प्रदेश में नीति आयोग  की रिपोर्ट पर फिर एक बार सियासत तेज है. विकास के मामले में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाने की वजह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. हालांकि, अब सत्ता पक्ष के नेता बचाव में उतर गए हैं. इसी क्रम में शुक्रवार को बिहार के शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने नीति आयोग के रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि नीति आयोग के काम करने का तरीका ही अव्यावहारिक और अप्रासंगिक है. हम लोग नीति आयोग के सामने अपना पक्ष रखेंगे. हम उम्मीद रखते हैं कि हमारे पहले के लिखे गए पत्र पर विचार करना चाहिए.

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संतुलित पैमाना बनाए नीति आयोग

नीति आयोग की रिपोर्ट पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि आयोग के विकास मापने का पैमाना ही अव्यावहारिक व अवास्तविक है. विकसित और विकासशील प्रदेशों का विकास दर या विकास की जर्नी एक ही पैमाने से नापते हैं तो ये तरीका बिल्कुल गलत है. ये तो एक तरह से अपने संसाधनों के बूते जोर लगाकर विकास कर रहे राज्यों को हतोत्साहित करने जैसा है. नीति आयोग पहले एक संतुलित पैमाना बनाए कि जो विकसित प्रदेश होंगे, उनकी जो गति और संसाधन होंगे, वो विकासशील राज्यों से अलग होंगे. बिहार जैसा गरीब प्रदेश कैसे उनसे प्रतिस्पर्धा कर सकता है. ये नीति आयोग को समझना होगा.

बिहार की 51.91 प्रतिशत जनसंख्या गरीब

बता दें कि हाल ही में जारी नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक के अनुसार, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश भारत के सबसे गरीब राज्यों आंके गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, बिहार की 51.91 प्रतिशत जनसंख्या गरीब है, झारखंड में 42.16 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 37.79 प्रतिशत लोग गरीब हैं. जबकि रिपोर्ट में मध्य प्रदेश 36.65 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर रखा गया है, जबकि मेघालय (32.67 प्रतिशत) पांचवें स्थान पर है.

Source : ABP News

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