिए उसे पूरा सुनने की जरूरत है. उनके दिल में हर तबके के लिए सम्मान और इज्जत है. उन्होंने कहा कि उन्होंने ब्राह्मणों को नहीं, बल्कि अपने समाज के लोगों के लिए अपशब्द (गाली) यूज किया था. अगर नहीं हो तो मैं माफी मांगने को तैयार हूं.
Source : News18
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