प्रत्येक वित्तीय वर्ष में सांसद निधि में आने वाली राशि को जनोपयोगी कार्यों में सांसद शत-प्रतिशत नहीं खर्च कर पा रहे हैं। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए पांच करोड़ की राशि तय है, यद्यपि पिछले दो वित्तीय वर्ष में सांसदों को राशि नहीं मिली है। वित्तिय वर्ष 2019-20 में मिली राशि को भी इक्का-दुक्का सांसदों को छोड़ प्रदेश के अधिकांश सांसदों ने खर्च करने में कोताही बरती है। हालांकि आवंटित राशि में से सबसे अधिक खर्च मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद ने की है। सुपौल सांसद दिलेश्वर कामत ने सबसे कम राशि खर्च की है। इसे लेकर मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटे ने रिपोर्ट अपनी वेबसाइट जारी किया है।

राशि खर्च करने में उदासीन रहे अधिकतर सांसद : जानकारी हो कि, वित्तिय वर्ष 2019-20 में केंद्र सरकार ने सांसद निधि में सात, पांच और ढ़ाई करोड़ रुपये आवंटित किये। इसका खर्च करने में उत्तर बिहार सहित सूबे के 95 फीसदी सांसद उदासीन रहे। उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर सांसद ने तकरीबन शत-प्रतिशित सांसद निधि को खर्च किया है। उनके पास सिर्फ 0.01 करोड़ रुपये ही बचे हैं। वही, वैशाली सांसद वीणा देवी के पास 2.60 करोड़ और शिवहर सांसद रामा देवी के पास मिले पांच करोड़ राशि में 1.85 करोड़ की राशि खर्च करने को पड़ी है।


केंद्रीय मंत्री भी राशि खर्च करने में हैं पीछे : 41 सांसदों में से कई सांसद केंद्र सरकार में मंत्री है। उन्हें भी नियमानुसार केंद्र सरकार ने सांसद निधि में रुपये आवंटित किये। लेकिन, वे भी इसे खर्च करने में पीछे है। बक्सर के सांसद व केंद्र सरकार में मंत्री अश्वनी कुमार चौबे ने अपनी निधि से अपने क्षेत्र में सिर्फ 1.75 करोड़ का ही अबतक काम करा सके हैं। वहीं, उनके पास 3.25 करोड़ राशि शेष है। वहीं केंद्रीय मंत्री व पटना साहिब से सांसद रवि शंकर प्रसाद ने तो मिली राशि का इस्तेमाल ही नहीं किया है। आवंटित राशि बची हुई है। इसके अलावा केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने भी अपने निधि से खर्च करने में उदासीनता दिखाई है। ये आवंटित पांच करोड़ में से सिर्फ 2.36 करोड़ राशि ही खर्च कर सके हैं। इसके अलावा मंत्री गिरिराज सिंह के पास 3.28 करोड़ रुपये शेष बचे हुए हैं।
Source : Hindustan








