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स्नातक में डिग्री के साथ अब सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी

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स्नातक में डिग्री के साथ अब डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी छात्र कर सकेंगे। यूजीसी ने उच्च शिक्षा में गुणात्मक बदलाव के लिए हायर एजुकेशन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क तैयार किया है। इस फ्रेमवर्क को बीआरए बिहार विवि समेत सभी विवि के कुलपतियों को भेज दिया गया है।

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यूजीसी ने 21 फरवरी तक सभी कुलपतियों से इस पर उनकी राय मांगी है। इस फ्रेमवर्क को नई शिक्षा नीति के तहत तैयार किया गया है। बीए सर्टिफिकेट कोर्स एक वर्ष का होगा और डिप्लोमा दो वर्ष का। छात्रों को आजादी होगी कि वह स्नातक में कौन सा कोर्स करें। यूजीसी ने इस फ्रेमवर्क में बताया है कि स्नातक सर्टिफिकेट कोर्स वोकेशनल या प्रोफेशनल कोर्स में किया जा सकता है। बिहार विवि में नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए एक कमेटी भी बनायी गयी है। एकेडमिक काउंसिल में इसे पास किया गया था। विवि की कमेटी को तय करना था कि नयी शिक्षा नीति को विवि में किस रूप में लागू किया जा सकता है।

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पीजी के साथ स्नातक में शुरू होगा सेमेस्टर सिस्टम

हायर एजुकेशन फ्रेमवर्क में पीजी के साथ स्नातक में भी सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जायेगा। बिहार विवि में इस पर पहले से ही काम चल रहा है। स्नातक स्तर पर नये सिलेबस तैयार किये जा रहे हैं। एकेडमिक काउंसिल की बैठक में तय किया गया था कि छात्रों को रोजगार से जोड़ने के लिए सिलेबस तैयार किया जाये। यह सिलेबस सेमेस्टर सिस्टम को ध्यान में रखकर बनाने की बात कही गयी थी।

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बीए के साथ कर सकेंगे रिसर्च

हायर एजुकेशन फ्रेमवर्क में बीए के साथ रिसर्च भी कर सकेंगे। हायर एजुकेशन फ्रेमवर्क में इसकी भी व्यवस्था की गयी है। बीए रिसर्च एक अलग कोर्स होगा। यह डिग्री चार वर्ष की होगी। इसमें छात्र स्नातक के साथ शोध भी कर सकेंगे। यूजीसी ने कहा है कि पीएचडी में शोध कार्य करने से पहले यह शोध कार्य छात्रों को रिसर्च के प्रति जागरूक करेगा। इस कोर्स में छात्र को एक रिसर्च प्रोजेक्ट करना होगा।

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छात्रों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित के लिए है सर्टिफकेट कोर्स

हायर एजुकेशन फ्रेमवर्क में यूजीसी ने कहा है कि बीए में एक वर्ष का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का मकसद छात्रों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करना है। कई छात्र तीन वर्ष का कोर्स नहीं करना चाहते हैं। कुछ छात्रों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। इसलिए यह सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है। वोकेशनल या प्रोफेशनल कोर्स में सर्टिफिकेट कोर्स कर छात्र कहीं नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है।

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Source : Hindustan

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शिक्षा मानव में पहले से ही विद्यमान की अभिव्यक्ति है : स्वामी विवेकानंद

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…….और एक शिक्षक और शैक्षणिक संस्थानों का कर्त्तव्य उसको प्रकाशित करना हैं ! हम कक्षा में जो सीखते हैं, वह समाज में हमारे व्यवहार से परिलक्षित होना चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों द्वारा छात्रों के बीच मूल्यों का विकास करने के कुछ तरीको को प्रकाशित करते हैं:

नैतिक दर्शन का पाठ्यचर्या और अनुशासन – स्कूल के पाठ्यक्रम में नैतिक मुद्दों और नैतिक दर्शन के विषय पर पाठ होना चाहिए। यह छात्रों को नैतिक दर्शन पर सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करेगा ताकि वे व्यक्तिगत जीवन में उनका अभ्यास कर सकें। उदाहरण के लिए, गांधी सात पाप, भारतीय और पश्चिमी दार्शनिक परंपराओं पर पाठ छात्रों के नैतिक संकाय को मुक्त करने में सहायक होंगे।

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ऑब्जर्वेसन लर्निंग और साथियों का प्रभाव – विद्यार्थी आमतौर पर स्कूल में अपने साथियों के समूह, शिक्षकों आदि को देखता है और उनके व्यवहार से सीखता है। उदाहरण के लिए, जो बुरे लड़कों की संगति में आता है, वह उचित व्यवहार में सीखना शुरू कर सकता है।

विजुयल धारणा – विजुयल धारणा विभिन्न सूचनाओं जैसे प्रतीकों, छवियों, रेखाचित्रों, चार्ट आदि को संसाधित करके आसपास के वातावरण की व्याख्या करने की क्षमता है। यह छात्रों के बीच दृष्टिकोण और मूल्यों के संचार के लिए भी शक्तिशाली उपकरण है।

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उपाख्यान (एक छोटी सी सच्ची कहानी) – उपाख्यान वास्तविक जीवन के अनुभव हैं जो वास्तविक मानवीय भावनाओं और अभिव्यक्तियों को चित्रित करते हैं। यह एक छात्र के मन पर एक स्थायी प्रभाव पैदा कर सकता है। उदाहरण के लिए, गांधी, लिंकन आदि के जीवन के उपाख्यानों को साझा करना बच्चों को सदाचारी जीवन जीने के लिए प्रेरित कर सकता है।

समूह गतिविधि – समूह गतिविधि में भूमिका निभाना, खेल, समूह चर्चा, समूह परियोजना आदि शामिल हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से, छात्र टीम भावना, सहयोग आदि का मूल्य सीखते हैं।

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द्वंद्वात्मक शैली – सुकरात इस शैली के संस्थापक थे जो नकारात्मक परिकल्पना उन्मूलन में मदद करता है। उदाहरण के लिए, सहकर्मी समूहों के बीच चर्चा और बहस छात्रों के नैतिक संकाय में सुधार करने में मदद करते हैं।

सामाजिक नियंत्रण – स्कूल अनुशासन, सम्मान, आज्ञाकारिता आदि जैसे मूल्यों को पढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। स्कूल युवाओं को अच्छे छात्र, मेहनती भविष्य के कार्यकर्ता और कानून का पालन करने वाले नागरिक बनने के लिए प्रोत्साहित करके अनुरूपता सिखाते हैं।

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सांस्कृतिक नवाचार – शैक्षणिक संस्थान सांस्कृतिक मूल्यों का निर्माण और संचार करते हैं। शिक्षक समान ज्ञान का संचार नहीं करता बल्कि अपने अनुभव को जोड़कर अद्यतन मूल्यों को प्रसारित करता है।

सामाजिक एकता – शैक्षिक संस्थान विविध जनसंख्या को एक एकीकृत समाज में ढालता है। यह लोगों के दृष्टिकोण, विचारों, रीति-रिवाजों और भावनाओं के बीच सामंजस्य बिठाकर समाज में सामाजिक संगठन बनाता है जो भारत जैसे सामाजिक विविधता वाले देशों में काफी महत्वपूर्ण है।

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सामाजिक नियोजन – शैक्षिक संस्थान सामाजिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना योग्यता और प्रयास को पुरस्कृत करके योग्यता को बढ़ाता है और सामाजिक गतिशीलता को ऊपर उठाने का मार्ग प्रदान करता है

प्रवर्तन तंत्र – स्कूल, समाजीकरण का औपचारिक स्थान होने के कारण मजबूत प्रवर्तन तंत्र है जिसमें छात्रों को नैतिक व्यवहार के लिए पुरस्कृत किया जाता है और अनैतिक व्यवहार के लिए सख्ती से दंडित किया जाता है। उदाहरण के लिए, परीक्षा में नकल करने पर स्कूलों द्वारा भारी सजा दी जाती है और परीक्षा में टॉप करने वालों को सबके सामने पुरस्कृत किया जाता है।

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चुनौतियां/सीमाएं:

मूल्य शिक्षा का अभाव – अधिकांश स्कूली पाठ्यक्रम तकनीकी कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से हैं जबकि नैतिक शिक्षाओं की काफी हद तक अनदेखी की जाती है। उदाहरण के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जेनेटिक एडिटिंग टेक्नोलॉजी आदि के शिक्षण अनुप्रयोगों पर अधिक ध्यान दिया जाता है, लेकिन इससे जुड़े नैतिक सरोकारों को काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया जाता है।

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शिक्षण की पद्धति – अवलोकन, गतिविधि और अनुभवों के माध्यम से सीखने की काफी हद तक अनदेखी की जाती है। इससे छात्रों का नैतिक और आध्यात्मिक विकास के बजाय केवल संज्ञानात्मक विकास होता है।

औद्योगिक केंद्र के रूप में शैक्षणिक संस्थान – जैसा कि माइकल सैंडल बताते हैं, बाजार समाज में बुनियादी जरूरतों को भी बड़े पैमाने पर रखा जाता है। यहां तक ​​कि शिक्षा संस्थान भी औद्योगिक प्रतिष्ठानों के रूप में काम कर रहे हैं जो केवल पैसे की मानसिकता से काम कर रहे हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है, साथ ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता और वहनीयता के मामले में असमानता बढ़ रही है।

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परस्पर विरोधी मूल्य – परिवार और समाज जैसी संस्थाओं का एक बच्चा जो स्कूल में सीखता है, उसका एक अधिभावी प्रभाव हो सकता है। उदाहरण के लिए, बच्चों को स्कूलों में धर्मनिरपेक्षता का मूल्य सिखाया जाता है लेकिन घर पर उनके माता-पिता उन्हें सांप्रदायिक मूल्यों का प्रचार कर सकते हैं।

अतिथि संपादक : मनीष स्वरुप , कॉफ्रेट प्रो० मार्केटिंग के संस्थापक

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इस संपादन में उल्लेखित दृष्टि कोण लेखक की हैं।  जिसका हमारे पत्रकारिता से कोई सम्बन्ध नहीं हैं।

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मुजफ्फरपुर में आईएएस टॉपर्स सेमिनार के जरिए सफलता की रणनीति करेंगे साझा

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आईएएस बनने का सपना आंखों में लिए कई लोग आगे बढ़ते है, लेकिन सही राह पता ना होने के कारण वो मंजिल तक नहीं पहुंच पाते, या काफी वक्त लग जाता है। और प्रॉपर गाइडेंस मिलना भी आसान नहीं होता। लेकिन अब टॉपर आईएएस की तरफ से मिल रहा है, कुछ सीखने का मौका।

IAS परीक्षा की तैयारी कैसे करें, ये स्वयं 2020 व 2021 बैच के IAS टॉपर प्रदीप सिंह, निशांत कुमार, अल्तमश गाजी व अन्य टॉपर्स सेमिनार के माध्यम से सफलता की रणनीति अभ्यर्थियों के साथ साझा करेंगे। इस हेतु जिला प्रशासन, मुजफ्फरपुर के सहयोग से NACS के द्वारा दिनांक 12 मार्च को दिन के 10 बजे जुब्बा सहनी ऑडिटोरियम, मुजफ्फरपुर में एक ओपन सेमिनार रखा गया है जिसमे कोई भी अभ्यर्थी जो IAS बनना चाहते है वे भाग ले सकते है। ये सभी टॉपर्स इस सेमिनार में अभ्यर्थियों के साथ सिविल सर्विसेस परीक्षा से जुड़ी तमाम बारीकियों, कठिनाइयों और चुनौतियों को साझा करेंगे।

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देश ही नही दुनिया के सबसे कठिनतम माने जाने वाले इस परीक्षा की तैयारी कब शुरू करे, तैयारी का माध्यम क्या हो, वैकल्पिक विषयों का चयन कैसे किया जाय, पढ़ाई की रणनीति क्या हो, लंबे समय तक मनोबल कैसे बनाये रखे, साक्षात्कार कैसे फेस करे जैसे तमाम तरह के सवालों और आशंकाओं का समाधान इस सेमिनार में इन सफल अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।

NACS (National Association of Civil Servants) द्वारा आयोजित इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य यह है कि अभ्यर्थी सीधे उन टॉपर्स से बात करे जो स्वयं इस साल सफलता का स्वाद चख चुके है ताकि वे भी अपनी तैयारी को एक नई धार व दिशा दे सके। उल्लेखनीय है NACS सीनियर IAS अधिकारी श्री बी के प्रसाद के मार्गदर्शन में स्थापित एवं संचालित बिहार और झारखंड के सिविल सेवकों का एक ऐसा संगठन है जो 2014 से लगातार बिहार-झारखंड के अभ्यर्थियों को सिविल सेवा हेतु मार्गदर्शन प्रदान करता रहा है। इस बार सिविल सेवा परीक्षा 2020 में मेंस क्लियर कर चुके अभ्यर्थियों के लिए इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम यानी IGP चलाया गया जिसमें 58 अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। इनमें से रैंक 1 शुभम कुमार सहित कुल 25 से भी ज्यादा अभ्यर्थी अंतिम रूप से चनयनित हुए थे।

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इस सफलता को देखकर NACS अब और बड़े स्तर पर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करना चाहता है ताकि बिहार-झारखंड से IAS के चयन को बढ़ाया जा सके। इसी कड़ी में अब मुजफ्फरपुर में भी इस सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। सेमिनार की अध्यक्षता जिला कलेक्टर श्री प्रणव कुमार करेंगे जो स्वयं 2008 बैच के IAS अधिकारी है। साथ ही इस सेमिनार में SSP श्री जयंत कांत, नगर आयुक्त श्री विवेक रंजन IAS 2017 बैच, DDC श्री आशुतोष द्विवेदी IAS 2018 बैच, श्री शरथ , IPS प्रशिक्षु मौजूद रहेंगे और अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन करेंगे। इसके अलावा सेमिनार के संयोजक संतोष कुमार भी अभ्यर्थियों को मोटिवेट करेंगे जो स्वयं 2014 बैच के IAS है तथा वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश में कर्मचारी चयन बोर्ड के सचिव है। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी NACS के ट्विटर हैंडल @NacsBihar_JH एवं फेसबुक पेज National Association of Civil Servants-Bihar & Jharkhand से जुड़े रहे।

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जेईई मेन के लिए रजिस्‍ट्रेशन शुरू, अप्रैल, मई में होगी परीक्षा

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए  (National Testing Agency) ने मंगलवार को संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई मेन)-2022 का शिड्यूल जारी कर दिया है। इस साल नामांकन परीक्षा दो सत्र में होगी। पहले सत्र की परीक्षा 16 से 21 अप्रैल तथा दूसरे सत्र की 24 से 29 मई तक होगी। पहले सत्र के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। एनटीए की सीनियर डायरेक्टर (परीक्षा) डा. साधना पराशर ने बताया कि वेबसाइट (www.jeemain.nta.nic.in) पर रजिस्ट्रेशन के लिए लिंक व इंफार्मेशन बुलेटिन अपलोड कर दी गई है।

31 मार्च तक करा सकते हैं रजिस्‍ट्रेशन

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जेईई मेन-2022 के पहले सत्र के लिए एक से 31 मार्च तक रजिस्ट्रेशन व परीक्षा शुल्क स्वीकार किए जाएंगे। दूसरे सत्र की परीक्षा में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन आठ अप्रैल से प्रारंभ होगा। अभ्यर्थी तीन मई तक इसके लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। आइआइटी, एनआइटी, ट्रीपल आइटी तथा केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों में बीई व बी टेक कोर्स में नामांकन के लिए पेपर वन, बीआर्क के लिए पेपर 2ए तथा बी प्लानिंग के लिए पेपर 2बी में शामिल होना होगा। पेपर वन और पेपर टू के लिए दो खंड होंगे। भाग ए में बहुविकल्पीय और भाग बी में ऐसे प्रश्न होंगे जिनके उत्तरों को संख्यात्मक मूल्य के रूप में भरना होगा। भाग बी में अभ्यर्थियों को 10 में से किसी भी पांच प्रश्नों का जबाव देना होगा। दोनों भाग में निगेटिव मार्किंग होगी। परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी।

  • पहले सत्र के लिए रजिस्ट्रेशन : एक मार्च से 31 मार्च तक
  • दूसरे सत्र के लिए रजिस्ट्रेशन : आठ अप्रैल से तीन मई तक
  • पहले सत्र की परीक्षा : 16, 17, 18, 19, 20 व 21 अप्रैल
  • दूसरे सत्र की परीक्षा : 24, 25, 26, 27, 28 व 29 मई

13 भाषा में होंगे प्रश्न पत्र

जेईई मेन के प्रश्न पत्र हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, असमिया, बांग्ला, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उडिय़ा, पंजाबी, तमिल, तेलगु तथा उर्दू में पत्र होंगे। एनटीए के अनुसार अंग्रेजी के प्रश्न पत्र सभी के लिए उपलब्ध होगा। इसके अतिरिक्त किसी भी अन्य भाषा में प्रश्न पत्र के लिए अभ्यर्थियों को रजिस्ट्रेशन के दौरान जानकारी देनी होगी। अभ्यर्थी यदि भाषा विकल्प नहीं भरते हैं तो उन्हें अंग्रेजी में प्रश्न पत्र उपलब्ध कराया जाएगा।

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