बिहार के गांवों में अब सरकार की ओर से मुक्ति धाम बनाने की तैयारी है। पंचायती राज विभाग ने इसका मसौदा तैयार कर लिया है। नौ लाख रुपये की लागत से प्रत्येक पंचायत में एक-एक मुक्तिधाम की स्थापना होगी, जहां विद्युत शवदाह गृह के साथ-साथ लोगों के बैठने के लिए पक्का मेज, शौचालय और स्नानागार की व्यवस्था होगी। हरियाली का खास ख्याल रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे एक हद तक प्रदूषण से भी राहत मिलेगी।

अभी गांवों में लकड़ी से शव जलाने की परंपरा है, लेकिन दिनों-दिन लकड़ी की किल्लत को देखते हुए विद्युत शवदाह गृह बनाने की तैयारी है। सरकार की पहली प्राथमिकता ऐसे पंचायतों में मुक्ति धाम बनाने की हैं जहां परंपरागत रूप से वर्षो से दाह संस्कार का काम होता है। इसी आधार पर पंचायतों का चयन भी किया जाएगा।

अतिक्रमण मुक्त होगी भूमि : सरकार के इस पहल वर्षो से अतिक्रमण के भेंट चढ़े भूमि को खाली कराया जाएगा। इसका निर्माण हो जाने पर हिन्दुओं का अंतिम संस्कार करने में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। खासकर बारिश के दिनों में शव जलाने में परेशानी नहीं होगी। वर्तमान में सरकार को 718.76 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है।

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प्रदूषण से भी मिलेगी मुक्ति, लकड़ी की किल्लत को देखते हुए पंचायती राज विभाग की पहल, 718 करोड़ रुपये खर्च का है अनुमान

सरकार की मंशा परंपरागत रूप से अभी जिन पंचायतों में दाह संस्कार का काम होता है वहीं मुक्ति धाम बनाने की है। मसौदा को अंतिम रूप में देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कोशिश है कि लोगों को मुक्ति धाम में मूलभूत सुविधाएं जरूर उपलब्ध हो जाए। – सम्राट चौधरी, पंचायती राज मंत्री

Source : Dainik Jagran

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