पटना मेट्रो के कोरिडोर-एक और कोरिडोर-दो के साथ आइएसबीटी डिपो के ओवरहेड उपकरणों को लगाने (ओएचई सिस्टम) का काम करीब तीन साल में पूरा होने की उम्मीद है। इस काम में करीब 144.65 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। पटना मेट्रो की निर्माण कंपनी दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने इसके लिए निविदा आमंत्रित की है। 25 केवी के ओवरहेड सिस्टम से जुड़े उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना, टेस्ट और चालू करने के सामूहिक कार्य के लिए करीब 36 माह का समय दिया गया है। वहीं पटना मेट्रो के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नौ अगस्त तक ई-टेंडर वेबसाइट से अपलोड किया जा सकता है।

जानें कुछ जरूरी बातें

  • 144.65 करोड़ की राशि ओएचई सिस्टम पर खर्च होने का अनुमान
  • 17.933 किमी लंबा है कारिडोर-1, दानापुर से मीठापुर तक
  • 14.554 किमी लंबा है कारिडोर-2, पटना जंक्शन से आइएसबीटी
  • 13,365 करोड़ की लागत है पटना मेट्रो के दोनों कारिडोर की

    तीन सितंबर को खुलेगा टेंडर

टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नौ अगस्त तक ई-टेंडर वेबसाइट से अपलोड किया जा सकता है। टेंडर जमा करने की अवधि 26 अगस्त से दो सितंबर के बीच होगी। तीन सितंबर को टेंडर खोला जाएगा।

मलाही पकड़ी से आइएसबीटी का काम सबसे पहले

पटना मेट्रो का काम जमीन पर शुरू हो गया है। सबसे पहले चरण में मलाही पकड़ी से बैरिया स्थित आइएसबीटी यानी नए बस स्टैंड तक मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना है। इसके लिए कंकड़बाग 90 फीट रोड में पाइलिंग का काम भी जारी है। इसके अलावा आइएसबीटी डिपो में गेज ट्रैक बिछाने का टेंडर निकाला जा चुका है, जिसे दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है। डिपो के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

Input: Dainik jagran

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