राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े पुत्र और हसनपुर से विधायक तेजप्रताप यादव के खिलाफ समस्‍तीपुर जिले के रोसड़ा थाने में एफआइआर कराई गई है। उनपर 2020 के विधानसभा चुनाव में गलत शपथ पत्र दाखिल करने का आरोप लगाया गया है। हसनपुर विधानसभा के निर्वाची पदाधिकारी व डीसीएलआर सह एसडीओ ब्रजेश कुमार के आवेदन पर लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1951 की धारा 125 क के तहत मामला दर्ज कराया गया है। उनपर संपत्ति छिपाने का आरोप है।

संपत्तियाें का गलत ब्‍योरा देने का आरोप

प्राथमिकी ( 419/21) के अनुसार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की अधिसूचना के तहत 140 हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से राजद प्रत्‍याशी के रूप में 13 अक्‍टूबर 2020 को तेजप्रताप यादव ने नामांकन का पर्चा दाखिल किया था। इस दौरान उन्‍होंने शपथ पत्र में अचल संपत्ति की गलत जानकारी दी थी, यह इसकी शिकायत बिहार प्रदेश जदयू ने प्रदेश के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी से की थी। मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी ने इस शिकायत की प्रति चार नवंबर 2020 को भारतीय निर्वाचन आयोग को भेजी थी। वहां से इसकी जांच के लिए केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को लिखा गया। सीबीडीटी ने जांच कर तीन पत्रों के माध्‍यम से बताया कि वर्ष 2015 और 2020 के चुनाव में दाखिल शपथ पत्रों के मुताबिक संपत्तियों में 82 लाख 40 हजार 867 रुपये की वृद्धि‍ हुई, जबकि 2015-16 एवं 2016-20 तक इनकम टैक्‍स विवरणियों के हिसाब से यह 22 लाख 76 हजार 220 रुपये बनती है।

निर्वाचन आयोग की नोटिस का नहीं दिया जवाब

बताया जाता है कि जदयू की शिकायत में जिन परिसंपत्तियों की चर्चा है, जांच में उसका गोपालगंज जिले में होना बताया गया है। यह संपत्ति तेजप्रताप यादव के नाम से रजिस्‍टर्ड है। यह शपथ पत्र में दी गई परिसंपत्तियों से मेल नहीं खाती। सीबीडीटी की रिपोर्ट के बाद निर्वाचन आयोग की ओर से राजद विधायक को शोकॉज नोटिस भेजा गया था। लेकिन निर्धारित समय में उन्‍होंने जवाब नहीं दिया। उस आलोक में जिला निर्वाचन अधिकारी सह डीएम समस्‍तीपुर ने हसनपुर के निर्वाची पदाधिकारी को एफआइआर का आदेश दिया था।

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