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IPS विकास वैभव की पहल : गौरवशाली अतीत को वापस लाने का प्रयास “Let’s Inspire Bihar”

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“Let’s Inspire Bihar !” या “आईए, मिलकर प्रेरित करें बिहार !” क्या है ?

“राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका” तथा “सफलता के सूत्रों” समेत अनेक विषयों पर भौतिक समेत डिजिटल माध्यमों से लंबे समय से बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं से वार्ता करता रहा हूँ जिसके विवरण सोशल मीडिया पर भी समय-समय पर साझा करता रहा हूँ। इस #बिहार_दिवस पर जब अपनी अवधारणा को और स्पष्ट करते हुए मैंने आह्वान स्वरूप “Let’s Inspire Bihar !” शीर्षक का प्रयोग एक हैशटैग #letsinspirebihar के साथ किया, तब से ही अनेक युवा साथी इसके संदर्भ में अपनी जिज्ञासाओं को व्यक्त करते रहे हैं । अतः आज इसके संदर्भ में आवश्यक विवरण आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।

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#letsinspirebihar क्या है, यह जानने के पूर्व सर्वप्रथम आप स्वयं से यह प्रश्न करें कि क्या आप मानते हैं कि संपूर्ण भारतवर्ष के उज्ज्वलतम भविष्य की प्रबल संभावनाएं कहीं न कहीं उसी भूमि में समाहित हो सकती हैं जिसने इतिहास के एक कालखंड में संपूर्ण अखंड भारत के साम्राज्य का नेतृत्व किया था और वह भी तब जब न आज की भांति संचार के माध्यम थे, न विकसित मार्ग और न प्रौद्योगिकी !

IPS विकास वैभव

आप स्वयं से यह प्रश्न करें कि क्या हमें यह स्मरण नहीं है कि बिहार ही #ज्ञान की वह भूमि है जहाँ वेदों ने भी वेदांत रूपी उत्कर्ष को प्राप्त किया तथा ज्ञान के प्राचीन बौद्धिक परंपरा की जब अभिवृद्धि हुई तब इसी भूमि ने बौद्ध और जैन धर्मों के दर्शन सहित अनेक तत्वों एवं सिद्धांतों के जन्म के साथ नालंदा एवं विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों की स्थापना देखी। जहाँ ज्ञान की ऐसी अद्भुत प्रेरणा रही, वहाँ #शौर्य का परिलक्षित होना भी स्वाभाविक ही था और इसी कारण इतिहास स्वयं साक्षी है कि कभी बिहार से ही संपूर्ण अखंड भारत का शासन संचालित था और वह भी सशक्त एवं प्रबल रूप में। #उद्मिता की इस प्राचीन भूमि ने ही ऐतिहासिक काल में ऐसी प्रेरणा का संचार किया जिसके कारण दक्षिण पूर्वी ऐशिया के नगरों तथा यहाँ तक कि राष्ट्रों का भी नामकरण भी इसी भूमि के प्रेरणादायक नगरों के नामों पर होने लगे जिसका सबसे सशक्त उदाहरण वियतनाम है जो चंपा (वर्तमान भागलपुर, बिहार) के ही नाम से लगभग 1500 वर्षों तक संपूर्ण विश्व में जाना गया।

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यदि ऐसे प्रश्नों का उत्तर स्वीकारोत्मक है, तो बस विचार कीजिए कि वैसे सामर्थ्यवान यशस्वी पूर्वजों के ही हम वंशज क्या वर्तमान में भारत के उज्ज्वलतम भविष्य के निमित्त अपना सर्वाधिक सकारात्मक योगदान समर्पित कर पा रहे हैं ?

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लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में भारत में रहे यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपने ग्रंथ इंडिका में तत्कालीन पाटलिपुत्र को उस समय के विश्व के सर्वश्रेष्ठ नगरों की श्रेणी में वर्णित किया था। आप कल्पना कीजिए कि यदि उस समय किसी पाटलिपुत्र निवासी से 2500 वर्ष पश्चात पाटलिपुत्र के स्वरूप के संबंध में पूछा जाता तो भला किस प्रकार के आशान्वित उत्तर मिले रहते और क्यों वह स्वाभाविक भी प्रतीत होते। परंतु वर्तमान परिदृश्य में जब भी भविष्यात्मक संभावनाओं के विषयों में बिहार के युवाओं से वार्ता होती है, जैसे मेरे साथ भी जब स्वामी विवेकानंद जयंती पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ में तथा अनेक अन्य अवसरों पर वार्ता हुई, तब ऐसी अनुभूति क्यों होती है कि कहीं न कहीं सर्वत्र एक प्रकार की निराशा व्याप्त हो रही है और वर्तमान एवं भविष्य के संबंध में नकारात्मक विचारों की स्थापना भी युवाओं के मध्य हो रही है जो भारत के उज्ज्वलतम भविष्य हेतु सर्वथा अनुचित है। जिस भूमि ने प्राचीनतम काल में ही ऐसे कीर्तिमानों को प्राप्त किया था, यदि उनकी स्वाभाविक प्राकृतिक अभिवृद्धि भी हुई रहती तो निश्चित ही वर्तमान का स्वरूप अत्यंत भिन्न रहता और निश्चित ही यदि भविष्य की संभावनाओं के संबंध में वर्तमान में प्रश्न किए जाते तो उनके उत्तरों में समाहित आशावादिता के भावों में कोई कमी नहीं रही होती। कालांतर में ऐसा क्या होता गया जिसके कारण जो आशावादिता उस काल में स्पष्टता के साथ परिलक्षित होती थी, वह आज के युवाओं से यत्न सहित प्रश्न करने पर भी दर्शित नहीं होती ? आखिर ऐसा क्यों है कि जिस क्षेत्र में कभी संपूर्ण विश्व के विद्वान अध्ययन हेतु दुर्गम मार्गों से सुदूर यात्राएं कर पहुँचने हेतु लालायित रहते थे, वहीं के विद्यार्थी आज परिश्रम एवं पुरुषार्थ के मार्गों से कई अवसरों पर विच्छिन्न प्रतीत होते दिखते हैं तथा अधिकांशतः अन्य क्षेत्रों में अध्ययन एवं जीवनयापन हेतु प्रयासरत रहते हैं ?

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व्याप्त हो रही संभावित निराशा के प्रतिकार हेतु यह चिंतन करना आवश्यक होगा कि स्वाभाविक उत्कर्ष की प्राकृतिक परंपरा किन कारणों से बाधित हुई और जैसी कल्पना कभी रही होगी, वैसा संभव क्यों नहीं हो सका ! ऐतिहासिक भूमि के स्वाभाविक प्राकृतिक विकास की परंपरा से अत्यंत भिन्न ऐसी अप्राकृतिक वर्तमान परिस्थितियों के प्रादुर्भाव के कारणों पर चिंतन करने से ही समाधान मिलेंगे चूंकि भूमि वही है, उर्जा भी वही है और इसमें भला कहाँ संदेह है कि हम उन्हीं यशस्वी पूर्वजों के वंशज हैं जिनकी प्रेरणा आज भी मन को उद्वेलित करती है और कहती है कि यदि संकल्प सुदृढ़ हो तो इच्छित परिवर्तन अपने माध्यम स्वतः तय कर लेते हैं।

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यदि हम इतिहास में प्राप्त उत्कर्ष के कारणों पर चिंतन करेंगे तो पाएंगे कि हमारे पूर्वजों की सोच अत्यंत बृहत् थी जो लघुवादों से विभिन्न थी। उर्जा के साथ जिज्ञासा तो हमारे पूर्वजों की ऐसी थी जो सामान्य भौतिक ज्ञान से संतुष्ट होने वाली नहीं थी तथा सत्य के वास्तविक स्वरूप को जानना चाहती थी जिसके कारण ज्ञान परंपरा के उत्कर्ष को समाहित किए उपनिषदों की दृष्टि संभव हो सकी। यदि भूमि के ऐतिहासिक शौर्य के कारणों पर हम चिंतन करें तो वहाँ भी बृहत्ता के लक्षण तब स्पष्ट होते हैं जब हम महाजनपदों के उदय के क्रम में पाटलिपुत्र में महापद्मनंद के राज्यारोहण का स्मरण करते हैं चूंकि जिस काल में अन्य जनपदों में जहाँ पूर्व से स्थापित शाशक वर्ग के अतिरिक्त किसी अन्य वर्ग से सम्बद्ध शासक की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, मगध में केवल सामर्थ्य को ही कुशल शासकों हेतु उपयुक्त लक्षणों के रूप में स्वीकृति प्राप्त हुई थी। ऐसे चिंतन के कारण ही मगध का सबसे शक्तिशाली महाजनपद के रूप में उदय हुआ जिसने कालांतर में साम्राज्य का रूप ग्रहण कर लिया। उत्कृष्ट चिंतन के कारण जहाँ राजतंत्र के रूप में मगध का उदय हुआ, वहीं वैशाली में गणतंत्र की स्थापना भी हुई। यदि कालांतर में ऐसे शौर्य का क्षय हुआ तो उसके कारण शस्त्र और शास्त्र में समन्वय का अभाव ही रहा चूंकि इतिहास स्वयं साक्षी रहा है कि भले ही शास्त्रीय ज्ञान अपने चरम उत्कर्ष पर क्यों न हो, यदि शस्त्रों के सामर्थ्य में कमी आती है तो उत्कृष्ट शास्त्र भी नष्ट हो जाते हैं।

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यदि कालांतर में हमारा अपेक्षाकृत विकास नहीं हुआ और यदि हम पूर्व का स्मरण करते हुए वर्तमान में वैसा तारतम्य अनुभव नहीं करते तो इसका कारण कहीं न कहीं समय के साथ लघुवादों अथवा अतिवादों से ग्रसित होना ही रहा है अन्यथा जिस भूमि ने इतिहास के उस काल में कभी महापद्मनंद को शाशक के रूप में सहर्ष स्वीकार जन्म विशेष के लिए नहीं परंतु उनकी क्षमताओं पर विचारण के उपरांत किया था, उसके उज्ज्वलतम भविष्य में भला संदेह कहाँ था।

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यदि वर्तमान में हम विकास में अन्य क्षेत्रों से कहीं पिछड़े हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वलतम देखना चाहते हैं तो आवश्यकता केवल और केवल अपने उन यशस्वी पूर्वजों का स्मरण करते हुए लघुवादों यथा जातिवाद, संप्रदायवाद इत्यादि से उपर उठकर राज्य एवं राष्ट्रहित में बृहतर चिंतन के साथ भविष्यात्मक दृष्टिकोण को मन में स्थापित करते हुए निज सामर्थ्यानुसार आंशिक ही सही परंतु निस्वार्थ सामाजिक योगदान अवश्य समर्पित करना होगा। आवश्यकता एक वैचारिक क्रांति की है जो युवाओं के मध्य प्रसारित हो और जो भविष्य निर्माण के निमित्त संगठित रूप में संकल्पित करे। परिवर्तन ही ऋत है ! आवश्यकता आशावादिता के साथ आगे बढ़ने की है। जिस भूमि ने वैदिक काल से ही गार्गी वाचक्नवी एवं मैत्रेयी जैसी विदुषियों को नारी में भी समाहित विद्वता का प्रतिनिधित्व करते देखा हो, उसका भविष्य भला उज्ज्वलतम क्यों न हो।

अब यदि इस पर चर्चा करें कि “Let’s Inspire Bihar !” के अंतर्गत हम मिलकर किस प्रकार की गतिविधियां कर सकते हैं अथवा किन बिंदुओं पर चिंतन कर सकते हैं, तो इस संदर्भ में भी विचारों को और स्पष्ट करने का प्रयास करता हूँ। जो प्रेरित युवा इस अभियान से जुड़ना चाहते है, वह उपरोक्त बातों तथा निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार कर सकते हैं :-

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1. अपनी समृद्ध विरासत तथा स्वयं की क्षमता को जानिए एवं समझिए।

2. मानवीय क्षमता के चरमोत्कर्ष की चर्चा करते हुए मैंने उपनिषदों के अत्यंत प्रेरणादायक एवं महत्वपूर्ण श्लोक

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“ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।

पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवा वसिष्यते ।।”

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को अनेक अवसरों पर उद्धृत किया है जिसमें यह वर्णन मिलता है कि पूर्ण को खंडित करने पर भी हर खंड पूर्ण ही रहता है और पुनः पूर्ण में ही विलीन हो जाता है; अर्थात् हर आत्मा जो परमात्मा का ही अंशरूप है उसमें उसके सभी गुण समाहित हैं। ऐसे में युवा मन में अपने सामर्थ्य के प्रति किसी प्रकार का संदेह न हो इसके लिए यह अनुभूति आवश्यक है कि ईश्वर (पूर्ण) की वह असीम शक्ति सभी के अंदर पूर्णतः समाहित है और सदैव सही मार्गदर्शन हेतु तत्त्पर भी है। ऐसे में कहीं और न देखकर यदि हम एकाग्रचित्त होकर गहन आत्मचिंतन करेंगे तो सभी के लिए स्वयं मार्गदर्शक तथा इच्छित परिवर्तन के प्रबल वाहक बन जाऐंगे।

3. यह समझना होगा कि स्वयं के सामर्थ्य को जाने बिना जब कई बार दूसरों के अनुसरण के कारण हम अपने मूल्यों से दिग्भ्रमित हो जाते हैं, तब हमारा अपनी मूल क्षमताओं से विश्वास डिग जाता है, जो सर्वथा अनुचित है।

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4. यह समझना होगा कि यदि हम प्रतिकूल परिस्थितियों के समक्ष निराश होते हैं तो हम युवावस्था में समाहित उस असीम उर्जा के स्रोत से संभवतः स्वतः विच्छिन्न होते जाते हैं जिसके मूल में आशावादिता एवं सकारात्मकता सन्निहित है।

5. यदि अपने पूर्वजों के कृतित्वों से आप प्रेरित हैं और स्वयं की असीमित क्षमताओं के विषय में स्पष्ट हैं तो केवल स्वयं तक सीमित मत रहिए, इस अद्भुत प्रेरणा का प्रसार कीजिए।

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6. लघुवादों यथा जातिवाद, संप्रदायवाद, लिंगभेद आदि संकीर्णताओं से परे उठकर बिहार तथा भारत के उज्ज्वलतम भविष्य के निर्माण हेतु बृहत् चिंतन करें तथा दूसरों को भी प्रेरित करें।

7. प्रेरित युवा संगठित होने का प्रयास करें जिससे नकारात्मकता के विरुद्ध युद्ध हेतु संकल्पित सकारात्मक विचारों की शक्ति प्रबल हो उठे। संगठन को बृहत् स्वरूप प्रदान करने हेतु “Let’s Inspire Bihar” के जिलावार चैप्टरों से सोशल मीडिया एवं भौतिक माध्यमों से जुड़ें जिनकी स्थापना आपके जिले के प्रेरित युवा समन्वयकर्ताओं द्वारा की जा रही है। बिहार के सभी जिलों के युवाओं और अप्रवासी बिहारवासियों के लिए भी प्रारंभ में सोशल मीडिया के माध्यमों ही चैप्टरों को प्रारंभ किया जा रहा है जिनसे जुड़ने के लिए आप अपने जिले या नगर से संबंधित फेसबुक पेज से जुड़ सकते हैं अथवा letsinspirebihar@gmail.com पर अपने नाम, उम्र, जिला का नाम और दूरभाष संख्या के साथ इमेल कर सकते हैं ताकि आपके क्षेत्र से संबंधित समन्वयकर्ता आपसे संपर्क स्थापित कर सकें।

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8. प्रेरित युवाओं के साथ अपने व्यस्त समय में से कुछ समय सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों के निमित्त चिंतन एवं योगदान हेतु भी समर्पित करें। मुख्य उद्देश्य #3Es यथा #शिक्षा (#Education), #समता (#Egalitarianism) एवं #उद्यमिता (#Entrepreneurship) के ऐतिहासिक भावों को पुनः जागृत करने की है।

9. जो लघुवादों से ग्रसित हैं तथा दिग्भ्रमित हो रहे हैं उनके मार्गदर्शन हेतु अपने स्तर से भी प्रयास करें । उन्हें समझाने का प्रयास करें कि यदि व्यक्ति अपने वास्तविक सामर्थ्य को जान ले तथा सफलता प्राप्त करने के निमित्त अत्यंत परिश्रम करे तो कोई भी लक्ष्य असाध्य नहीं रह जाता। मिलकर, हम निश्चित ही राष्ट्रहित में अपने जीवन काल में कुछ उत्कृष्ट योगदान समर्पित कर सकते हैं।

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10. सकारात्मकता विचारों एवं प्रेरणादायक उदाहरणों को सोशल मीडिया पर #letsinspirebihar हैशटैग के साथ साझा करें।

भविष्य परिवर्तन के निमित्त युवाओं द्वारा संकल्पित सकारात्मक चिंतन एवं योगदान ही उज्ज्वलतम भविष्य की दिशा स्थापित करने का एकमात्र विकल्प है। इतिहास की प्रेरणा में ऐसी अद्भुत शक्ति समाहित है जो बिहार समेत संपूर्ण भारतवर्ष के भविष्य को परिवर्तित करने की क्षमता रखती है। मन भविष्यात्मक दृष्टिकोण के निमित्त विशेषकर युवाओ से स्वरचित पंक्तियों के माध्यम से आह्वान करना चाहता है –

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“पूर्व प्रेरणा करे पुकार, आओ मिलकर गढ़ें नव बिहार।

नव चिंतन नव हो व्यवहार, लघु वादों से मुक्त हो संसार।

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ज्ञान परंपरा का विस्तार, दीर्घ प्रभाव का सतत् प्रसार।

बृहतर चिंतन सह मूल्यों पर, आधारित युवा करें विचार।”

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(विकास वैभव)

मुजफ्फरपुर नाउ को टेलीग्राम पर सब्सक्राइब कर सकते हैं।

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बेहतरीन इंवेस्टिगेशन के लिए बिहार के दो आईपीएस सहित 7 अफसरों को गृहमंत्री मेडल

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केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के द्वारा अपराधिक अनुसंधान में उत्कृष्ट भूमिका निभाने वाले बिहार के दो आईपीएस अधिकारियों समेत सात पुलिस कर्मियों को पुरस्कृत किया जाएगा. वर्ष 2022 के केंद्रीय गृह मंत्री जांच उत्कृष्टता पदक के लिए चयनित पुलिस कर्मियों की सूची में आईपीएस सायली धूरत सावलाराम और आईपीएस विनय तिवारी के नाम शामिल हैं. इसके अलावा इंस्पेक्टर राम शंकर सिंह, इंस्पेक्टर विनय प्रकाश, सब-इंस्पेक्टर मनोज कुमार राय, सब-इंस्पेक्टर मो. चांद परवीन और सब-इंस्पेक्टर मो. गुलाम मुस्तफा के नाम भी शामिल हैं.

पटना में जनवरी 2021 में इंडिगो एयरलाइंस के स्टेशन मैनेजर रूपेश सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इसकी जांच पटना के तत्कालीन नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) विनय तिवारी के नेतृत्व में हुई थी. विनय तिवारी ने पूरे मामले का उद्भेदन (खुलासा) करते हुए रुपेश की हत्यारों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया था. बताया जा रहा है कि इसी मामले में उत्कृष्ट अनुसंधान के लिए विनय तिवारी को पुरस्कृत किया गया है.

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तफ्तीश में पता चला था कि दिसंबर 2020 में रोडरेज के मामले में रुपेश सिंह का कुछ लोगों से झगड़ा हुआ था. इसमें उनकी हाथापाई भी हुई थी. इसको लेकर ही उनकी हत्या कर दी गई थी. इस हाई प्रोफाइल मर्डर के बाद पटना पुलिस के लिए यह गुत्थी सुलझाना बेहद पेचीदा हो गया था. हालांकि विनय तिवारी के नेतृत्व में पुलिस ने पूरे मामले की पड़ताल की और हत्या के कारणों का खुलासा किया. पुलिस ने ऋतुराज नामक युवक को गिरफ्तार किया था जिससे रुपेश का रोडरेज हुआ था. बाद में इसी मामले में सौरभ नाम के शख्स को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था.

बता दें कि हर वर्ष भारत सरकार की ओर से आपराधिक मामलों के बेहतर अनुसंधान करने वाले देश के सभी राज्यों के पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को पुरस्कृत किया जाता है. इसको केंद्रीय गृह मंत्री जांच उत्कृष्टता पुरस्कार कहा जाता है. इस वर्ष बिहार पुलिस के सात कर्मियों को पुरस्कृत करने के लिए चयन किया गया है, वहींं इस पुरस्कार के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े कुल 151 पुलिसकर्मियों का नाम शामिल है.

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Source : News18

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राजीवनगर के भूमाफियाओं पर ईडी करेगी मनी लॉड्रिंग का केस

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राजीव नगर और दीघा में आवास बोर्ड की जमीन को अवैध तरीके से बेच अकूत संपत्ति बनाने वाले भूमि माफियाओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी है। रडार पर एक दर्जन से अधिक भूमि माफिया हैं जिनमें से फिलवक्त आधा दर्जन की कुंडली तैयार हो रही है। इनमें ज्यादातर गृह निर्माण समितियां और उनसे जुड़े लोग हैं। ईडी जल्द ही इनके खिलाफ इंफोर्समेंट केस इन्फार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज कर अपनी कार्रवाई तेज करेगी। इनके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लौंड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज होगा। राजीव नगर और दीघा में भूमि माफियाओं के खिलाफ ईडी की यह पहली कार्रवाई होगी। जिन भूमि माफियाओं के नाम सामने आ रहे हैं उनपर पर आवास बोर्ड की काफी जमीन बेचने का आरोप है। इनमें से कई ऐसे हैं जिनके पास कभी साइकिल तक नहीं थी और अब वे महंगी गाड़ियों की सवारी करते हैं। फर्जीवाड़ा कर दीघा की जमीन बेचकर रिसॉर्ट और होटल तक बना रखा है। पटना से लेकर झारखंड तक कई मकान और फ्लैट खरीदे हैं। इन माफियाओं के खिलाफ जमीन हथियाने-बेचने से लेकर इलाके में गोलीबारी तक करने के आरोप हैं।

ईओयू भी कर रही है जांच

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आवास बोर्ड की जमीन बेचने वाले माफियाओं के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई ने भी जांच शुरू कर दी है। आवास बोर्ड द्वारा दर्ज कराई गई अब तक करीब 400 एफआईआर की स्क्रूटनी कर माफियाओं की कुंडली खंगाली जा रही है। गौरतलब है कि राजीव नगर मामले की सुनवाई के क्रम में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी… जिन्होंने 400 करोड़ की प्रॉपर्टी बना ली है, उनके खिलाफ तो ईडी का केस बनता है।

इनपर हाल में केस दर्ज हुआ

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दीपक दुबे, सत्यनारायण, शैलेश सिंह, सुनील सिंह, कौशलेंद्र सिन्हा, विमल कुमार,राजेश झा, अश्विनी सिंह, सर्वेश सिंह, रामदयाल सिंह,राजा सिंह, विकास, मनोज राय, मनीष।

इनपर दर्ज है केस नीरज सिंह, नाकट गोप, प्रमोद, अखिलेश, श्रीनाथ सिंह, शिवजी सिंह

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इन समितियों केस दर्ज निराला सहकारी गृह निर्माण समिति, कपूरचंद सहकारी गृह निर्माण समिति, जयप्रकाश गृह निर्माण समिति, बजरंग समिति, ललित फेडरेशन और त्रिमूर्ति समिति

Source : Dainik Bhaskar

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‘जंगलराज-2’ लाने जा रहे हैं नीतीश कुमार, बिहार सीएम पर BJP के आरोपों की बौछार

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बिहार में नीतीश कुमार और महागठबंधन के खिलाफ बीजेपी नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है. बेगूसराय में सांसद गिरिराज सिंह ने तेजस्वी और नीतीश कुमार पर हमला बोला. गिरिराज सिंह ने राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा के साथ विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि अति महत्वाकांक्षा की वजह से कुछ लोगों के कहने पर नीतीश कुमार को लगा कि वह आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री बन सकते हैं. इतिहास गवाह है कि भाजपा की बदौलत ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहे हैं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ताजा सर्वेक्षण में नरेंद्र मोदी के पक्ष में 56% लोगों ने सहमति जताई है. वहीं नीतीश का नाम भी नहीं है. वहीं छपरा में सांसद राजीव प्रताप रूडी ने नीतीश कुमार से कई सवाल पूछते हुए कहा कि उन्होंने पूरे बिहार के साथ विश्वासघात किया है. रूडी ने नीतीश से पूछा कि ऐसी क्या महत्वाकांक्षा थी जिसने उन्हें जनादेश का अपमान करने पर मजबूर किया.

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वहीं औरंगाबाद में नीतीश के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सांसद सुशील कुमार सिंह ने नीतीश कुमार को पलटीमार चरित्र बताया और कहा कि सत्ता के लिये ‘पलटूराम’ नीतीश कुमार कुछ भी कर सकते हैं. वहीं शेखपुरा में राज्यसभा सांसद शंभू शरण पटेल ने कहा कि नीतीश कुमार महत्वाकांक्षी हो गए और ‘जंगलराज-2’ लाने जा रहे हैं.

बीजेपी उनके नाम पर धोखेबाज दिवस मना रही है. उधर, डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद ने सीएम पर हमला करते हुए कहा कि शराबबंदी एक सामाजिक अभियान है. छपरा में जहरीली शराब से मौत हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री संवेदनहीन हैं. वहीं मुंगेर में पूर्व मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार कहते हैं, जो शराब पीएगा वो मरेगा. लेकिन नीतीश को लोगों की मौत से कुछ लेना देना नहीं है.

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उधर, नीतीश कुमार के केंद्र सरकार द्वारा ईडी और सीबीआई के गलत उपयोग पर दिए बयान का जवाब देते हुए कहा कि जब तक साथ थे तब तक इस बात की जानकारी नहीं हुई, आज हटते ही सीबीआई और ईडी का दुरुपयोग याद आने लगा है. आज सीबीआई ओर ईडी सही तरीके से निष्पक्ष होकर अपना काम कर रही है.

वहीं सासाराम में सांसद छेदी पासवान ने कहा कि नीतीश कुमार ने जनमत के साथ खिलवाड़ किया है. लोकतंत्र में यह विश्वासघात है. एक साथ चुनाव लड़ने के बावजूद जिस तरह से नीतीश कुमार ने जनता दल का दामन थाम लिया. जो दर्शाता है कि नीतीश कुमार कितने विश्वासघाती हैं. ज्यादा दिन नहीं चलेगी. उधर, आरा में बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री अमरेंद्र प्रताप ने कहा कि नीतीश कुमार ने साल 2020 में मिले मैंडेट के खिलाफ जाकर महागठबंधन के साथ मिलकर जनता के साथ धोखेबाजी की है. उन्होने कहा की इस नए गठबंधन का कोई भविष्य नहीं है.

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Source : Aaj Tak

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