जदयू नेता व पूर्व विधायक महेश्वर प्रसाद यादव ने बयान जारी कर आरोप लगाया है कि जिला परिषद पर कब्जा कर अरबों रुपए की अकूत अवैध संपत्ति अर्जित करने वाले विधान पार्षद दिनेश सिंह और सांसद वीणा देवी की जिला परिषद के माध्यम से शिक्षक और अन्य नियोजन में भ्रष्टाचार कर पैसे की उगाही आदत है। इस बहाली में भी वे सिविल सर्जन पर दबाव बना कर अपनी हिस्सेदारी चाहते थे। इसकी पूर्ति नहीं होने पर डीएम से शिकायत कर सैकड़ों बेरोजगार अभ्यर्थियों की सेवा समाप्त करा दी।

हालांकि, इस मामले में दिनेश सिंह ने पहले ही साफ कर दिया है कि इस नियोजन में उनका काेई दखल नहीं है। सिविल सर्जन काे चुनौती देते हुए कहा था कि वह सार्वजनिक करें कि उन्होंने किसकी सिफारिश की थी। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में गायघाट क्षेत्र से जदयू टिकट पर चुनाव लड़ने वाले महेश्वर यादव के खिलाफ जदयू एमएलसी दिनेश सिंह की बेटी काेमल सिंह ने लोजपा टिकट पर मैदान में थीं।

माना जा रहा है कि लोजपा द्वारा वाेट काटे जाने के कारण ही महेश्वर यादव अपनी सीट नहीं बचा पाए। इधर, राजद प्रदेश महासचिव डॉ. विनोद प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर 780 नियोजन मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। कहा कि सिविल सर्जन द्वारा कुछ बड़े राजनेताओं के संरक्षण में किया यह बड़ा भ्रष्टाचार है। इससे बेरोजगार युवक-युवतियों का आर्थिक दोहन हुआ है।

Input: dainik bhaskar

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