बिहार (Bihar) में पहले से ही कई विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र विलंब से चल रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य के आधा दर्जन विश्वविद्यालयों में स्थाई कुलपति (VC) न होना है. दूसरे विश्वविद्यालय के कुलपतियों को ऐसे विश्वविद्यालयों का प्रभार सौंपा गया है. इस कारण छात्रों को तो असुविधा हो ही रही है साथ ही एकेडमिक कैलेंडर का अनुपालन भी सही ढंग से नहीं हो पा रहा है. बिहार में कई विश्वविद्यालय इन दिनों प्रभार के भरोसे चल रहे हैं.

दरअसल, इन विश्वविद्यालयों (Universities) में कुलपतियों का टर्म पूरा हो जाने के बाद भी स्थाई कुलपति की नियुक्ति नहीं की गई और दूसरे विश्वविद्यालय के कुलपतियों (Vice Chancellors) को प्रभार देकर काम चलाने की कोशिशें जारी हैं. इन विश्वविद्यालयों में मौलाना मजहरूल हक अरबी फारसी विश्वविद्यालय पटना, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय पटना, नालंदा खुला विश्वविद्यालय पटना, बिहार एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय सबौर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय पटना, पूर्णिया विश्वविद्यालय पूर्णिया और मुंगेर विश्वविद्यालय मुंगेर का नाम शामिल है.

कुलपतियों के प्रभार में चलने के कारण ऐसे सभी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक माहौल में शिथिलता का आलम है. यही नहीं शैक्षणिक व्यवस्था पर भी इसका खासा असर देखा जा रहा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि एक विश्वविद्यालय को छोड़कर सभी विश्वविद्यालयों में पीजी पाठ्यक्रम की परीक्षा और सत्र 3 साल या इससे भी पीछे चल रहा है. बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के पूर्व कुलपति डॉ. विनोद कुमार की मानें तो कुलपति की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया कम से कम पहले कुलपति की सेवानिवृति के 6 महीने पहले शुरू कर देनी चाहिए. बगैर स्थाई कुलपति के विश्विद्यालय अभिभावक विहीन हो जाता है.

सार्थक परिणाम भी सामने आए हैं
इस मामले को लेकर जहां विपक्ष बिहार की उच्चतर शिक्षा को लेकर सरकार पर उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगा रहा है. वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि सरकार कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर गंभीर है और इस बारे में जल्द ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. विपक्षी पार्टी कांग्रेस प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने इस मसले पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदहाल स्थिति इस बात को साबित करती है कि मौजूदा सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उदासीन रवैया अख्तियार करती रही है. हालांकि, जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने इन बातों को नकारते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति और उपलब्धियों का हवाला देते हुए बताया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र को लेकर लगातार गंभीर रही है जिसके कई सकारात्मक और सार्थक परिणाम भी सामने आए हैं.

दुरुस्त करना एक बड़ी चुनौती
बाहरहाल, एनडीए सरकार के शासनकाल में बिहार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काफी सुधार किया है. इसमें कोई शक नहीं है. लेकिन विश्वविद्यालयों में अस्थाई कुलपति का नहीं होना बड़ा सवाल खड़ा करता है. खासकर ऐसी स्थिति में जबकि कई विश्वविद्यालयों में एकेडमिक कैलेंडर को दुरुस्त करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
Input: news18




