टीका एक्सप्रेस की रफ्तार पैसेंजर से भी बदतर हो गई है। 3 जून को बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने प्रदेश में 121 गाड़ियों को विशेष टीकाकरण अभियान के लिए रवाना किया था। यूनिसेफ ने 40 और केयर इंडिया ने 81 गाड़ियां इस विशेष मुहिम में लगाई है। हर गाड़ी पर दो-दो कर्मियों को भी लगाया गया है। इस बड़े मिशन के बाद पटना में वैक्सीनेशन की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। पटना में लगी 40 गाड़ियों को एक दिन में 8000 वैक्सीनेशन करना था और 17 दिनों में यह टारगेट 1.36 लाख हुआ, लेकिन अब तक मात्र 3198 टीकाकरण ही हो पाया है।

सरकार की योजना शहरी वार्ड को 100% वैक्सीनेशन

सरकार की मंशा है कि शहरी क्षेत्र के सभी वार्डों में शत प्रतिशत वैक्सीनेशन हो है, लेकिन पटना में इस मंशा को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। पटना में 40 गाड़ी को लगाया गया, लेकिन वैक्सीनेशन की हकीकत सामने आ गई है। इतनी ताकत के बाद भी वैक्सीनेशन के लिए चल रही टीका एक्सप्रेस रफ्तार नहीं पकड़ पाई।

टीका एक्सप्रेस की यह है रफ्तार

17 दिन में टीका एक्सप्रेस ने मात्र 3198 लोगों का टीकाकरण किया गया। इसमें पहला डोज लेने वालों की संख्या 2966 है और दूसरा डोज लेने वालों की संख्या मात्र 232 है। 40 टीम लगाने के बाद भी वैक्सीनेशन को टीका एक्सप्रेस से रफ्तार नहीं मिल पाई है। सरकार ने हर गाड़ी को एक दिन में 200 वैक्सीनेशन का लक्ष्य दिया था। ऐसे में पटना में 17 दिनों में 1.36 लाख लोगों को टीका लगाना था। अगर गाड़ियों का अभियान रफ्तार पकड़ा हाेता तो वैक्सीनेशन की संख्या काफी अधिक हो जाती।

40 गाड़ी में 80 कर्मियों को लगाया गया

पटना में 40 गाड़ियों में 40 लोगों को लगाया गया था। इसमें एक वैक्सीनेटर और एक कर्मी को वेरिफिकेशन के लिए लगाया गया था। राज्य में इन गाड़ियाें को लेकर तस्वीरें भी खूब वायरल हुईं। ऐसी तस्वीर भी वायरल हुई जिसमें टीका लगाने वाली गाड़ी से परिवार को ढोया जा रहा था। बिहार के कई जिलों से ऐसी गाड़ियों की तस्वीर वायरल हुई है।

Input: dainik bhaskar

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