‘के के’… बिहार का वो कड़क आईएएस ऑफिसर जिसके नाम से अच्छे-अच्छे माफियाओं के छक्के छूट जाते हैं। कुछ लोग इस आईएएस को हद से ज्यादा जिद्दी को कुछ सबसे बड़ा जुनूनी ऑफिसर तक कहते हैं… कभी ये ठेकेदार पर रिवॉल्वर तानने के लिए सुर्खियों में आते हैं तो कभी एक साथ एक बैंक के सात ब्रांच मैनेजरों पर FIR का आदेश देने के लिए… अब एक बार फिर से नीतीश ने इसी ‘कड़क केके’ को शराबबंदी की कमान दे दी है।

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केके पाठक की बिहार में वापसी

ये नाम है के के पाठक… 1990 बैच के आईएएस ऑफिसर। इनके बारे में हम पूरी कहानी बताएं उससे पहले आप ये खबर जान लीजिए कि बिहार में शराबबंदी को बनाए रखने की कमान एक बार फिर से इसी ऑफिसर को दी गई है। नीतीश सरकार ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है।

कौन हैं के के पाठक

1990 बैच के आईएएस केशव कुमार पाठक, लेकिन ब्यूरोक्रैसी के गलियारों में इन्हें इनके शॉर्ट नेम केके पाठक के नाम से ही जाना जाता है। पाठक उत्तर प्रदेश के रहनेवाले हैं, लेकिन 2015 में जब महागठबंधन सरकार सत्ता में आई थी तो ये दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर थे। उस वक्त इनकी वापसी बिहार में कराई गई। तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता खासतौर पर महिलाओं से शराबबंदी का वादा कर रखा था।

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उस वक्त भी हुई थी दिल्ली से केके की वापसी

दिल्ली से वापस आने के फौरन बाद नीतीश ने उन्हें मद्य निषेध विभाग का प्रधान सचिव बनाया और दी एक बड़ी जिम्मेदारी। वो काम था शराबबंदी कानून बनाने का, मिजाज से कड़क आईएएस के के पाठक ने इस पर रात दिन काम किया और आखिर में शराबबंदी कानून का मसौदा तैयार हो गया। जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि ये कानून काफी कड़क बना था, विपक्ष ने उस वक्त इसे ड्रैकोनियन लॉ तक बता दिया था। लेकिन इस कानून को लागू कराकर ही नीतीश ने दम लिया।

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जब लालू को करवाना पड़ा था के के पाठक का ट्रांसफर

ये उस दौर की बात है जब लालू बिहार के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। उसी वक्त उनकी तैनाती लालू यादव गृह के जिले गोपालगंज में बतौर डीएम यानि जिलाधिकारी की गई। तब के के पाठक ने इस जिले में जो जलवा दिखाया उसके बाद लालू को पता चल गया कि उन्होंने गलत दांव खेल दिया है। लालू के करीबी पाठक की कार्यशैली से इतने परेशान हो गए कि अंत में लालू को उनका ट्रांसफर कर सचिवालय बुलाना पड़ गया। हालांकि ये पाठक की बतौर डीएम सिर्फ दूसरी पोस्टिंग ही थी। लेकिन तभी पता चल गया था कि इस अफसर का मिजाज कैसा है।

पाठक के साथ विवाद भी जुड़े

साल 2019 में केके पाठक पर एक ठेकेदार ने गंभीर आरोप लगाए थे। तब वो नीतीश सरकार में लघु सिंचाई विभाग के प्रधान सचिव के पद पर थे। तब इस आईएएस अफसर पर मां शकुंतला इंफ्रास्ट्रकचर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक कुमुद राज सिंह ने लाठी से पिटाई और रिवॉल्वर से जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था।

जब के के पाठक पर पटना हाईकोर्ट ने लगाया था जुर्माना

इससे पहले साल 2018 में बिहार के इस चर्चित आईएएस अधिकारी के के पाठक पर पटना हाईकोर्ट ने 1 लाख 75 हजार रुपये का जुर्माना ठोका था। अदालत ने केके पाठक पर ये जुर्माना स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के 7 ब्रांच मैनेजरों पर कार्रवाई के केस में लगाया था। आरोप था कि उन्होंने कार्रवाई में अपनी मनमानी की थी। पूरा मामला ये था कि स्टाम्प ड्यूटी देर से जमा किये जाने पर पाठक नाराज हो गये थे। इसके बाद उन्होंने एसबीआई के 7 ब्रांच मैनेजरों के पर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश निकाल दिया था।

के के पाठक की नियुक्ति पर RJD ने उठाए सवाल तो ललन सिंह बोले- पूछकर करें पोस्टिंग ?

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने बिहार में शराबबंदी को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयान को लेकर सवाल खड़ा किया है. ललन सिंह ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनको शार्क मछली और पोठिया मछली समझ में आती है. हमने तो कहा ही है कि तेजस्वी यादव जितना शराबबंदी के खिलाफ बोल रहे हैं उनको अपने इलेक्शन मेनिफेस्टो में इसे शामिल करना चाहिए था. उनको कहना चाहिए था कि हम शराबबंदी खत्म करेंगे.

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि बिहार में शराबबंदी है और आगे भी शराबबंदी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि शराबबंदी को नियंत्रित करने के लिए जितने सख्त से सख्त कदम की जरूरत होगी राज्य सरकार उठा रही है. मद्य निषेध विभाग में अपर मुख्य सचिव के पद पर केके पाठक को पदस्थापित करने को लेकर आरजेडी ने सवाल खड़ा किया है. इस पर भी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा केके पाठक को लेकर आरजेडी के सवाल उठाने का क्या मतलब है ? यह सरकार का काम है. क्या आरजेडी बताएगी कि कौन से पदाधिकारी कहां पदस्थापित होंगे ?

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ललन सिंह ने कहा कि जब शराबबंदी का कानून बना था उस वक्त केके पाठक ही वहां पर उत्पाद आयुक्त थे. गौरतलब है कि आरजेडी शराबबंदी की समीक्षा और उसके बाद लिए गए सख्त फैसले पर सवाल खड़ा कर रही है. आरजेडी के तमाम बड़े नेता यह कह रहे हैं कि केवल छोटी मछलियों को ही पकड़ने की कोशिश हो रही है जबकि बड़ी मछलियां और बड़े सिंडिकेट में शामिल लोग इस पकड़ से बाहर हैं. आरजेडी की तरफ से लगातार यह आरोप लगाया जाता रहा है कि शराबबंदी के नाम पर केवल गरीब और छोटे लोगों को ही परेशान किया जाता है इस पर जेडीयू की तरफ से पलटवार हुआ है.

उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर भी जेडीयू अपनी तैयारी में लगी हुई है. जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने एक बार फिर दोहराया है कि बीजेपी के साथ पार्टी की बातचीत हो रही है. अगर बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं हुआ तो भी जेडीयू अकेले अपने दम पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से बात करने के लिए अधिकृत किया गया है और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से जेडीयू के आरसीपी सिंह की बात हुई हो रही है.

Input : NBT & News18

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