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IPS विकास वैभव की पहल : गौरवशाली अतीत को वापस लाने का प्रयास “Let’s Inspire Bihar”

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“Let’s Inspire Bihar !” या “आईए, मिलकर प्रेरित करें बिहार !” क्या है ?

“राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका” तथा “सफलता के सूत्रों” समेत अनेक विषयों पर भौतिक समेत डिजिटल माध्यमों से लंबे समय से बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं से वार्ता करता रहा हूँ जिसके विवरण सोशल मीडिया पर भी समय-समय पर साझा करता रहा हूँ। इस #बिहार_दिवस पर जब अपनी अवधारणा को और स्पष्ट करते हुए मैंने आह्वान स्वरूप “Let’s Inspire Bihar !” शीर्षक का प्रयोग एक हैशटैग #letsinspirebihar के साथ किया, तब से ही अनेक युवा साथी इसके संदर्भ में अपनी जिज्ञासाओं को व्यक्त करते रहे हैं । अतः आज इसके संदर्भ में आवश्यक विवरण आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।

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#letsinspirebihar क्या है, यह जानने के पूर्व सर्वप्रथम आप स्वयं से यह प्रश्न करें कि क्या आप मानते हैं कि संपूर्ण भारतवर्ष के उज्ज्वलतम भविष्य की प्रबल संभावनाएं कहीं न कहीं उसी भूमि में समाहित हो सकती हैं जिसने इतिहास के एक कालखंड में संपूर्ण अखंड भारत के साम्राज्य का नेतृत्व किया था और वह भी तब जब न आज की भांति संचार के माध्यम थे, न विकसित मार्ग और न प्रौद्योगिकी !

IPS विकास वैभव

आप स्वयं से यह प्रश्न करें कि क्या हमें यह स्मरण नहीं है कि बिहार ही #ज्ञान की वह भूमि है जहाँ वेदों ने भी वेदांत रूपी उत्कर्ष को प्राप्त किया तथा ज्ञान के प्राचीन बौद्धिक परंपरा की जब अभिवृद्धि हुई तब इसी भूमि ने बौद्ध और जैन धर्मों के दर्शन सहित अनेक तत्वों एवं सिद्धांतों के जन्म के साथ नालंदा एवं विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों की स्थापना देखी। जहाँ ज्ञान की ऐसी अद्भुत प्रेरणा रही, वहाँ #शौर्य का परिलक्षित होना भी स्वाभाविक ही था और इसी कारण इतिहास स्वयं साक्षी है कि कभी बिहार से ही संपूर्ण अखंड भारत का शासन संचालित था और वह भी सशक्त एवं प्रबल रूप में। #उद्मिता की इस प्राचीन भूमि ने ही ऐतिहासिक काल में ऐसी प्रेरणा का संचार किया जिसके कारण दक्षिण पूर्वी ऐशिया के नगरों तथा यहाँ तक कि राष्ट्रों का भी नामकरण भी इसी भूमि के प्रेरणादायक नगरों के नामों पर होने लगे जिसका सबसे सशक्त उदाहरण वियतनाम है जो चंपा (वर्तमान भागलपुर, बिहार) के ही नाम से लगभग 1500 वर्षों तक संपूर्ण विश्व में जाना गया।

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यदि ऐसे प्रश्नों का उत्तर स्वीकारोत्मक है, तो बस विचार कीजिए कि वैसे सामर्थ्यवान यशस्वी पूर्वजों के ही हम वंशज क्या वर्तमान में भारत के उज्ज्वलतम भविष्य के निमित्त अपना सर्वाधिक सकारात्मक योगदान समर्पित कर पा रहे हैं ?

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लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में भारत में रहे यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपने ग्रंथ इंडिका में तत्कालीन पाटलिपुत्र को उस समय के विश्व के सर्वश्रेष्ठ नगरों की श्रेणी में वर्णित किया था। आप कल्पना कीजिए कि यदि उस समय किसी पाटलिपुत्र निवासी से 2500 वर्ष पश्चात पाटलिपुत्र के स्वरूप के संबंध में पूछा जाता तो भला किस प्रकार के आशान्वित उत्तर मिले रहते और क्यों वह स्वाभाविक भी प्रतीत होते। परंतु वर्तमान परिदृश्य में जब भी भविष्यात्मक संभावनाओं के विषयों में बिहार के युवाओं से वार्ता होती है, जैसे मेरे साथ भी जब स्वामी विवेकानंद जयंती पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ में तथा अनेक अन्य अवसरों पर वार्ता हुई, तब ऐसी अनुभूति क्यों होती है कि कहीं न कहीं सर्वत्र एक प्रकार की निराशा व्याप्त हो रही है और वर्तमान एवं भविष्य के संबंध में नकारात्मक विचारों की स्थापना भी युवाओं के मध्य हो रही है जो भारत के उज्ज्वलतम भविष्य हेतु सर्वथा अनुचित है। जिस भूमि ने प्राचीनतम काल में ही ऐसे कीर्तिमानों को प्राप्त किया था, यदि उनकी स्वाभाविक प्राकृतिक अभिवृद्धि भी हुई रहती तो निश्चित ही वर्तमान का स्वरूप अत्यंत भिन्न रहता और निश्चित ही यदि भविष्य की संभावनाओं के संबंध में वर्तमान में प्रश्न किए जाते तो उनके उत्तरों में समाहित आशावादिता के भावों में कोई कमी नहीं रही होती। कालांतर में ऐसा क्या होता गया जिसके कारण जो आशावादिता उस काल में स्पष्टता के साथ परिलक्षित होती थी, वह आज के युवाओं से यत्न सहित प्रश्न करने पर भी दर्शित नहीं होती ? आखिर ऐसा क्यों है कि जिस क्षेत्र में कभी संपूर्ण विश्व के विद्वान अध्ययन हेतु दुर्गम मार्गों से सुदूर यात्राएं कर पहुँचने हेतु लालायित रहते थे, वहीं के विद्यार्थी आज परिश्रम एवं पुरुषार्थ के मार्गों से कई अवसरों पर विच्छिन्न प्रतीत होते दिखते हैं तथा अधिकांशतः अन्य क्षेत्रों में अध्ययन एवं जीवनयापन हेतु प्रयासरत रहते हैं ?

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व्याप्त हो रही संभावित निराशा के प्रतिकार हेतु यह चिंतन करना आवश्यक होगा कि स्वाभाविक उत्कर्ष की प्राकृतिक परंपरा किन कारणों से बाधित हुई और जैसी कल्पना कभी रही होगी, वैसा संभव क्यों नहीं हो सका ! ऐतिहासिक भूमि के स्वाभाविक प्राकृतिक विकास की परंपरा से अत्यंत भिन्न ऐसी अप्राकृतिक वर्तमान परिस्थितियों के प्रादुर्भाव के कारणों पर चिंतन करने से ही समाधान मिलेंगे चूंकि भूमि वही है, उर्जा भी वही है और इसमें भला कहाँ संदेह है कि हम उन्हीं यशस्वी पूर्वजों के वंशज हैं जिनकी प्रेरणा आज भी मन को उद्वेलित करती है और कहती है कि यदि संकल्प सुदृढ़ हो तो इच्छित परिवर्तन अपने माध्यम स्वतः तय कर लेते हैं।

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यदि हम इतिहास में प्राप्त उत्कर्ष के कारणों पर चिंतन करेंगे तो पाएंगे कि हमारे पूर्वजों की सोच अत्यंत बृहत् थी जो लघुवादों से विभिन्न थी। उर्जा के साथ जिज्ञासा तो हमारे पूर्वजों की ऐसी थी जो सामान्य भौतिक ज्ञान से संतुष्ट होने वाली नहीं थी तथा सत्य के वास्तविक स्वरूप को जानना चाहती थी जिसके कारण ज्ञान परंपरा के उत्कर्ष को समाहित किए उपनिषदों की दृष्टि संभव हो सकी। यदि भूमि के ऐतिहासिक शौर्य के कारणों पर हम चिंतन करें तो वहाँ भी बृहत्ता के लक्षण तब स्पष्ट होते हैं जब हम महाजनपदों के उदय के क्रम में पाटलिपुत्र में महापद्मनंद के राज्यारोहण का स्मरण करते हैं चूंकि जिस काल में अन्य जनपदों में जहाँ पूर्व से स्थापित शाशक वर्ग के अतिरिक्त किसी अन्य वर्ग से सम्बद्ध शासक की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, मगध में केवल सामर्थ्य को ही कुशल शासकों हेतु उपयुक्त लक्षणों के रूप में स्वीकृति प्राप्त हुई थी। ऐसे चिंतन के कारण ही मगध का सबसे शक्तिशाली महाजनपद के रूप में उदय हुआ जिसने कालांतर में साम्राज्य का रूप ग्रहण कर लिया। उत्कृष्ट चिंतन के कारण जहाँ राजतंत्र के रूप में मगध का उदय हुआ, वहीं वैशाली में गणतंत्र की स्थापना भी हुई। यदि कालांतर में ऐसे शौर्य का क्षय हुआ तो उसके कारण शस्त्र और शास्त्र में समन्वय का अभाव ही रहा चूंकि इतिहास स्वयं साक्षी रहा है कि भले ही शास्त्रीय ज्ञान अपने चरम उत्कर्ष पर क्यों न हो, यदि शस्त्रों के सामर्थ्य में कमी आती है तो उत्कृष्ट शास्त्र भी नष्ट हो जाते हैं।

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यदि कालांतर में हमारा अपेक्षाकृत विकास नहीं हुआ और यदि हम पूर्व का स्मरण करते हुए वर्तमान में वैसा तारतम्य अनुभव नहीं करते तो इसका कारण कहीं न कहीं समय के साथ लघुवादों अथवा अतिवादों से ग्रसित होना ही रहा है अन्यथा जिस भूमि ने इतिहास के उस काल में कभी महापद्मनंद को शाशक के रूप में सहर्ष स्वीकार जन्म विशेष के लिए नहीं परंतु उनकी क्षमताओं पर विचारण के उपरांत किया था, उसके उज्ज्वलतम भविष्य में भला संदेह कहाँ था।

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यदि वर्तमान में हम विकास में अन्य क्षेत्रों से कहीं पिछड़े हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वलतम देखना चाहते हैं तो आवश्यकता केवल और केवल अपने उन यशस्वी पूर्वजों का स्मरण करते हुए लघुवादों यथा जातिवाद, संप्रदायवाद इत्यादि से उपर उठकर राज्य एवं राष्ट्रहित में बृहतर चिंतन के साथ भविष्यात्मक दृष्टिकोण को मन में स्थापित करते हुए निज सामर्थ्यानुसार आंशिक ही सही परंतु निस्वार्थ सामाजिक योगदान अवश्य समर्पित करना होगा। आवश्यकता एक वैचारिक क्रांति की है जो युवाओं के मध्य प्रसारित हो और जो भविष्य निर्माण के निमित्त संगठित रूप में संकल्पित करे। परिवर्तन ही ऋत है ! आवश्यकता आशावादिता के साथ आगे बढ़ने की है। जिस भूमि ने वैदिक काल से ही गार्गी वाचक्नवी एवं मैत्रेयी जैसी विदुषियों को नारी में भी समाहित विद्वता का प्रतिनिधित्व करते देखा हो, उसका भविष्य भला उज्ज्वलतम क्यों न हो।

अब यदि इस पर चर्चा करें कि “Let’s Inspire Bihar !” के अंतर्गत हम मिलकर किस प्रकार की गतिविधियां कर सकते हैं अथवा किन बिंदुओं पर चिंतन कर सकते हैं, तो इस संदर्भ में भी विचारों को और स्पष्ट करने का प्रयास करता हूँ। जो प्रेरित युवा इस अभियान से जुड़ना चाहते है, वह उपरोक्त बातों तथा निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार कर सकते हैं :-

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1. अपनी समृद्ध विरासत तथा स्वयं की क्षमता को जानिए एवं समझिए।

2. मानवीय क्षमता के चरमोत्कर्ष की चर्चा करते हुए मैंने उपनिषदों के अत्यंत प्रेरणादायक एवं महत्वपूर्ण श्लोक

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“ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।

पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवा वसिष्यते ।।”

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को अनेक अवसरों पर उद्धृत किया है जिसमें यह वर्णन मिलता है कि पूर्ण को खंडित करने पर भी हर खंड पूर्ण ही रहता है और पुनः पूर्ण में ही विलीन हो जाता है; अर्थात् हर आत्मा जो परमात्मा का ही अंशरूप है उसमें उसके सभी गुण समाहित हैं। ऐसे में युवा मन में अपने सामर्थ्य के प्रति किसी प्रकार का संदेह न हो इसके लिए यह अनुभूति आवश्यक है कि ईश्वर (पूर्ण) की वह असीम शक्ति सभी के अंदर पूर्णतः समाहित है और सदैव सही मार्गदर्शन हेतु तत्त्पर भी है। ऐसे में कहीं और न देखकर यदि हम एकाग्रचित्त होकर गहन आत्मचिंतन करेंगे तो सभी के लिए स्वयं मार्गदर्शक तथा इच्छित परिवर्तन के प्रबल वाहक बन जाऐंगे।

3. यह समझना होगा कि स्वयं के सामर्थ्य को जाने बिना जब कई बार दूसरों के अनुसरण के कारण हम अपने मूल्यों से दिग्भ्रमित हो जाते हैं, तब हमारा अपनी मूल क्षमताओं से विश्वास डिग जाता है, जो सर्वथा अनुचित है।

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4. यह समझना होगा कि यदि हम प्रतिकूल परिस्थितियों के समक्ष निराश होते हैं तो हम युवावस्था में समाहित उस असीम उर्जा के स्रोत से संभवतः स्वतः विच्छिन्न होते जाते हैं जिसके मूल में आशावादिता एवं सकारात्मकता सन्निहित है।

5. यदि अपने पूर्वजों के कृतित्वों से आप प्रेरित हैं और स्वयं की असीमित क्षमताओं के विषय में स्पष्ट हैं तो केवल स्वयं तक सीमित मत रहिए, इस अद्भुत प्रेरणा का प्रसार कीजिए।

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6. लघुवादों यथा जातिवाद, संप्रदायवाद, लिंगभेद आदि संकीर्णताओं से परे उठकर बिहार तथा भारत के उज्ज्वलतम भविष्य के निर्माण हेतु बृहत् चिंतन करें तथा दूसरों को भी प्रेरित करें।

7. प्रेरित युवा संगठित होने का प्रयास करें जिससे नकारात्मकता के विरुद्ध युद्ध हेतु संकल्पित सकारात्मक विचारों की शक्ति प्रबल हो उठे। संगठन को बृहत् स्वरूप प्रदान करने हेतु “Let’s Inspire Bihar” के जिलावार चैप्टरों से सोशल मीडिया एवं भौतिक माध्यमों से जुड़ें जिनकी स्थापना आपके जिले के प्रेरित युवा समन्वयकर्ताओं द्वारा की जा रही है। बिहार के सभी जिलों के युवाओं और अप्रवासी बिहारवासियों के लिए भी प्रारंभ में सोशल मीडिया के माध्यमों ही चैप्टरों को प्रारंभ किया जा रहा है जिनसे जुड़ने के लिए आप अपने जिले या नगर से संबंधित फेसबुक पेज से जुड़ सकते हैं अथवा letsinspirebihar@gmail.com पर अपने नाम, उम्र, जिला का नाम और दूरभाष संख्या के साथ इमेल कर सकते हैं ताकि आपके क्षेत्र से संबंधित समन्वयकर्ता आपसे संपर्क स्थापित कर सकें।

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8. प्रेरित युवाओं के साथ अपने व्यस्त समय में से कुछ समय सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों के निमित्त चिंतन एवं योगदान हेतु भी समर्पित करें। मुख्य उद्देश्य #3Es यथा #शिक्षा (#Education), #समता (#Egalitarianism) एवं #उद्यमिता (#Entrepreneurship) के ऐतिहासिक भावों को पुनः जागृत करने की है।

9. जो लघुवादों से ग्रसित हैं तथा दिग्भ्रमित हो रहे हैं उनके मार्गदर्शन हेतु अपने स्तर से भी प्रयास करें । उन्हें समझाने का प्रयास करें कि यदि व्यक्ति अपने वास्तविक सामर्थ्य को जान ले तथा सफलता प्राप्त करने के निमित्त अत्यंत परिश्रम करे तो कोई भी लक्ष्य असाध्य नहीं रह जाता। मिलकर, हम निश्चित ही राष्ट्रहित में अपने जीवन काल में कुछ उत्कृष्ट योगदान समर्पित कर सकते हैं।

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10. सकारात्मकता विचारों एवं प्रेरणादायक उदाहरणों को सोशल मीडिया पर #letsinspirebihar हैशटैग के साथ साझा करें।

भविष्य परिवर्तन के निमित्त युवाओं द्वारा संकल्पित सकारात्मक चिंतन एवं योगदान ही उज्ज्वलतम भविष्य की दिशा स्थापित करने का एकमात्र विकल्प है। इतिहास की प्रेरणा में ऐसी अद्भुत शक्ति समाहित है जो बिहार समेत संपूर्ण भारतवर्ष के भविष्य को परिवर्तित करने की क्षमता रखती है। मन भविष्यात्मक दृष्टिकोण के निमित्त विशेषकर युवाओ से स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से आह्वान करना चाहता है –

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“पूर्व प्रेरणा करे पुकार, आओ मिलकर गढ़ें नव बिहार।

नव चिंतन नव हो व्यवहार, लघु वादों से मुक्त हो संसार।

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ज्ञान परंपरा का विस्तार, दीर्घ प्रभाव का सतत् प्रसार।

बृहतर चिंतन सह मूल्यों पर, आधारित युवा करें विचार।”

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(विकास वैभव)

मुजफ्फरपुर नाउ को टेलीग्राम पर सब्सक्राइब कर सकते हैं।

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बिहार बोर्ड ने छात्रों को दी बड़ी राहत, अब जूते-मोजे पहनकर दे सकेंगे परीक्षा

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बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ( बिहार बोर्ड या बीएसईबी ) ने इंटरमीडिएट परीक्षा 2022 के छात्रों को बड़ी राहत दी है। एक फरवरी से शुरू हो रहीं 12वीं की परीक्षाओं में छात्र अब जूता-मोजा पहनकर परीक्षा दे सकेंगे। समिति ने इस संबंध में नया नोटिस जारी कर कहा है कि शीतलहर के कारण छात्रों को जूता-मोजा पहनकर परीक्षा केंद्रों/परीक्षा कक्ष में प्रवेश करने की अनुमति दी गई है। अब इंटर के छात्र जूता-मोजा पहनकर परीक्षा दे सकेंगे। इसकी जानकारी बोर्ड ने सभी छात्र, अभिभावक, डीईओ के साथ नोडल अधिकारियों को दी है। पहले जारी की गईं गाइडलाइंस में परीक्षार्थियों के लिए जूता-मोजा पहनकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने की मनाही थी। उन्हें चप्पल पहनकर ही परीक्षा देने की अनुमति दी गई थी।

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बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा 1 से 14 फरवरी तक आयोजित होगी। इसमे 13 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल होंगे। परीक्षा दो शिफ्ट – सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक और दोपहर 1:45 से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएंगी।

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10 मिनट पहले तक केंद्र पर मिलेगा प्रवेश

बोर्ड की मानें तो छात्रों को परीक्षा हॉल में प्रवेश परीक्षा शुरू होने के दस मिनट पहले तक मिलेगा। पहली पाली के लिए 9.20 मिनट और दूसरी पाली के लिए 1.35 मिनट तक प्रवेश मिलेगा। परीक्षा हाल में प्रवेश से पहले दो बार परीक्षार्थी की जांच की जायेगी। छात्राओं के लिए महिला पुलिस की व्यवस्था की जाएगी।

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इंटर परीक्षा के दौरान हर केंद्र पर प्रत्येक परीक्षार्थी की तीन बार जांच की जायेगी। दो बार केंद्र परिसर में और एक बार वीक्षक द्वारा कक्षा में परीक्षा शुरू होने के पहले जांच की जाएगी। उत्तरपुस्तिका के पहले पन्ने के बायीं तरफ केवल विषय का नाम और उत्तर देने का माध्यम छात्रों द्वारा भरा जाएगा। वहीं प्रश्न पत्र के सेट कोड को उत्तर पुस्तिका में नीले या काले बॉल पेन से भरा जाना है। उत्तर पुस्तिका के दाहिने भाग में प्रश्न पत्र सेट कोड को बॉक्स में भरा जाएगा। इसके अलावा प्रश्न पत्र क्रमांक और छात्र अपना पूरा नाम और विषय का नाम लिख कर वहीं हस्ताक्षर करना है। बीच बार भाग को परीक्षार्थी छोड़ देंगे, क्योंकि यह भाग परीक्षक द्वारा भरा जाएगा। उत्तरपुस्तिका पर परीक्षार्थी का हस्ताक्षर नहीं रहेगा तो ओएमआर रद्द हो जाएगा।

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प्रवेश पत्र पर अंकित निर्देश

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– परीक्षा हॉल में दूसरे परीक्षार्थी से बातचीत किया तो निष्कासित होंगे

– परीक्षा के दौरान अतिरिक्त उत्तरपुस्तिका नहीं मिलेगी

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– छात्र द्वारा केंद्र में आपस में बातचीत करने, एक-दूसरे की मदद करते पकड़े जाने पर निष्कासित कर दिये जायेंगे

– ओएमआर पर व्हाइटनर, इरेजर, नाखून, ब्लेड आदि का इस्तेमाल करने पर ओएमआर रद्द हो जायेगा

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– परीक्षा शुरू होने के एक घंटे तक बाहर जाने की नहीं होगी अनुमति

– मास्क लगाकर केंद्र पर मिलेगा प्रवेश

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मैट्रिक और इंटर के परीक्षार्थियों का टीकाकरण अनिवार्य

कोरोना के बीच अगले माह से शुरू होने वाले मैट्रिक व इंटरमीडिएट परीक्षा में शामिल होने वाले सभी परीक्षार्थियों के लिए टीकाकरण अनिवार्य किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने 15 से 18 वर्ष के मैट्रिक व इंटर के परीक्षार्थियों को परीक्षा पूर्व अनिवार्य रूप से टीका देने का निर्देश दिया है। जिन छात्रों ने अभी तक कोरोना टीका नहीं लिया है, उन छात्रों के अभिभावकों से अब स्कूल प्रशासन द्वारा संपर्क किया जा रहा है।

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Source : Hindustan

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RRB-NTPC परीक्षा के रिजल्ट से नाराज अभ्यर्थियों का पटना और आरा के स्टेशनों पर प्रदर्शन, ट्रेन सेवा बाधित

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आरआरबी एनटीपीसी के रिजल्ट घोषित होने के बाद अभ्यर्थी आक्रोशित हैं. रिजल्ट में धांधली का आरोप लगाकर अभ्यर्थी बड़ी तादाद में पटना और आरा के रेलवे ट्रैक पर जमे हुए हैं. पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल पर अभ्यर्थियों ने धरना दिया है. वहीं आरा स्टेशन पर भी अभ्यर्थी जम गये. नाराज अभ्यर्थियों को रेल व पुलिस प्रशासन के द्वारा लगातार समझाया जा रहा है. लेकिन अभ्यर्थी अपनी मांग को लेकर जमे हुए हैं.

राजेंद्र नगर टर्मिनल पर सोमवार को आरआरबी एनटीपीसी के छात्रों ने छह घंटे तक ट्रैक जाम कर हंगामा किया. छात्रों के हंगामे से राजेंद्र नगर टर्मिनल से खुलनेवाली तेजस राजधानी, संपूर्ण क्रांति दिल्ली के रवाना नहीं हो सकी. ट्रेन के खुलने का टाइम बढ़ाया गया है. वहीं ट्रैक पर छात्रों के हंगामे से दोनों दिशा की ओर से आनेवाले दर्जनों ट्रेन जहां-तहां स्टेशनों पर खड़ी रहीं.

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छात्रों को ट्रैक पर हटने के लिए मान-मनोव्वल चलता रहा है, लेकिन छात्र रिजल्ट में सुधार को लेकर अड़े हैं. विधि व्यवस्था की स्थिति को लेकर डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह, एसएसपी सहित रेलवे के अधिकारी कैंप किये हुए है. छात्रों का आरोप है कि एक ही छात्र को कई अलग-अलग पदों पर बहाली कर दिया गया है. छात्र दिन के ढाई बजे ही ट्रैक पर जम गये थे, जो करीब आठ बजे तक ट्रैक पर भी डटे रहे.

आरआरबी एनटीपीसी का रिजल्ट घोषित होने के बाद उसमें गड़बड़ी को लेकर छात्र आक्रोशित हैं. इसके लिए छात्रों ने राजेंद्र नगर टर्मिनल पर सोमवार को ढाई बजे से छात्रों ने ट्रैक पर हंगामा शुरू किया. छात्रों को हटाने के लिए पहले आरपीएफ व जीआरपी ने अपने तरफ से प्रयास किया. लेकिन छात्रों ने उनकी एक नहीं सुनी.

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छात्रों का कहना है कि रिजल्ट में धांधली हुई है. बाद में रेलवे के अधिकारियों सहित पटना जिला प्रशासन को सूचित किया गया. छात्रों के हंगामे से तेजस राजधानी, संपूर्ण क्रांति राजेंद्र नगर टर्मिनल से शाम सात बजे तक नहीं खुल सकी. वहीं दर्जनों ट्रेनें पटना सिटी व पटना स्टेशन से पहले के स्टेशनों पर खड़ी है. छात्र इतने उग्र थे कि ट्रेन के सामने रेलवे ट्रैक पर कूद पड़े. ट्रेन के ऊपर चढ़ कर भी हंगामा किया.

Source : Prabhat Khabar

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पटना की किन्नर पर फिदा हुआ सुपौल का आशिक,पहले ऐश किया फिर पैसों के लिए कर दी हत्या

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पटना. दिल्लगी दीवार से तो परी भी क्या चीज है..ये कहावत आपने फिल्मों से लेकर कई क्राइम थ्रिलर स्टोरी में पढ़ी होगी लेकिन हम आपको आज एक ऐसी ही कहानी बता रहे हैं जिसमें किन्नर से दिल लगाने वाले शख्स ने लालच में आकर कुछ ऐसा किया जिसने उसे सीध सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. लव, सेक्स और मर्डर की ये कहानी बिहार की है जिसका खुलासा पुलिस ने लगभग एक महीने बाद करते हुए कातिल को सबूतों के साथ गिरफ्तार कर लिया है.

पटना सिटी के आलमगंज थाना क्षेत्र के सादिकपुर मछुआ टोली मोहल्ला में 20 दिसंबर को किन्नर उषा रानी की हुई संदेहास्पद मौत मामले का पुलिस ने उद्भेदन कर लिया है. दरअसल पैसे के लालच में किन्नर से अवैध संबंध रखने वाले युवक ने ही उसकी हत्या की थी और इसके लिए नशे के ओवरडोज का इस्तेमाल किया था. किन्नर उषा रानी के नगद पैसे और जेवरात लेकर आरोपी मौके से फरार हो गया था. पुलिस ने हत्याकांड के दोषी सुपौल जिला निवासी नवीन कुमार झा उर्फ आशुतोष को थाना क्षेत्र के बिस्कोमान कॉलोनी इलाके से गिरफ्तार कर लिया है.

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पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के पास से एक पिस्टल, दो जिंदा कारतूस, दो मैगजीन, 82 ग्राम स्मैक के अलावे एक मोबाइल भी बरामद किया है. गिरफ्तार आरोपी ने पुलिस के समक्ष अपना अपराध कबूल लिया है. बताया जाता है कि बीते 20 दिसंबर को थाना क्षेत्र के मछुआ टोली इलाके से एक बंद घर से उषा रानी किन्नर का शव बरामद किया गया था. घटना के बाद किन्नर समाज के लोगों द्वारा दिए गए बयान के बाद पुलिस ने जब पूरे मामले की तफ्तीश शुरू की और मृतका उषा रानी के मोबाइल फोन को खंगाला तो नवीन कुमार झा उर्फ आशुतोष नामक युवक पर शक की सुई गई.

अनुसंधान के क्रम में यह बात सामने आई की सुपौल जिला निवासी नवीन कुमार झा उर्फ आशुतोष जो पिछले 14 वर्षों से सुलतानगंज थाना क्षेत्र के टेकारी रोड में किराएदार के रूप में रहकर आजीविका चला रहा था का किन्नरों के साथ लंबे समय से संबंध है और वह अक्सर किन्नरों के साथ बैठकर गांजा का सेवन करता है. अनुसंधान के क्रम में यह बात भी सामने आई कि नवीन कुमार झा का पिछले 8 वर्षों से रिंकी नामक किन्नर के साथ अवैध संबंध था, जो पिछले 6 माह पूर्व टूट गया था. रिंकी किन्नर के साथ संबंध टूटने के बाद नवीन झा का उषा रानी किन्नर के साथ संबंध बन गया.

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यह संबंध बनाने के पीछे कारण उषा रानी का काफी संपन्न होना था. गिरफ्तार आरोपी नवीन कुमार झा उर्फ आशुतोष ने एक साजिश के तहत नशे का ओवरडोज देकर उषा रानी को मौत की नींद सुला दिया और उसके नगद पैसे और जेवर लेकर मौके से फरार हो गया. हत्याकांड के उद्भेदन पर किन्नर समाज के लोगों ने पुलिस का आभार प्रकट किया है. पुलिस ने एक अन्य घटनाक्रम में एक राहगीर से सोने का चैन लूटने वाले लुटेरा गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने इन लुटेरों के पास से लूटा गया सोने का चेन भी बरामद कर लिया है.

Source : News18

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