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IPS विकास वैभव की पहल : गौरवशाली अतीत को वापस लाने का प्रयास “Let’s Inspire Bihar”

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“Let’s Inspire Bihar !” या “आईए, मिलकर प्रेरित करें बिहार !” क्या है ?

“राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका” तथा “सफलता के सूत्रों” समेत अनेक विषयों पर भौतिक समेत डिजिटल माध्यमों से लंबे समय से बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं से वार्ता करता रहा हूँ जिसके विवरण सोशल मीडिया पर भी समय-समय पर साझा करता रहा हूँ। इस #बिहार_दिवस पर जब अपनी अवधारणा को और स्पष्ट करते हुए मैंने आह्वान स्वरूप “Let’s Inspire Bihar !” शीर्षक का प्रयोग एक हैशटैग #letsinspirebihar के साथ किया, तब से ही अनेक युवा साथी इसके संदर्भ में अपनी जिज्ञासाओं को व्यक्त करते रहे हैं । अतः आज इसके संदर्भ में आवश्यक विवरण आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।

lets-inspire-bihar

#letsinspirebihar क्या है, यह जानने के पूर्व सर्वप्रथम आप स्वयं से यह प्रश्न करें कि क्या आप मानते हैं कि संपूर्ण भारतवर्ष के उज्ज्वलतम भविष्य की प्रबल संभावनाएं कहीं न कहीं उसी भूमि में समाहित हो सकती हैं जिसने इतिहास के एक कालखंड में संपूर्ण अखंड भारत के साम्राज्य का नेतृत्व किया था और वह भी तब जब न आज की भांति संचार के माध्यम थे, न विकसित मार्ग और न प्रौद्योगिकी !

IPS विकास वैभव

आप स्वयं से यह प्रश्न करें कि क्या हमें यह स्मरण नहीं है कि बिहार ही #ज्ञान की वह भूमि है जहाँ वेदों ने भी वेदांत रूपी उत्कर्ष को प्राप्त किया तथा ज्ञान के प्राचीन बौद्धिक परंपरा की जब अभिवृद्धि हुई तब इसी भूमि ने बौद्ध और जैन धर्मों के दर्शन सहित अनेक तत्वों एवं सिद्धांतों के जन्म के साथ नालंदा एवं विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों की स्थापना देखी। जहाँ ज्ञान की ऐसी अद्भुत प्रेरणा रही, वहाँ #शौर्य का परिलक्षित होना भी स्वाभाविक ही था और इसी कारण इतिहास स्वयं साक्षी है कि कभी बिहार से ही संपूर्ण अखंड भारत का शासन संचालित था और वह भी सशक्त एवं प्रबल रूप में। #उद्मिता की इस प्राचीन भूमि ने ही ऐतिहासिक काल में ऐसी प्रेरणा का संचार किया जिसके कारण दक्षिण पूर्वी ऐशिया के नगरों तथा यहाँ तक कि राष्ट्रों का भी नामकरण भी इसी भूमि के प्रेरणादायक नगरों के नामों पर होने लगे जिसका सबसे सशक्त उदाहरण वियतनाम है जो चंपा (वर्तमान भागलपुर, बिहार) के ही नाम से लगभग 1500 वर्षों तक संपूर्ण विश्व में जाना गया।

यदि ऐसे प्रश्नों का उत्तर स्वीकारोत्मक है, तो बस विचार कीजिए कि वैसे सामर्थ्यवान यशस्वी पूर्वजों के ही हम वंशज क्या वर्तमान में भारत के उज्ज्वलतम भविष्य के निमित्त अपना सर्वाधिक सकारात्मक योगदान समर्पित कर पा रहे हैं ?

लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में भारत में रहे यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपने ग्रंथ इंडिका में तत्कालीन पाटलिपुत्र को उस समय के विश्व के सर्वश्रेष्ठ नगरों की श्रेणी में वर्णित किया था। आप कल्पना कीजिए कि यदि उस समय किसी पाटलिपुत्र निवासी से 2500 वर्ष पश्चात पाटलिपुत्र के स्वरूप के संबंध में पूछा जाता तो भला किस प्रकार के आशान्वित उत्तर मिले रहते और क्यों वह स्वाभाविक भी प्रतीत होते। परंतु वर्तमान परिदृश्य में जब भी भविष्यात्मक संभावनाओं के विषयों में बिहार के युवाओं से वार्ता होती है, जैसे मेरे साथ भी जब स्वामी विवेकानंद जयंती पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ में तथा अनेक अन्य अवसरों पर वार्ता हुई, तब ऐसी अनुभूति क्यों होती है कि कहीं न कहीं सर्वत्र एक प्रकार की निराशा व्याप्त हो रही है और वर्तमान एवं भविष्य के संबंध में नकारात्मक विचारों की स्थापना भी युवाओं के मध्य हो रही है जो भारत के उज्ज्वलतम भविष्य हेतु सर्वथा अनुचित है। जिस भूमि ने प्राचीनतम काल में ही ऐसे कीर्तिमानों को प्राप्त किया था, यदि उनकी स्वाभाविक प्राकृतिक अभिवृद्धि भी हुई रहती तो निश्चित ही वर्तमान का स्वरूप अत्यंत भिन्न रहता और निश्चित ही यदि भविष्य की संभावनाओं के संबंध में वर्तमान में प्रश्न किए जाते तो उनके उत्तरों में समाहित आशावादिता के भावों में कोई कमी नहीं रही होती। कालांतर में ऐसा क्या होता गया जिसके कारण जो आशावादिता उस काल में स्पष्टता के साथ परिलक्षित होती थी, वह आज के युवाओं से यत्न सहित प्रश्न करने पर भी दर्शित नहीं होती ? आखिर ऐसा क्यों है कि जिस क्षेत्र में कभी संपूर्ण विश्व के विद्वान अध्ययन हेतु दुर्गम मार्गों से सुदूर यात्राएं कर पहुँचने हेतु लालायित रहते थे, वहीं के विद्यार्थी आज परिश्रम एवं पुरुषार्थ के मार्गों से कई अवसरों पर विच्छिन्न प्रतीत होते दिखते हैं तथा अधिकांशतः अन्य क्षेत्रों में अध्ययन एवं जीवनयापन हेतु प्रयासरत रहते हैं ?

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व्याप्त हो रही संभावित निराशा के प्रतिकार हेतु यह चिंतन करना आवश्यक होगा कि स्वाभाविक उत्कर्ष की प्राकृतिक परंपरा किन कारणों से बाधित हुई और जैसी कल्पना कभी रही होगी, वैसा संभव क्यों नहीं हो सका ! ऐतिहासिक भूमि के स्वाभाविक प्राकृतिक विकास की परंपरा से अत्यंत भिन्न ऐसी अप्राकृतिक वर्तमान परिस्थितियों के प्रादुर्भाव के कारणों पर चिंतन करने से ही समाधान मिलेंगे चूंकि भूमि वही है, उर्जा भी वही है और इसमें भला कहाँ संदेह है कि हम उन्हीं यशस्वी पूर्वजों के वंशज हैं जिनकी प्रेरणा आज भी मन को उद्वेलित करती है और कहती है कि यदि संकल्प सुदृढ़ हो तो इच्छित परिवर्तन अपने माध्यम स्वतः तय कर लेते हैं।

यदि हम इतिहास में प्राप्त उत्कर्ष के कारणों पर चिंतन करेंगे तो पाएंगे कि हमारे पूर्वजों की सोच अत्यंत बृहत् थी जो लघुवादों से विभिन्न थी। उर्जा के साथ जिज्ञासा तो हमारे पूर्वजों की ऐसी थी जो सामान्य भौतिक ज्ञान से संतुष्ट होने वाली नहीं थी तथा सत्य के वास्तविक स्वरूप को जानना चाहती थी जिसके कारण ज्ञान परंपरा के उत्कर्ष को समाहित किए उपनिषदों की दृष्टि संभव हो सकी। यदि भूमि के ऐतिहासिक शौर्य के कारणों पर हम चिंतन करें तो वहाँ भी बृहत्ता के लक्षण तब स्पष्ट होते हैं जब हम महाजनपदों के उदय के क्रम में पाटलिपुत्र में महापद्मनंद के राज्यारोहण का स्मरण करते हैं चूंकि जिस काल में अन्य जनपदों में जहाँ पूर्व से स्थापित शाशक वर्ग के अतिरिक्त किसी अन्य वर्ग से सम्बद्ध शासक की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, मगध में केवल सामर्थ्य को ही कुशल शासकों हेतु उपयुक्त लक्षणों के रूप में स्वीकृति प्राप्त हुई थी। ऐसे चिंतन के कारण ही मगध का सबसे शक्तिशाली महाजनपद के रूप में उदय हुआ जिसने कालांतर में साम्राज्य का रूप ग्रहण कर लिया। उत्कृष्ट चिंतन के कारण जहाँ राजतंत्र के रूप में मगध का उदय हुआ, वहीं वैशाली में गणतंत्र की स्थापना भी हुई। यदि कालांतर में ऐसे शौर्य का क्षय हुआ तो उसके कारण शस्त्र और शास्त्र में समन्वय का अभाव ही रहा चूंकि इतिहास स्वयं साक्षी रहा है कि भले ही शास्त्रीय ज्ञान अपने चरम उत्कर्ष पर क्यों न हो, यदि शस्त्रों के सामर्थ्य में कमी आती है तो उत्कृष्ट शास्त्र भी नष्ट हो जाते हैं।

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यदि कालांतर में हमारा अपेक्षाकृत विकास नहीं हुआ और यदि हम पूर्व का स्मरण करते हुए वर्तमान में वैसा तारतम्य अनुभव नहीं करते तो इसका कारण कहीं न कहीं समय के साथ लघुवादों अथवा अतिवादों से ग्रसित होना ही रहा है अन्यथा जिस भूमि ने इतिहास के उस काल में कभी महापद्मनंद को शाशक के रूप में सहर्ष स्वीकार जन्म विशेष के लिए नहीं परंतु उनकी क्षमताओं पर विचारण के उपरांत किया था, उसके उज्ज्वलतम भविष्य में भला संदेह कहाँ था।

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यदि वर्तमान में हम विकास में अन्य क्षेत्रों से कहीं पिछड़े हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वलतम देखना चाहते हैं तो आवश्यकता केवल और केवल अपने उन यशस्वी पूर्वजों का स्मरण करते हुए लघुवादों यथा जातिवाद, संप्रदायवाद इत्यादि से उपर उठकर राज्य एवं राष्ट्रहित में बृहतर चिंतन के साथ भविष्यात्मक दृष्टिकोण को मन में स्थापित करते हुए निज सामर्थ्यानुसार आंशिक ही सही परंतु निस्वार्थ सामाजिक योगदान अवश्य समर्पित करना होगा। आवश्यकता एक वैचारिक क्रांति की है जो युवाओं के मध्य प्रसारित हो और जो भविष्य निर्माण के निमित्त संगठित रूप में संकल्पित करे। परिवर्तन ही ऋत है ! आवश्यकता आशावादिता के साथ आगे बढ़ने की है। जिस भूमि ने वैदिक काल से ही गार्गी वाचक्नवी एवं मैत्रेयी जैसी विदुषियों को नारी में भी समाहित विद्वता का प्रतिनिधित्व करते देखा हो, उसका भविष्य भला उज्ज्वलतम क्यों न हो।

अब यदि इस पर चर्चा करें कि “Let’s Inspire Bihar !” के अंतर्गत हम मिलकर किस प्रकार की गतिविधियां कर सकते हैं अथवा किन बिंदुओं पर चिंतन कर सकते हैं, तो इस संदर्भ में भी विचारों को और स्पष्ट करने का प्रयास करता हूँ। जो प्रेरित युवा इस अभियान से जुड़ना चाहते है, वह उपरोक्त बातों तथा निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार कर सकते हैं :-

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1. अपनी समृद्ध विरासत तथा स्वयं की क्षमता को जानिए एवं समझिए।

2. मानवीय क्षमता के चरमोत्कर्ष की चर्चा करते हुए मैंने उपनिषदों के अत्यंत प्रेरणादायक एवं महत्वपूर्ण श्लोक

“ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।

पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवा वसिष्यते ।।”

को अनेक अवसरों पर उद्धृत किया है जिसमें यह वर्णन मिलता है कि पूर्ण को खंडित करने पर भी हर खंड पूर्ण ही रहता है और पुनः पूर्ण में ही विलीन हो जाता है; अर्थात् हर आत्मा जो परमात्मा का ही अंशरूप है उसमें उसके सभी गुण समाहित हैं। ऐसे में युवा मन में अपने सामर्थ्य के प्रति किसी प्रकार का संदेह न हो इसके लिए यह अनुभूति आवश्यक है कि ईश्वर (पूर्ण) की वह असीम शक्ति सभी के अंदर पूर्णतः समाहित है और सदैव सही मार्गदर्शन हेतु तत्त्पर भी है। ऐसे में कहीं और न देखकर यदि हम एकाग्रचित्त होकर गहन आत्मचिंतन करेंगे तो सभी के लिए स्वयं मार्गदर्शक तथा इच्छित परिवर्तन के प्रबल वाहक बन जाऐंगे।

3. यह समझना होगा कि स्वयं के सामर्थ्य को जाने बिना जब कई बार दूसरों के अनुसरण के कारण हम अपने मूल्यों से दिग्भ्रमित हो जाते हैं, तब हमारा अपनी मूल क्षमताओं से विश्वास डिग जाता है, जो सर्वथा अनुचित है।

4. यह समझना होगा कि यदि हम प्रतिकूल परिस्थितियों के समक्ष निराश होते हैं तो हम युवावस्था में समाहित उस असीम उर्जा के स्रोत से संभवतः स्वतः विच्छिन्न होते जाते हैं जिसके मूल में आशावादिता एवं सकारात्मकता सन्निहित है।

5. यदि अपने पूर्वजों के कृतित्वों से आप प्रेरित हैं और स्वयं की असीमित क्षमताओं के विषय में स्पष्ट हैं तो केवल स्वयं तक सीमित मत रहिए, इस अद्भुत प्रेरणा का प्रसार कीजिए।

6. लघुवादों यथा जातिवाद, संप्रदायवाद, लिंगभेद आदि संकीर्णताओं से परे उठकर बिहार तथा भारत के उज्ज्वलतम भविष्य के निर्माण हेतु बृहत् चिंतन करें तथा दूसरों को भी प्रेरित करें।

7. प्रेरित युवा संगठित होने का प्रयास करें जिससे नकारात्मकता के विरुद्ध युद्ध हेतु संकल्पित सकारात्मक विचारों की शक्ति प्रबल हो उठे। संगठन को बृहत् स्वरूप प्रदान करने हेतु “Let’s Inspire Bihar” के जिलावार चैप्टरों से सोशल मीडिया एवं भौतिक माध्यमों से जुड़ें जिनकी स्थापना आपके जिले के प्रेरित युवा समन्वयकर्ताओं द्वारा की जा रही है। बिहार के सभी जिलों के युवाओं और अप्रवासी बिहारवासियों के लिए भी प्रारंभ में सोशल मीडिया के माध्यमों ही चैप्टरों को प्रारंभ किया जा रहा है जिनसे जुड़ने के लिए आप अपने जिले या नगर से संबंधित फेसबुक पेज से जुड़ सकते हैं अथवा letsinspirebihar@gmail.com पर अपने नाम, उम्र, जिला का नाम और दूरभाष संख्या के साथ इमेल कर सकते हैं ताकि आपके क्षेत्र से संबंधित समन्वयकर्ता आपसे संपर्क स्थापित कर सकें।

8. प्रेरित युवाओं के साथ अपने व्यस्त समय में से कुछ समय सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों के निमित्त चिंतन एवं योगदान हेतु भी समर्पित करें। मुख्य उद्देश्य #3Es यथा #शिक्षा (#Education), #समता (#Egalitarianism) एवं #उद्यमिता (#Entrepreneurship) के ऐतिहासिक भावों को पुनः जागृत करने की है।

9. जो लघुवादों से ग्रसित हैं तथा दिग्भ्रमित हो रहे हैं उनके मार्गदर्शन हेतु अपने स्तर से भी प्रयास करें । उन्हें समझाने का प्रयास करें कि यदि व्यक्ति अपने वास्तविक सामर्थ्य को जान ले तथा सफलता प्राप्त करने के निमित्त अत्यंत परिश्रम करे तो कोई भी लक्ष्य असाध्य नहीं रह जाता। मिलकर, हम निश्चित ही राष्ट्रहित में अपने जीवन काल में कुछ उत्कृष्ट योगदान समर्पित कर सकते हैं।

10. सकारात्मकता विचारों एवं प्रेरणादायक उदाहरणों को सोशल मीडिया पर #letsinspirebihar हैशटैग के साथ साझा करें।

भविष्य परिवर्तन के निमित्त युवाओं द्वारा संकल्पित सकारात्मक चिंतन एवं योगदान ही उज्ज्वलतम भविष्य की दिशा स्थापित करने का एकमात्र विकल्प है। इतिहास की प्रेरणा में ऐसी अद्भुत शक्ति समाहित है जो बिहार समेत संपूर्ण भारतवर्ष के भविष्य को परिवर्तित करने की क्षमता रखती है। मन भविष्यात्मक दृष्टिकोण के निमित्त विशेषकर युवाओ से स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से आह्वान करना चाहता है –

“पूर्व प्रेरणा करे पुकार, आओ मिलकर गढ़ें नव बिहार।

नव चिंतन नव हो व्यवहार, लघु वादों से मुक्त हो संसार।

ज्ञान परंपरा का विस्तार, दीर्घ प्रभाव का सतत् प्रसार।

बृहतर चिंतन सह मूल्यों पर, आधारित युवा करें विचार।”

(विकास वैभव)

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त्योहारों पर आना है बिहार, तो लानी होगी 72 घंटे पूर्व की RT-PCR नेगेटिव जांच रिपोर्ट

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बिहार सरकार ने आगामी त्योहारों को देखते हुए बड़ा निर्णय लिया है. दुर्गा पूजा (दशहरा), दीपावली और छठ पर्व पर देश भर से बड़ी संख्या में बिहार आने वाले लोगों को अपने साथ 72 घंटे पहले कराई RT-PCR नेगेटिव जांच रिपोर्ट लानी होगी. दरअसल देश के कई राज्यों में एक बार फिर कोरोना संक्रमण तेजी से सिर उठा रहा है. साथ ही कोरोना के डेल्टा प्लस वेरीअंट का खतरा भी सामने आ रहा है. इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि जिन राज्यों में कोरोना संक्रमण के ज्यादा मामले और डेल्टा प्लस वेरीअंट सामने आ रहे हैं वहां से बिहार आने वालों को अपने साथ 72 घंटे पहले कराई RT-PCR नेगेटिव जांच रिपोर्ट लानी होगी.

सरकार ने यह निर्णय उन लोगों के लिए लिया है जो हवाई जहाज, ट्रेन, बस या अन्य वाहनों से राज्य में प्रवेश करेंगे, उन सभी को अपने साथ 72 घंटे पहले का RT-PCR नेगेटिव जांच रिपोर्ट साथ रखना होगा. यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी जांच बिहार की सीमा में प्रवेश करने पर हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन पर की जाएगी. ऐसे सभी लोग जो बिहार आएंगे और उनके पास RT-PCR नेगेटिव जांच रिपोर्ट नहीं होगी तो उनका रैपिड एंटीजन टेस्ट (RAT) किया जाएगा.

क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में नीतीश सरकार ने यह निर्णय लिया है. सरकार का मानना है कि त्योहारों के दौरान लाखों की संख्या में अन्य राज्यों से लोग बिहार आते हैं इसलिए 26 सितंबर से लेकर 15 नवंबर तक यह नियम बिहार में लागू रहेगा.

Source : News18

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मुजफ्फरपुर- एन. सी.सी कैडेट्स को दिया गया सेना में शामिल होने का गुरुमंत्र

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सेना भर्ती कार्यालय के निदेशक सेना मेडल कर्नल बॉबी जयसरोटिया ने शनिवार को एनसीसी कैडेट्स को सेना में शामिल होने का टिप्स दिया।

एलएस कॉलेज के ऑडोटोरियम में उन्होंने 32- बिहार बटालियन से सम्बंधित 300 से अधिक एनसीसी कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि सेना में शामिल होने के लिए एनसीसी कोडेट्स के पास सुनहरा अवसर होता है। सेना के सभी विंग में एनसीसी सर्टिफिकेट धारी को विशेष छूट मिलता है।

उन्होंने गर्ल्स कैडेट्स को महिला मिलिट्री फोर्स में भर्ती होने की प्रक्रिया से अवगत कराया। कर्नल जसरोटिया ने कहा कि सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने का अगर आप सभी के अंदर जनून है, तो अपनी काबिलियत पर भरोसा रखें। किसी तरह के बिचौलियों के चक्कर मे न पड़े। आपकी काबिलियत ही सेना में चयन का रास्ता खोलेंगी।एनसीसी कैम्प का अनुशासन आपको सेना में भर्ती होने में मदद करेगी।कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कैडेट्स के सवालों का भी जवाब दिया।

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मुजफ्फरपुर में सार्वजनिक स्थानों पर तम्बाकू सेवन करने वालों को पकड़े जाने पर भरना होगा जुर्माना

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मुजफ्फरपुर : जिले में तम्बाकू नियंत्रण हेतु जिला पदाधिकारी द्वारा गठित त्रिस्तरीय छापामार दस्ते को तम्बाकू नियंत्रण के गुर सिखाने के लिए राज्य सरकार की तकनीकी सहयोगी संस्थान सोशियो इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी (सीड्स) और जिला तम्बाकू नियंत्रण कोषांग के संयुक्त तत्वावधान में आज उप विकास आयुक्त श्री आषुतोष ‌ द्विवेदी की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार मे उन्मुखीकरण सह प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।

उप विकास आयुक्त ने बताया कि तम्बाकू के दुष्परिणामों से बच्चों और अवयस्कों को बचाना बहुत आवश्यक है। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि स्कूलों में इस कार्यक्रम का संचालन किया जाय। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को अपने अपने कार्यक्षेत्रों में कोटपा 2003 के विभिन्न धराओं का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उप विकास आयुक्त ने तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी डॉ0 शिवशंकर को निर्देश दिया कि कोटपा की घारा 4 के अनुपालन हेतु इसके बोर्ड का दिवार लेखन करवाया जाय । शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे से अविलंब दुकान हटवाने का निर्देश दिया गया।

सीड्स के कार्यपालक निदेशक श्री दीपक मिश्रा ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से तम्बाकू नियंत्रण के कानून कोटपा 2003 के प्रावधानो एवं चलानींग प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। श्री मिश्रा ने बिहार के विभिन्न जिलों में अब तक किये गए गतिविधियों की जानकारी दी।

विदित हो कि विश्व स्वास्थ्य संघठन और भारत सरकार द्वारा प्रकाशित GATS 2 के सर्वे में बिहार में तम्बाकू सेवन करने वालों में काफी हद तक कमी आई है, यह आंकड़ा 53.5% से घट कर 25.9% हो गया है।

कार्यक्रम के आरंभ में तम्बाकू नियंत्रण के जिला नोडल अधिकारी डॉक्टर शिव शंकर ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और जिले में अब तक किए गए गतिविधियों के बारे में बताया। अंत में जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रमोद कुमार वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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उक्त कार्यशाला में डीपीआरओ कमल‌ सिंह, सीड्स के कार्यक्रम पदाधिकारी सुनील कुमार चौधरी, मनोज कुमार झा, डी पी एम वी पी वमां, एनसीडी सेल के जिला वित्तीय सह लाजिस्टिक सहलाकर प्रिंस कुमार, सदर अस्पताल के अधीक्षक, जिला तम्बाकू नियंत्रण कोषांग के नोडल पदाधिकारी सहित सभी छापामार दस्ता के सदस्यों एवं सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं थाना प्रभारियों ने हिस्सा लिया।

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