लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) आखिर किसकी है? बिहार से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में कल के घटनाक्रमों के बद से यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है। सोमवार को सबसे पहले दिवंगत नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व में पांच सांसदों ने अलग गुट बना लिया।

उन्होंने अपने भतीजे चिराग पासवान को अलग-थलग छोड़ दिया। बात यहीं तक नहीं रुकी। पारस और चार सांसद एक चिट्ठी लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मिलने पहुंच गए। अर्जी में चिराग को बेदखल करते हुए लोकसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता बदलने की मांग थी।

स्पीकर ने उनकी अर्जी मंजूर कर ली और देर रात एक चिट्ठी जारी कर पशुपति कुमार पारस को लोजपा संसदीय दल का नेता घोषित कर दिया गया। हालांकि दिन में जब चिराग पासवान अपने चाचा से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे तो उन्हें गेट पर काफी देर तक हॉर्न बजाना पड़ा। यह वही बंगला है, जहां राम विलास पासवान की पसंदीदा एक पुरानी कार पहले से पार्क थी। कहा जाता है कि इस कार पर पशुपति पारस संघर्ष के दिनों में यात्रा किया करते थे।

अपनी मां को अध्यक्ष बनाने का चिराग ने दिया प्रस्ताव

काफी देर हॉर्न बजाने के बाद चाचा के बंगले का दरवाजा भतीजे के लिए खुलता है। काफी देर तक दोनों के बीच चर्चा होती है। सूत्रों का कहना है कि चिराग पासवान अपने चाचा के पास एक प्रस्ताव के साथ पहुंचे थे, जिसमें उन्होंने अपनी मां के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की मांग की और खुद संसदीय दल के नेता का पद छोड़ने के लिए तैयार हो गए। हालांकि पशुपति पारस के मन में पहले से ही सारी प्लानिंग चल रही थी। बस वह समय के हिसाब के उसे अंजाम तक पहुंचा रहे थे।

पशुपति पारस ने लोकसभा में लोजपा संसदीय दल का नेता बनने के बाद अपने सभी सांसदों (चिराग को छोड़कर) के साथ दिल्ली से पटना की फ्लाइट पकड़ी। पटना हवाई अड्डे के ठीक सटे लोजपा के कार्यालय में उन्होंने एक बैठक बुलाई और चिराग पासवान को राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से बेदखल कर दिया। आपको बता दें कि पशुपति कुमार पारस खुद हाजीपुर के सांसद हैं। इसके अलावा उनके साथ चिराग पासवान को छोड़ सांसद चौधरी महबूब अली कैसर, वीणा सिंह, सूरजभान के भाई सांसद चंदन सिंह और रामचन्द्र पासवान के पुत्र प्रिंस राज हैं। पारस के भतीजे प्रिंस बिहार लोजपा के अध्यक्ष भी हैं।

चिराग निर्णय करें उन्हें क्या करना है: पारस

पारस ने भी साफ कर दिया कि चिराग को पार्टी में रहना या नहीं, यह निर्णय अब उन्हें करना है। इसके साथ उन्होंने दावा किया कि वह पार्टी को तोड़ नहीं रहे हैं, बल्कि बचा रहे हैं। उनकी दलील है कि लोजपा के 99 फीसदी कार्यकर्ता चिराग के जेडीयू के खिलाफ चुनाव लड़ने से नाराज थे। पारस ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करने में भी देर नहीं की।

आनन-फानन में पार्टी पर नियंत्रण पाने की कोशिशें तेज

अब बात मंगलवार की। लोजपा में दो धड़े हो चुके हैं। एक का नेतृत्व चिराग पासवान कर रहे हैं और दूसरे का पशुपति पारस। दोनों धड़ों ने आनन-फानन में पार्टी पर नियंत्रण पाने की कोशिशें तेज कर दीं। चिराग पासवान की अध्यक्षता में लोजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की हुई बैठक में पार्टी ने बागी पांच सांसदों को दल से निकाल दिया। पार्टी ने यह फैसला भी किया है कि अगले साल होने वाले चार राज्यों के चुनाव में भी पार्टी अपना उम्मीदवार देगी। इससे पहले उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व वाले गुट ने चिराग को पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया।

कौन होगा लोजपा का बॉस?

राम विलास पासवान के पुत्र चिराग संसदीय दल में अलग-थलग पड़ गये हैं क्योंकि उन्हें छोड़कर बाकी सांसद पारस का समर्थन कर रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि पारस को पार्टी के अन्य नेताओं का भी समर्थन प्राप्त है। दोनों धड़े पार्टी पर अपने नियंत्रण का दावा कर रहे हैं, ऐसे में मामला निर्वाचन आयोग तक पहुंचने के आसार हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि लोजपा का बॉस किसे माना जाएगा, चिराग पासवान को या फिर उनके चाचा पशुपति पारस को।

Input: live hindustan

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