आपदा के समय पशुओं और पशुपालकों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए सरकार ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी है। बाढ़ आने पर गाय-भैंस (बड़े पशु) के लिए छह किलो चारा और सहायता के रूप में 70 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे। छोटे पशुओं के लिए तीन किलो चारा और 35 रुपये की मदद दी जाएगी। भेड़-बकरी के लिए एक किलो चारा का वितरण किया जाएगा। पशुओं की मौत पर मुआवजा को लेकर भी सूची सभी जिलों को भेज दी गई है। दुधारू पशु जैसे गाय, भैंस की मौत पर 30 हजार रुपये मुआवजा का प्रविधान किया गया है। एक परिवार को अधिकतम तीन पशुओं के लिए ही मुआवजा मिलेगा।

शनिवार को बामेती सभागार में बिहार राज्य आपदा प्राधिकार के उपाध्यक्ष डा. उदय कांत मिश्र की अध्यक्षता में पशुपालन एवं मत्स्य निदेशालय के वरीय पदाधिकारियों की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें आपदा के समय पशुओं और पशुपालकों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जानकारी दी गई। अब आपदा की घड़ी में पशुपालकों को हर संभव सहायता के लिए सप्ताह भर के अंदर जिला स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।

बैल व घोड़ा के मौत पर 25 हजार
आपदा में बैल, घोड़ा और ऊंट की मौत पर 25 हजार दिए जाएंगे। इसमें एक परिवार के लिए अधिकतम तीन पशुओं के लिए ही अनुदान दिया जाएगा। पाल्ट्री के एक पक्षी की मौत पर 50 रुपये की दर से 5000 रुपये की मदद मिलेगी।

मछुआरों को भी आपदा में होगी सहायता
सरकार बाढ़ से मछुआरों को होने वाले नुकसान का भी भरपाई करेगी। नाव को आंशिक नुकसान पहुंचता है, तो मरम्मत के लिए 4100 रुपये, पूरी तरह से क्षतिग्रस्त नाव के लिए 9600 रुपये दिए जाएंगे। यदि जाल पूरी तरह नष्ट हो जाता है तो 2600 रुपये अनुदान का प्रविधान किया गया है। मत्स्य बीज फार्म के लिए 8200 प्रति हेक्टेयर इनपुट सब्सिडी दी जाएगी। मछली फार्म पुर्नस्थापन व मरम्मत के लिए 12 हजार 200 प्रति हेक्टेयर अनुदान का प्रविधान है।
Source : Dainik Jagran








