बिहार के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। अभी 28 जिले में मेडिकल कॉलेज खुले हुए हैं। बाकी 10 जिलों में मेडिकल कॉलेज का निर्माण आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। मंगलवार को भाजपा के रामनारायण मंडल के गैर सरकारी संकल्प के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने विधानसभा में यह जानकारी दी।

रामनारायण मंडल ने बांका के लकड़ीकौला में खाली सरकारी जमीन का हवाला देते हुए मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव लाया था। इसका जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में अभी 11 चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल संचालित हैं। इनका संचालन आठ जिलों पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, नालंदा, बेतिया व मधेपुरा में हो रहा है। वहीं, केंद्र प्रायोजित योजना एवं विकसित बिहार के सात निश्चय योजना के तहत 11 और चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है। यह निर्माण समस्तीपुर, सारण, बेगूसराय, वैशाली, भोजपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, बक्सर, जमुई, सीवान व पूर्णिया में हो रहा है। दो जिलों मुंगेर व मोतिहारी में सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल का निर्माण सरकार के समक्ष प्रक्रियाधीन है। जबकि दरभंगा में एम्स की स्थापना का प्रस्ताव स्वीकृत है।

मंत्री ने कहा कि इसके अलावा राज्य के सात जिलों में आठ निजी चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल संचालित हैं। ये जिले किशनगंज, कटिहार, रोहतास, सहरसा, मधुबनी, पटना व मुजफ्फरपुर हैं। इस तरह राज्य के 28 जिलों में सरकारी एवं निजी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल संचालित हैं या निर्माणाधीन हैं। शेष अन्य 10 जिलों में सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पतालों का निर्माण की योजना है। आने वाले वर्षों में चरणवार तरीके से बाकी 10 जिलों में भी मेडिकल कॉलेजों का निर्माण होगा तो बांका को भी शामिल किया जाएगा।

विधानमंडल के मौजूदा और पूर्व सदस्यों का कैशलेस इलाज
राज्य के मौजूदा व पूर्व विधायक, विधान पार्षदों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। संजय सरावगी के गैर सरकारी संकल्प के जवाब में प्रभारी मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत विधानमंडल के सदस्यों व पूर्व सदस्यों को सरकारी, गैर सरकारी, निजी अस्पतालों में चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा अनुमान्य है। राज्य सरकार के समक्ष बिहार विधानमंडल के सदस्यों व पूर्व सदस्यों के लिए सीजीएचएस की तर्ज पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने से संबंधित मामला प्रक्रियाधीन है। हालांकि इस बीच ललित यादव व समीर महासेठ ने कहा कि आम लोगों को कैशलेस की सुविधा मिलनी चाहिए न कि सदस्यों को। मंत्री के जवाब के बाद सदस्य ने अपना संकल्प वापस ले लिया। इसी विषय से जुड़ा गैर सरकारी संकल्प पहले जदयू के जितेन्द्र कुमार ने भी लाया था।

विशेषज्ञ चिकित्सक का ही प्रावधान
सत्तानन्द सम्बुद्ध उर्फ ललन के गैर सरकारी संकल्प के जवाब में प्रभारी मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि चिकित्सा परिचर्या नियमावली में विशेषज्ञ चिकित्सक का ही प्रावधान है। इसे महज सरकारी चिकित्सक करने का प्रस्ताव नहीं है। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि विधानमंडल के सदस्य अपना इलाज विशेषज्ञ चिकित्सकों से ही कराएं ताकि उन्हें बेहतर उपचार मिले।
Source : Hindustan








