देवघर/बासुकीनाथः कोरोना के कारण इस बार भी बाबा भोले की नगरी देवघर में सन्नाटा पसरा है. सिर्फ पंडा-पुजारी सुबह और शाम सरकारी पूजा करते हैं. पिछले साल की तरह इस बार भी कोरोना के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार के आदेश के बाद जिला प्रशासन की ओर से मंदिरों में कांवरियों के प्रवेश पर रोक है. हालांकि जो भक्त भगवान भोले का दर्शन करना चाहते हैं वह हर दिन होने वाले लाइव प्रसारण के जरिए दर्शन कर सकते हैं. हर दिन सुबह शाम आरती होती है जिसका लाइव प्रसारण किया जाता है.

पूजा और आरती का समय, लाइव दर्शन भी करें

बताया जाता है कि बासुकीनाथ धाम में अहले सुबह 4.30 मिनट पर और शाम 6:30 मिनट पर सरकारी पूजा होगी. वहीं, 6:30 मिनट से लेकर 8:00 बजे तक शृंगार पूजा होगी. इस दौरान आरती भी की जाएगी. देवघर में 4:45 मिनट पर सुबह और शाम सरकारी पूजा होती है जबकि शाम 7:00 बजे आरती की जाती है. इसका लाइव प्रसारण देखने के लिए jhargov.tv और दुमका एडमिनिस्ट्रेशन के फेसबुक पेज पर लाइव देख सकते हैं.

झारखंड-बिहार के बॉर्डर पर ही पुलिस ने बैरिकेडिंग कर सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर पहुंचने वाले कावरियों पर रोक लगा दी है. पहली सोमवारी के दिन भी प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग देवघर और बासुकीनाथ शिवालयों में सन्नाटा पसरा रहा. अहले सुबह देवघर और बासुकीनाथ मंदिर में बाबा भोलेनाथ की सरकारी पूजा की गई.

एंट्री पॉइंट पर की गई बैरिकेडिंग ताकि प्रवेश ना करें कांवरिया

इधर, बरारी घाट से जल लेकर चलने वाले कावरियों को हंसडीहा में बैरिकेडिंग कर रोकने की तैयारी की गई है. वहीं, पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट बॉर्डर सुडीचुंवा और कोलकाता मार्ग पर महेशखला में बैरिकेडिंग की गई है. वहीं सिउड़ी मार्ग पर दिगुली बॉर्डर पर मैजिस्ट्रेट के साथ पुलिस और बैरिकेडिंग की गई है. देवघर शहर में पहुंचने वाले रास्तों पर भी बैरिकेडिंग कर भारी संख्या में फोर्स की तैनाती की गई है. इसके अलावा सीसीटीवी से भी निगरानी की जा रही है.

कांवरियों को समझाकर भेजा जा रहा वापस, प्रचार-प्रसार भी

दुमका के एसपी अंबर लकड़ा ने कहा कि यह सारी व्यवस्था राज्य सरकार के आदेश पर की गई है. राज्य में बढ़ते कोरोना को रोकने के लिए ऐसा कदम उठाया गया है. झारखंड बॉर्डर पर पहुंचने वाले कावरियों को समझाकर वापस लौटा दिया जा रहा है. माइकिंग कर प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है.

बता दें कि लगातार दो वर्षों से कोरोना की वजह से श्रावणी मेले पर रोक लगी है. करीब एक महीने में लाखों श्रद्धालु बाबा भोले का दर्शन करने के लिए आते हैं. सुल्तानगंज से लेकर बाबा नगरी देवघर तक कावंरियों की लाइन लगी रहती है. इस मेले से कई लोगों का रोजगार भी टिका है. मेले में आए लाखों श्रद्धालु के भरोसे पूरे सालभर की कमाई कर दुकानदार अपना जीवन-यापन करते हैं.

Input: abp news

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