करोड़ों के वित्तीय गड़बड़ी में फंसे मगध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद आखिरकार गुरुवार को पटना स्थित विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) के सामने पेश हुए। हालांकि अदालत से जुड़े जरूरी काम के चलते अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी को जाना पड़ा, लिहाजा पूछताछ का दौर लंबा नहीं चला। हालांकि डेढ़ घंटे में ही जो सवाल दागे गए उनमें कई के जवाब वह संतोषजनक नहीं दे पाए। बताया गया कि कड़ाके की ठंड के बावजूद सवालों से सामना होते ही उनको पसीने आ गए।

दोपहर 12 से 1.30 तक चली पूछताछ
एसवीयू के अधिकारियों के मुताबिक कुलपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद 11.30 से 12 बजे के बीच एसवीयू के कार्यालय पहुंचे। इसके बाद केस के आईओ डीएसपी सुधीर कुमार ने उनसे पूछताछ शुरू की। सबसे पहले मगध विवि के कुलपति रहते 30 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित सवाल दागे गए। ओएमआर शीट की खरीदारी समेत ई-लाइब्रेरी और अन्य मदों के किए गए भुगतान के बाबत उनसे पूछताछ हुई।

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जरूरत नहीं होने के बावजूद खरीदारी का आर्डर देने और बगैर जांच-पड़ताल के ही राशि का भुगतान करने को लेकर एक के बाद एक सवाल दागे गए। बताया गया कि इस दौरान वह अपनी सफाई देते दिखे पर उनके जवाब में न तो दम था, ना ही वह पूछताछ में शामिल अफसरों को जवाब से संतुष्ट कर पाए। करीब 1.45 बजे उन्हें जाने की इजाजत दी गई।

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घर से बरामद नगदी का स्रोत भी पूछा गया
एसवीयू के अधिकारियों के सवालों की फेहरिस्त में घर से बरामद 95 लाख नगद के अलावा 5 लाख के विदेशी करेंसी समेत अन्य जायदाद के स्रोत भी थे। सूत्रों के मुताबिक उनसे पूछा गया कि इतनी बड़ी नगद राशि कहां से और कैसे आई ? पिछले कुछ वर्षों में खरीदी गई अन्य संपत्तियों के स्रोत को भी जानने का प्रयास किया गया। बताया जाता है कि नगद राशि को वह अपना बताते रहे पर इसके स्रोत को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

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दोबारा होगी पूछताछ
एसवीयू के अफसरों के मुताबिक कुलपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। पूछताछ अभी पूरी नहीं हुई है। चूंकि केस के आईओ को अदालत से जुड़े जरूरी काम के सिलसिले में जाना पड़ा। इस वजह से पूछताछ डेढ़ घंटे ही चली। बताया जाता है कि गुरुवार की पूछताछ में उन्होंने जो जवाब दिए उसका विश्लेषण होगा, फिर दोबारा से पूछताछ के लिए उन्हें बुलाया जाएगा।

दूसरे नोटिस के बाद हुए हाजिर
विशेष निगरानी इकाई ने मगध विवि में 30 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने के बाद 17 नवंबर कुलपति के तीन ठिकानों पर छापेमारी की थी। तलाशी में गोरखपुर स्थित घर से 95 लाख कैश के अलावा विदेशी मुद्रा, कई जमीन-जायदाद के कागजात मिले थे। उन्हें जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए पहले 3 जनवरी को बुलाया गया था पर नहीं आए। इसके बाद उन्हें दूसरी नोटिस जारी करते हुए 20 जनवरी को पेश होने के लिए कहा गया था।

Source : Hindustan

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