नालंदा. बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ में व्यवहार न्यायालय में किशोर न्याय परिषद के न्यायाधीश मानवेंद्र मिश्र ने चार साल की बच्ची के साथ अप्राकृतिक यौनाचार मामले में मात्र एक दिन में अपना फैसला सुनाते हुए इतिहास रच दिया है. जज मानवेंद्र मिश्र व परिषद की सदस्य उषा कुमारी ने इसे पाशविक प्रवृति मानते हुए कहा कि ऐसे लोगों को दंडित करना और समाज को जागरूक करना बेहद जरूरी है. दोषी किशोर भले ही 14 वर्ष का है. लेकिन उसने सुनियोजित तरीके से अपराध को अंजाम दिया है. उसने पीड़ित बच्ची के साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया और उसकी मां के आने की भनक पाकर फरार हो गया. जो यह साबित करता है कि किशोर मानसिक और शारीरिक तौर पर अपराध करने में सक्षम था. इसलिए उसे किशोरों को अपराध की अधिकतम सजा धारा 377 में तीन वर्ष की सजा सुनाई जाती है.

शनिवार को किशोर न्याय परिषद के न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्रा ने मामले की सुनवाई करते हुए महज एक दिन में सभी पांच गवाहों का गवाही ली. साथ ही दस प्रत्यक्षदर्शियों का भी परीक्षण कराते हुए बहस पूरी की. उन्होंने इस केस से जुड़ी सभी कार्यवाही एक दिन में पूरी करते हुए अपना फैसला सुनाया है. लोक अभियोजन जयप्रकाश ने बताया कि दोषी किशोर ने इमली और चॉकलेट के लालच देकर चार वर्षीय बच्ची के साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया था. इस मामले में अदालत ने उसे तीन साल की सजा सुनाई है.

बता दें कि नालंदा थाना क्षेत्र के एक गांव में आठ अक्टूबर, 2021 को किशोर द्वारा चार साल की बच्ची के साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया था. पीड़िता की बुआ ने आरोपी किशोर को अपनी मासूम भतीजी के साथ गलत काम करते हुए देख लिया था और उन्होंने शोर मचाया था. लोगों के आने की भनक लगने पर किशोर मौके से फरार हो गया था.

बाद में आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी किशोर को पकड़कर उसे पुलिस के हवाले कर दिया था. इस मामले में पुलिस ने आरोपी किशोर और पीड़िता की फॉरेंसिक जांच करवाई थी जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी.
Source : News18
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