बिहार के सोनवर्षा दियारे से जान बचाने के लिए 152 लोग यूपी के बरवाघाट के लिए गुरुवार को दोपहर में मोटर बोट से निकले। लेकिन बरवाघाट से ठीक पहले बोट खराबी हो गई। बोट डाउन स्ट्रीम में बहकर तीन किलोमीटर दूर अमवाखास में जाकर तेज धार में फंस गयी। इसके बाद वहां चीख पुकार मच गई। 16 घंटे तक गंडक की धार में लोगों की जान आफत में फंसी रही। बोट पर सवार लोगों की चीख-पुकार अमावाखास के लोगों ने सुनी। ग्रामीणों ने छोटे नाव व नाविकों की मदद से लोगों को निकालना शुरू किया। लेकिन तेज धार छोटी नाव होने की वजह से उन्हें सफलता नहीं मिली थी।

लोगों ने यूपी के कुशीनगर प्रशासन को इसकी सूचना दी। डीएम एस.राजलिंगम व एसडीपी अयोध्या प्रसाद सिंह बरवाघाट पहुंचे। गोरखपुर से एनडीआरएफ की टीम बुलाई गई। शुक्रवार सुबह छह बजे तक एनडीआरएफ ने 112 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इससे पूर्व तीन बजे भोर तक 40 लोगों को ग्रामीणों ने निकाल लिया था।

जानकारी के अनुसार सोनवर्षा दियारा में खेती-बारी के लिए बिहार-यूपी के लोग अस्थायी घर बनाकर रहते हैं। भारी बारिश व वाल्मीकि बराज से पानी छोड़े जाने के कारण गुरुवार को दियारे में पानी फैलने लगा। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए बोट पर सवार होकर 152 लोग बरवाघाट के लिए दोपहर दो बजे के आसपास निकले। शाम छह बजे तक वे बरवाघाट के नजदीक पहुंचे थे, तभी बोट में खराबी आ गई। अब लोगों को लगा कि वे नहीं बचेंगे। बोट पर महिलाएं व बच्चे भी सवार थे। महिलाएं कलेजे को टुकरे को गोद में कसकर पकड़ लिया। ताकि किसी भी स्थिति में पहले उन्हें नुकसान पहुंचे। बोट नदी की तेज धार में बहने लगी। तीन किलोमीटर दूर बहकर बोट अमवाखास में फंस गया। तब तक रात हो चुकी थी। लोगों की चीख-पुकार सुनकर अमवाखास के ग्रामीणों ने लोगों को बचाने का प्रयास शुरू किया। भोर तीन बजे तक उनलोगों ने किसी तरह 40 लोगों को बचा लिया।

इधर, सूचना पर कुशीनगर के डीएम-एसपी समेत पूरा प्रशासनिक अमला वहां पहुंच गया। गोरखपुर से 31 सदस्यी एनडीआरएफ की टीम बुलाई गई। भोर में तीन बजे एनडीआरएफ की टीम पहुंची। शेष बचे 112 लोगों को सुबह छह बजे तक सुरक्षित निकाल कर घर पहुंचा दिया गया। इसमें 21 महिलाएं और 19 बच्चे भी शामिल थे।

Input: live hindustan

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