लॉकडाउन के बाद अब डीजल-पेट्रोल की बढ़ी कीमतों ने आमलोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। छह माह में ट्रकों के भाड़े में 25 से तीस प्रतिशत बढ़ोतरी से खाद्य समेत अन्य सामग्रियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। महंगाई के चलते दाल, प्याज, आलू व खाद्य तेल खरीदने में दिन में तारे नजर आ रहे हैं।

बस, ऑटो व अन्य सवारी गाड़ियों का भाड़ा भी तेजी से बढ़ा है। समस्तीपुर, दरभंगा, हाजीपुर व सीतामढ़ी जाने में सौ के बदले डेढ़ सौ रुपये खर्च करना पड़ रहा है। जीरोमाइल से स्टेशन रोड का किराया दस के बदले बीस रुपये वसूल किया जा रहा है। लॉकडाउन की मंदी के बीच सामानों की कीमत व यात्रा भाड़ा बढ़ने से आमलोगों की जेब कट रही है।

कमाई में कमी व खर्च में बढ़ोतरी ने आमलोगों को मुश्किल में डाल दिया है। बाइक-स्कूटी की टंकी तीन सौ के बदले पांच सौ रुपये के पेट्रोल में फुल हो रही है। डीजल व पेट्रोल की कीमत बढ़ने के साथ बाजार समिति, सूतापट्टी, गोला रोड आदि मंडियों के व्यवसायियों और बेला के उद्यमियों की चिंता बढ़ती जा रही है।

बालू की कीमत प्रति टेलर तीन माह में छह हजार से बढ़कर आठ हजार रुपये हो गई है। इससे घर बनाना भी महंगा हो रहा है। बेला के उद्यमी भरत अग्रवाल ने बताया कि पेट्रोलियम की कीमत बढ़ने से प्लास्टिक दानों की कीमत साल भर में दोगुनी हो गई है, जबकि आमलोग सामानों की कीमत सुनकर खरीदारी से तौबा कर रहे हैं।
किराया बढ़ाने की तैयारी में ट्रांसपोर्टर
बस ऑपरेटर किराया बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के प्रवक्ता कामेश्वर महतो ने बताया कि 2018 में बसों का किराया बढ़ा। उस समय एक हजार रुपये के डीजल में बसें पटना जाती थी। अब साढ़े 14 सौ के डीजल में बस पटना जा रही है। उन्होंने बताया कि 2018 के बाद अधिकृत रूप से किराया नहीं बढ़ा है। उस समय 65 रूपये डीजल मिलती थी। अब 95 रुपये हो गई है।
जेनरेटर व मशीनों का बढ़ा भाड़ा
डीजल महंगा होने से जनरेटर, छत ढलाई व मशीनों का भाड़ा बढ़ गया है। इसके अलावा व्यवसायिक बाजारों में जेनरेटर की बिजली के इस्तेमाल पर लगने वाले शुल्क में बढ़ोतरी कर दी गई है। पांच सौ के बदले सात सौ रुपये प्रति प्वाइंट शुल्क वसूला जा रहा है। छत की ढलाई वाली मशीन के इस्तेमाल पर प्रतिदिन दो हजार रुपये लगते थे। अब इसका भाड़ा 25 सौ रुपये कर दिया गया है।
Input: live hindustan






