कम खर्च पर बेहतर तकनीक से कचरा प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत सभी शहरी निकायों में स्वच्छ तकनीक चैलेंज शुरू किया गया है। इसमें कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाले लोग, स्टार्टअप कंपनियों व शैक्षणिक संस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस चैलेंज के तहत उनसे तकनीक आधारित कचरा प्रबंधन पर आइडिया मांगे जा रहे हैं, जिनमें से बेहतरीन आइडिया को राष्ट्रीय स्तर पर भेजा जाएगा।

चैलेंज में राष्ट्रीय स्तर पर अंतिम रूप से चयनित 10 बेहतर आइडिया को 25-25 लाख रुपये की सीड फंडिंग मिलेगा। इसके साथ ही फ्रेंच टेक से एक साल का इन्क्यूबेशन सपोर्ट भी मिलेगा। वहीं राज्य स्तर पर चुनी जाने वाली पांच इंट्री को भी स्वच्छ भारत मिशन के तहत सहायता प्रदान की जाएगी। पहले स्थान पर आने वाले को पांच लाख, दूसरे स्थान को ढाई लाख, तीसरे स्थान को डेढ़ लाख, चौथे को एक लाख और पांचवें को 75 हजार रुपये दिए जाएंगे।

30 दिसंबर तक भेजनी है इंट्री

नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के सभी शहरी निकायों से 30 दिसंबर तक इंट्री मांगी है। प्रत्येक शहरी निकायों को दो-दो इनोवेटिव आइडिया विभाग को भेजना है। सभी निकायों से मिले इनोवेटिव आइडिया में से सबसे बेहतरीन तीन आइडिया राज्य स्तर पर चयनित होगी, जिसे केंद्र को भेजा जाएगा। सभी राज्यों से मिलने वाले टॉप तीन समाधानों को मिला कर 15 जनवरी से स्वच्छता स्टार्ट अप चैलेंज 2022 शुरू होगा।

  • शहरी निकायों में स्वच्छ तकनीक चैलेंज, मिलेगा इनाम
  • 25-25 लाख रुपये मिलेंगे राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए सर्वश्रेष्ठ 10 आइडिया को
  • 05 इंट्री चुनी जाएगी राज्य स्तर पर, 75 हजार से पांच लाख का मिलेगा इनाम

इन मुद्दों पर परखा जाएगा आइडिया

सामाजिक समावेश : सफाई कर्मियों के लिए बेहतर काम करने की स्थिति बनाना। कम खर्च में बेहतर अपशिष्ट संग्रह और प्रबंधन। कम लागत में सेप्टिक टैंक और सीवर लाइनों की सफाई।

जीरो डंप : डोर टू डोर ठोस कचरा संग्रह की ट्रैकिंग। प्रसंस्करण और रिसाइकिल यानी पुनर्चक्रण की व्यवस्था। डंप स्टेशन पर कचरे के निबटान के लिए कम लागत वाला पोर्टेबल समाधान।

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन : सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प। प्लास्टिक कचरे के प्रोसेसिंग व रिसाइक्लिंग का समाधान। बहुस्तरीय प्लास्टिक के संग्रह और उसके निपटान के लिए नवीन तरीके।

पारदर्शिता : सेप्टिक टैंक और सीवर लाइनों के ओवरफ्लो की जांच के लिए डिजिटल समाधान। इंटरनेट, जीपीएस, एप का उपयोग करते हुए सफाई की रियल टाइम मॉनिटरिंग।

Source : Dainik Jagran

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