सिंघम के नाम से बिहार में चर्चित शिवदीप लांडे उन आईपीएस अफसरों में शामिल हैं, जिनके नाम से अपराधियों के पैर कांपते हैं। बिहार कैडर के 2006 बैच के आईपीएस शिवदीप लांडे मौजूदा समय में मुंबई में पुलिस क्राइम ब्रांच में डीआईजी के पद पर हैं। वहां डेपुटेशन ड्यूटी के बाद बिहार में उनकी वापसी हो रही है। 15 दिसंबर के अंदर वो राज्य में अपनी सेवा देने लगेंगे। आम लोगों के लिए सरल और अपराधियों के लिए सख्त शिवदीप लांडे ने मुंगेर जिले से अपने करियर की शुरूआत की। उनकी कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी व मानवता को यहां के लोग आज भी याद करते हैं।

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एक्शन आन द स्पाट के लिए मशहूर शिवदीप लांडे इस समय अपने गृह राज्य महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में हैं। वे मुंबई पुलिस के क्राइम ब्रांच में बतौर डीआईजी के रूप में सेवा दे रहे हैं। अब शिवदीप महाराष्ट्र में पांच साल के डेपुटेशन ड्यूटी के बाद फिर से बिहार लौट रहे हैं। बिहार में अपना कार्यभार नई जिम्मेदारी के साथ संभालेंगे। चर्चा है कि उन्हें मुंगेर या भागलपुर का डीआईजी बनाया जा सकता है।

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बिहार में पहली बार शिवदीप की पोस्टिंग नक्सल प्रभावित जिले मुंगेर के जमालपुर में बतौर ASP अभियान हुई। यहां लगभग दो वर्ष तक सेवा देते हुए उन्होंने अपराध नियंत्रण में जो भुमिका निभाई, उससे मुंगेर के लोग आज भी उनके चेहरे को नहीं भूले हैं। पटना में सिटी एसपी के पद पर हो या अररिया, किशनगंज और रोहतास में पुलिस अधीक्षक और राज्यपाल के ओसएडी के रूप में। इस आईपीएस अधिकारी ने अपने बेस्ट देते हुए अपने कार्यक्षेत्र में तहलका मचा दिया। अपराधियों की नाक में दम करने वाले इस आईपीएस अधिकारी ने किशनगंज में तो मानों आम लोगों को भी जीना सिखा दिया हो।

किशनगंज का मिला था प्रभार

अपनी अनोखी कार्यशैली के चलते शिवदीप पूरे देश में मशहूर हैं। वाकया किशनगंज का बताए तो यहां उन्होंने रोड सेफ्टी को लेकर ऐसा अभियान चलाया कि किशनगंज में हेलमेट की बिक्री तेज हो गई। दरअसल, जिले का अतिरिक्त प्रभार शिवदीप को दिया गया था। इसके बाद उन्होंने जिले के मुख्य बाजार, चौक-चौराहों और मार्ग पर विशेष अभियान चलाया। अपने अभियान के दौरान वे बिना हेलमेट के गुजरने वाले वाहन चालकों को पकड़ना शुरू किया। ऐसे लोगों पर जुर्माना नहीं, उनसे कान पकड़कर उठक बैठक करवानी शुरू कर दी। फिर क्या था, लोग समझ गए कि उठक बैठक से बचना है तो सिर पर हेलमेट होना चाहिए। यहां ये भी बता दें कि शिवदीप बाइक चालक चाहे कितनी भी स्पीड में क्यों न हो, वे उसके सामने निडरता से खड़े हो जाते थे।

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सहरसा में बने डाक्टरों के सुपरकॉप

उन दिनों बिहार के सहरसा जिले में संतोष यादव नाम के कुख्यात का आतंक था। डाक्टरों पर अत्याचार करने वाला संतोष पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता था। लिहाजा, शिवदीप लांडे के नेतृत्व में एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई की। और संतोष को धर दबोचा गया। ऐसे सहरसा में डाक्टरों के लिए शिवदीप सुपरकॉप बन गए।

सीमवर्ती जिले अररिया में आन द स्पाट सुलझाए कई मामले

नेपाल से सटे सीमावर्ती जिले अररिया में बतौर एसपी शिवदीप लांडे यहां की जनता के मन में बस गए। यहां एक गांव में हुई हत्या के बाद वे खुद मौका-ए-वारदात पर पड़ताल करने लगे। इसके बाद वे सुराग का पीछा करते करते हत्यारे के घर जा पहुंचे। बड़ी आसानी से उन्होंने हत्याकांड का खुलासा कर दिया। यही नहीं, अररिया में हुई एक बड़ी बैंक डकैती का उद्भेदन भी शिवदीप ने अपनी बेहतरीन कार्यशैली से कर दिया।

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आईपीएस लांडे के बिहार में चर्चित किस्से

लड़कियों की सुरक्षा के लिए लांडे ने बेहतरीन कदम उठाए। वे किसी भी प्रकार की समस्या को चट से सुलझाने के लिए जाने जाते रहे। मनचलों पर लगाम लगाने के लिए पटना में उन्होंने स्कूल कॉलेजों के बाहर ऐसी सुरक्षा बढ़ाई कि लड़कियां इनकी फैन हो गईं। कहा जाता है कि लड़कियों के पास इनका निजी नंबर तक था। एक फोन काल मे शिवदीप खुद मौके पर पहुंच, शोहदों को सबक सिखा दिया करते थे।

अवैध खनन माफियाओं पर शिवदीप हमेशा हावी रहे। रोहतास में सेवा देने के दौरान एक बार मुठभेड़ हो गई। 30 राउंड फायरिंग के बाद में शिवदीप ने खुद जेसीबी मशीन संभाली और उसे चलाते हुए अवैध खनन के सारे अड्डों को तहस नहस कर दिया। जानकारी मुताबिक इस कार्रवाई में 500 लोग गिरफ्तार हुए।

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टुपट्टा ओढ़ इंस्पेक्टर को पकड़ा

2015 के शुरूआती माह जनवरी में पटना में तैनात शिवदीप ने जो कुछ किया उसके लिए वे सबसे ज्यादा मशहूर हुए। यहां डाक बंगला चौराहे पर उन्होंने फिल्मी स्टाइल में घूस मांग रहे इंस्पेक्टर को पकड़ लिया। इस दौरान उन्होंने टुपट्टा ओढ़ रखा था। इंस्पेक्टर यूपी के सर्वचंद यादव पर पटना के दो व्यापारी भाइयों ने आरोप लगाया था कि वो एक पुराने केस को खत्म कराने के लिए पैसों की डिमांड कर रहा है। दोनों भाइयों ने शिवदीप से गुहार लगाई और फिर ये कार्रवाई की गई।

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तबादले पर रो पड़े थे लोग, निकाला था कैंडल मार्च 

  • मुंगेर में अपराध व अपराधियों के साथ नक्सलियों के लिए अपने सख्त तेवर व कार्रवाई के लिए इनके नाम ही काफी था।
  • मुंगेर जिले में जब भी कोई जब भी कोई बड़ा हादसा होता है, तो आज भी जनता की ओर से यह आवाज निकलती है कि काश शिवदीप लांडे यहां होते तो जिले की विधि व्यवस्था बहाल होती।
  • ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली सामान बनाने वालों पर नकेल कसी थी।
  • जाली नोट का कारोबार करने वालों, नकली दवा बेचने वालों के खिलाफ उन्होंने मुहिम चलाकर सनसनी पैदा कर दी थी।
  • इसके अलावा पीएमसीएच के पास अशोक राजपथ पर स्थित एक कपड़ा शोरूम व्यापारी की हत्या में शिवदीप लांडे की कार्यशैली ने लोगों के दिलों में जगह बना ली।
  • दरअसल कपड़ा व्यापारी की हत्या के बाद बाकी व्यापारियों ने अपराधियों के भय से अपनी दुकानें नहीं खोली। ऐसे में भय दूर करने के लिए लांडे ने अपराधियों को पकड़कर पीएमसीएच गेट पर ही धुनाई कर दी थी।
  • तबादले पर रोते दिखे लोग: लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता ऐसी रही कि जब बिहार के पुलिस महानिदेशक ने जब शिवदीप लांडे का ट्रांसफर पटना सिटी एसपी से पुलिस हेड क्वॉर्टर में कर दिया था तो इसके विरोध में लोग सड़कों पर उतर गए थे। लोगों ने कैंडल मार्च भी निकाला था। इतना ही नहीं उनके ट्रांसफर की खबर से कई लोगों को रोते हुए भी देखा गया था। और अब सिंघम 5 सालों के बाद बिहार आने के साथ मुंगेर व भागलपुर के डीआईजी बनने की चर्चा जोड़ों पर है।

Source : Dainik Jagran

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