बिहार का स्वास्थ्य विभाग अपने लापरवाह रवैये की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहता है. कभी मरीजों के इलाज में लापरवाही, तो कभी अस्पताल के संसाधनों की देख-रेख में कोताही. ताजा मामला बिहार के सुपौल जिले के निर्मली अनुमंडल अस्पताल का है, जहां मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. अस्पताल में इमरजेंसी सेवा जुगाड़ टेक्निक से चल रही है. पिछले छह महीने में 2-3 बार पत्राचार के बाद भी विभाग गंभीर नहीं हो रहा है.

दरअसल, निर्मली अनुमंडलीय अस्पताल में एम्बुलेंस बीते छह महीने से खराब है. उसे स्टार्ट करने के लिए मरीजों के परिजनों को धक्का लगाना पड़ता है. बीते दिनों मरौना प्रखंड के ललमनियां पंचायत के रसुआर गांव निवासी प्रमोद ठाकुर की पत्नी कौसल्या देवी को निर्मली अनुमंडलीय अस्पताल से सदर अस्पताल रेफर किया गया था. लिहाजा, परिजनों की मदद से प्रसव पीड़िता को एम्बुलेंस में बैठाया गया. लेकिन, एम्बुलेंस स्टार्ट नहीं हो रही थी.

एम्बुलेंस चालक द्वारा परिजन और अन्य लोगों को धक्का देने के लिए आवाज लगाया गया. इसके बाद परिजन समेत अन्य लोगों ने मिलकर धक्का लगाया, जिसके बाद गाड़ी स्टार्ट हुई. इस बीच लगभग आधे घंटे तक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से एम्बुलेंस में ही तड़पती रही.

एम्बुलेंस चालक ने कही ये बात

एम्बुलेंस चालक सूरज कुमार ने बताया कि एम्बुलेंस काफी दिनों से खराब है. तीन बार विभाग में पत्राचार किया गया है. आश्वासन मिल रहा है कि जल्द एम्बुलेंस दुरुस्त हो जाएगा. लेकिन इस ओर कोई पहल नहीं की जा रही है. इमरजेंसी के समय स्टार्टिंग प्रॉब्लम के कारण भारी फजीहत झेलनी पड़ती है.

अधिकारी ने कही ये बात

प्रभारी सिविल सर्जन इंद्रजीत प्रसाद ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है. संबंधित एजेंसी को एम्बुलेंस ठीक कराने को बोला गया है. अगर ठीक नहीं हो सका तो एम्बुलेंस को बदल दिया जाएगा.

Input: abp news

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