पाकिस्तान को एक और झटका, अब UAE देगा पीएम मोदी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
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पाकिस्तान को एक और झटका, अब UAE देगा पीएम मोदी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

Santosh Chaudhary

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संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जायद मेडल से सम्मानित करने का ऐलान किया है। जायद मेडल यूएई द्वारा राष्ट्राध्यक्षों को दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार है। खास बात ये है कि इसकी जानकारी खुद यूएई के क्राउन प्रिंस ने ट्वीट कर दी है। माना जा रहा है कि मोदी को ये सम्मान देकर यूएई दोनों देशों के बीच दोस्ती और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूती प्रदान करने का प्रयास कर रहा है।

अबुधाबी के क्राउन प्रिंस और सेना के डिप्टी सुप्रीम कमांडर शेख मोहम्मद बिन जायेद ने गुरुवार को ट्वीट कर पीएम नरेंद्र मोदी को जायद मेडल दिए जाने की घोषणा की है। शेख मोहम्मद ने ट्वीट में कहा, ‘दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग के नए आयाम बनाने के लिए हम अपने दोस्त भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जायेद मेडल देकर अपनी प्रशंसा व्यक्त करते हैं।’

मोदी ने दिया धन्यवाद

पुरस्कार की घोषणा होने के कुछ देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर शेख मोहम्मद बिन जायेद का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘मैं इस पुरस्कार को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। आपके दूरदर्शी नेतृत्व में हमारे रणनीतिक संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुके हैं। ये दोस्ती हमारे लोगों की शांति और समृद्धि में योगदान दे रही है।’

सुषमा स्वराज ने आभार जताया

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट करके कहा, ‘भारत के महान सपूत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिज हाइनेस मुहम्मद बिन जायद की ओर से जायद पुरस्कार मिलने का हम सहर्ष स्वागत करते हैं।’ उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित सम्मान को प्रधानमंत्री मोदी को देने से यूएई और अन्य इस्लामिक विश्व के साथ अब तक के सबसे बेहतरीन रिश्ते बनाने में उनके प्रयासों को मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि वह भारतवासियों की ओर से यूएई के राष्ट्रपति और हिज हाइनेस का आभार व्यक्त करती हूं।

मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय

पीएम मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय हैं। इससे पहले यह सम्मान एलिजाबेथ, जॉर्ज डब्ल्यू बुश, व्लादिमीर पुतिन, निकोलस सरकोजी, शी चिनफिंग और एंजेला मार्केल को मिल चुका है। यूएई का यह अहम सम्मान ज्यादातर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों (पी-5) और जर्मनी के राष्ट्राध्यक्षों को मिला है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का नाम अब इस अहम लीग में शुमार हो गया है। यह सम्मान दोनों देशों के रिश्तों में आई मजबूती और विश्वास को दर्शाता है। इससे पहले फरवरी में पीएम मोदी को सियोल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिवों कोफी अन्नान और बान की मून को भी मिल चुका है।-

ओआइसी में भी अलग-थलग पड़ा पाक

मालूम हो कि पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के बाद भी मुश्लिम देशों के इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को आमंत्रित किया था। सुषमा स्वराज ने संगठन के मंच पर पुलवामा हमले पर पाकिस्तान को घेरा था। पाकिस्तान ने भारत को इस्लामिक सहयोग संगठन में आमंत्रित करने पर आपत्ति व्यक्त की थी। बावजूद OIC ने अपना फैसला नहीं बदला तो चिढ़ की वजह से पाकिस्तान ने कार्यक्रम में हिस्सा ही नहीं लिया था।

सऊदी क्राउन प्रिंस की भारत यात्रा

OIC ही नहीं, पुलवामा आतंकी हमले के ठीक बाद सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी पहले पाकिस्तान और फिर भारत का दौरा किया था। उस वक्त भी भारत और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच पुलवामा आतंकी हमले और पाक समर्थित आतंकवाद को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद सऊदी अरब ने भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ देने की बता कही थी। ऐसे में अब एक और इस्लामिक देश यूएई द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च सम्मान दिए जाने से पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है। इससे साफ है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत की कूटनीति काम आ रही है। पाकिस्तान पहले अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ा हुआ है। अब उसे इस्लामिक देशों का भी साथ नहीं मिल रहा है।

मोदी को इस साल मिले दो बड़े सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्रो मोदी को इस साल दो बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। फरवरी 2019 में दक्षिण कोरिया के सियोल में उन्हें शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। नरेंद्र मोदी ये पुरस्कार पाने वाले 14वें व्यक्ति हैं। मोदी ने पुरस्कार में मिली 1.30 करोड़ रुपये की राशि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के लिए दान कर दी थी। पर्यावरण के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए भी मोदी को इसी साल संयुक्त राष्ट्र का चैंपियन ऑफ द अर्थ अवार्ड दिया जा चुका है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री को ये सम्मान दिया था।

यूएई ने जैश के सदस्य को सौंपा था

यूएई ने हाल में पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के प्रमुख सदस्य निसार अहमद को भारत को सौंप दिया था। इस आतंकवादी पर 30 दिसंबर 2017 की रात में जम्मू-कश्मीर के लेथपोरा स्थिति सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमला कराने का आरोप है। निसार इस हमले का मास्टार माइंड था। इस आतंकी हमले में पांच सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे और जवाबी कार्रवाई में तीन आतंकी मारे गए थे। यूएई ने उसी वक्त साफ कर दिया था कि आतंकवाद के मुद्दे पर उसका रुख पाकिस्तान से अलग है। मालूम हो कि पाकिस्तान हमेशा से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियां संचालित करने वाले जैश-ए-मुहम्मद समेत अन्य संगठनों को बचाने में जुटा रहता है।

क्रिश्चियन मिशेल समेत इन आतंकियों को भी सौंपा

यूएई ने कुछ समय पहले अगस्टा वेस्टलैंड डील में रिश्वतखोरी के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल को भी भारत को सौंपा था। इसी मामले में एक अन्य आरोपी दीपक तलवार को भी यूएई भारत को सौंप चुका है। इससे पहले यूएई, सीरियाई आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के आतंकियों, इंडियन मुजाहिदीन के अब्दुल वाहिद सिद्दिबापा और 1993 मुंबई बम धमाकों के आरोपी फारूख टकला जैसे आतंकवादियों को भी भारत के सुपुर्द कर चुका है। मालूम हो कि पिछले कुछ समय में भारत और यूएई के रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने आपसी सहयोग के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किये हैं।

Input : Dainik Jagran

 

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नोबेल पुरस्‍कार से ज्‍यादा चर्चा में रहा अभिजीत और डुफ्लो का इंडियन लुक, जीत लिया दिल

Santosh Chaudhary

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पंजाबी स्‍टाइल का बंद गले का कोट और धोती, ये थाा नोबेल पुरस्‍कार ग्रहण करने वाले डॉक्‍टर विनायक बनर्जी आउटफिट। स्‍वीडन के स्‍टॉकहॉम कंसर्ट हॉल में मौजूद सभी पुरुष जहां सूट में थे वहीं भारतीय मूल के बनर्जी और नीली साड़ी पहने उनकी पत्‍नी इस्‍थर डुफ्लो अपनी इसी आउटफिट की वजह से यहां सबसे अलग दिखाई दे रहे थे। इस यादगार पल के वक्‍त बनर्जी की मां, उनके बेटे भाई समेत उनके कुछ दोस्‍त भी वहां पर मौजूद थे। इन दोनों के इस आउटफिट ने जहां कंसर्ट हॉल के लोगों को चौंकाया होगा वहीं हर भारतीय को गर्व करने का मौका भी दे दिया। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस पोशाक ने बता दिया कि भारतीय कहीं भी रहें लेकिन अपनी मूल सभ्‍यता और संस्‍कृति का निर्वाहन करना नहीं भूलते।

आपको बता दें कि इस मौके को यादगार बनाने के लिए हजारों किमी दूर कोलकाता की प्रेसीडेंसी यूनि‍वर्सिटी ने एक थ्री डी वाल बनाई थी, जिसमें 1998 में अर्थशास्‍त्र के लिए नोबेल पुरस्‍कार जीतने वाले अमर्त्‍य सेन और बनर्जी को दिखाया गया था। भारतीय मूल के प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी (Abhijit Vinayak Banerjee) और उनकी पत्‍नी डुफ्लो को अर्थशास्‍त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया है। आपको बता दें कि अभिजीत की मां भी अर्थशास्‍त्री हैं।

आपको जानकर हैरत हो सकती है लेकिन ये सच है कि अर्थशास्‍त्र में नोबेल पाने वाले अभिजीत का पसंदीदा विषय पहले मैथ्‍स हुआ करता था। ये सब्‍जेक्‍ट उनके दिल और दिमाग पर छाया हुआ था। ये भी कहा जा सकता है कि वो इसको लेकर काफी हद तक जुनूनी थे। यही वजह थी कि देश के प्रतिष्ठित आईएसआई (Prestigious Indian Statistical Institute) में एडमिशन लिया था। लेकिन कुछ दिन बाद ही उनका रुझान अर्थशास्‍त्र की तरफ हो गया और उन्‍होंने इस इंस्टिट्यूट को बाय-बाय कह दिया। उनकी मां झीमा अभिजीत को एक्‍सीडेंटल  इकोनामिस्‍ट बताती हैं। जब बनर्जी को नोबेल पुरस्‍कार देने की घोषणा हुई थी तब उनकी मां ने भी बताया था कि वह मैथ्‍स में आगे जाना चाहते थे लेकिन फिर अचानक उन्‍होंने अपनी फील्‍ड बदल ली।

क्‍यों छोड़ा आईएसआई

अभिजीत का मैथ्‍स को छोड़कर अर्थशास्‍त्र की तरफ रुझान बढ़ने की एक वजह उनकी काफी ज्‍यादा ट्रेवलिंग थी। पहले पहल ये बात समझ में आना जरा मुश्किल है। लेकिन अपनी पढ़ाई के दौरान उन्‍होंने ट्रेन से काफी यात्राएं की थीं। इस दौरान उन्‍होंने भारत को और यहां की अर्थव्‍यवस्‍था को काफी करीब से देखा और समझा। साथ ही उनके मन में इसकी वजह जानने और इसकी बारीकियां समझकर इसको दूर करने का ख्‍याल भी आया। यही वजह थी कि आईएसआई जैसे इंस्टिट्यूट में दाखिला लेने के बाद भी उन्‍होंने इसको छोड़कर प्रेसीडेंसी कॉलेज में अर्थशास्‍त्र को चुना और इसी राह पर आगे बढ़ निकले।

अभिजीत ने नोबेल पुरस्‍कार पाते समय जो पोशाक पहनी वह भारत और भारतीयता के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाती है। यह उनकी पसंद भी है। उन्‍हें ज्‍यादातर कुर्ता पहनने का शौक है। उनके दूसरे शौक में क्‍लासिकल म्‍यूजिक सुनना है। अक्‍सर खाल समय में वह यही सुनते हैं। इसके अलावा अभिजीत को स्‍पोर्ट्स में भी काफी दिलचस्‍पी है।समय मिलने पर वह क्रिकेट से लेकर टे‍बल टेनिस तक में हाथ आजमाने से नहीं चूकते हैं। इसके अलावा उन्‍हें खाना बनाना काफी पसंद है। बंगाली और मराठी खाना वो बहुत अच्‍छा बनाते हैं।

आपको बता दें कि 1983 में दिल्‍ली के जेएनयू में एडमिशन रिफॉर्म को लेकर जो प्रदर्शन हुए थे उनमें उन्‍हें जेल तक की हवा खानी पड़ी थी। इस दौरान वह करीब दस दिनों तक जेल में रहे थे। इसी वर्ष भारत के लोकसभा चुनाव में उन्‍होंने कांग्रेस के लिए न्‍याय योजना का अंतिम खाका तैयार किया था। इसको पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। अभिजीत और डुफ्लो द्वारा दिए गए गरीबी से निपटने के सिद्धांतों को कई देशों ने अपने यहां पर लागू भी किया है। इसका इन देशों को फायदा भी हुआ है। एस्‍थर डुफ्लो अर्थशास्‍त्र में नोबेल पाने वाली दुनिया की दूसरी महिला हैं। वहीं एस्‍‍‍‍‍थर और अभिजीत ऐसे छठे दंपत्ति हैं जिन्‍हें ये सम्‍मान मिला है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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तीन सूत्री माँग को लेकर हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चा ने जिला अधिकारी को सौपा ज्ञापन

Abhay Raj

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हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चा ने तीन सूत्री माँगो को लेकर जिलाधिकारी,मुज़फ़्फ़रपुर को ज्ञापन सौंपा है.मोर्चा ने औराई- कटरा को चचरी मुक्त बनाने के साथ ही शहर को जाम से निजात दिलाने का मांग किया है.

मुज़फ़्फ़रपुर जिलाधिकारी को हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चा ने तीन सूत्री मांग को लेकर ज्ञापन सौपा.मोर्चा ने औराई-कटरा को चचरी मुक्त बनाने के साथ ही ज़िले में अविध तरीके से चल रहे नर्सिंग होम ,जांच घर पर नकेल कसने का मांग किया है.इसके साथ ही मोर्चा ने शहर को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने की मांग की है.मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक तमन्ना हाशमी ने बताया कि पूर्व से इन मुद्दों को लेकर मोर्चा लगातार आंदोलन कर रही है.ज़िला प्रशासन जल्द ही इन तीन मुद्दों पर जल्द ही गंभीरता से विचार नही करेगी तो पूरे जिले में मोर्चा उग्र आंदोलन व आमरण अनशन करेगी.जिसकी जिम्मेदारी ज़िला प्रशासन की होगी.

गौरतलब है कि ज़िले के औराई और कटरा प्रखंड को चचरी मुक्त बनाने के लिए मोर्चा लगातार आंदोलन कर रही है.

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शपथ ग्रहण के बाद हिचकाेला खाते मंत्री ने जिस रूट पर राेड शाे किया था, वहां गड्ढे आज भी जस के तस

Santosh Chaudhary

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नगर विधायक सुरेश शर्मा ने जब सूबे के नगर विकास एवं आवास मंत्री पद की शपथ ली थी, ताे शहरवासियाें की उम्मीदें काफी बढ़ गई थी। शपथग्रहण के बाद पहली बार 2 अगस्त 2017 काे शहर में राेड शाे के दाैरान उन्हाेंने स्वयं भी स्मार्ट सिटी का सपना पूरा कराने का वादा किया था। जर्जर सड़काें व जलजमाव जैसी समस्याओं से निजात दिलाने की बात कही थी। उस दिन उनका स्वागत फकुली से ही शुरू हाे गया था। जिस मार्ग से उनका काफिला गुजरा, लाेगाें का अपार समर्थन मिला था। मंत्री खुली जिप्सी से हाथ जाेड़ कर लाेगाें का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। उस दिन मधाैल से रामदयालुनगर की ओर  आगे  बढ़ते ही मंत्री की जिप्सी गड्ढाें में हिचकाेले खाने लगी थी।

उसके 2 वर्ष 3 महीने और  25 दिन गुजर गए। आज  भी मधाैल से रामदयालुनगर तक 1.9 किलाेमीटर की दूरी में सड़क व गड्ढे में फर्क करना मुश्किल है। शहर की अधिकतर सड़काें की स्थिति जस की तस बनी हुई है। बल्कि,और  जर्जर हाे गई हैं। मधाैल-रामदयालुनगर समेत जवाहरलाल राेड, क्लब राेड, बेला राेड, मिठनपुरा- पक्कीसराय राेड समेत अधिकतर प्रमुख सड़काें में भी इतने गड्ढे बन गए हैं कि उन्हें गिनना मुश्किल है। कफेन से रामदयालुनगर तक की सड़क की स्थिति बेहद जर्जर है। जहां कई स्थानों पर 15 से 24 सेंटीमीटर तक गड्‌ढे हैं।

यह तस्वीर 2 अगस्त 2017 की है। नगर विकास मंत्री बनने के बाद पहली बार सुरेश शर्मा अपने शहर आए थे और  रोड शो किया था।

 

NHAI का तर्क- वैसा संवेदक नहीं मिल रहा जाे 2 किमी रोड बनाए

NHAI का तर्क है कि उस स्टैंडर्ड का संवेदक नहीं मिल रहा है, जाे महज दाे किलाेमीटर सड़क बनाने में दिलचस्पी दिखाए। पांच बार पहले भी टेंडर निकाला गया। मानक के अनुसार किसी ठेकेदार ने टेंडर नहीं डाला। अब साढ़े 14 कराेड़ की लागत से 1.9 किलाे मीटर सड़क चाैड़ीकरण व मजबूतीकरण के साथ एक ब्रिज का टेंडर निकालने की प्रक्रिया चल रही है।

इधर, पूर्व विधायक विजेंद्र ने उठाए सवाल, कहा- 9 वर्षों में सुरेश शर्मा ने कुछ नहीं किया

पूर्व विधायक विजेंद्र चाैधरी का कहना है कि 2 साल क्या, सुरेश शर्मा ने ताे 9 वर्षाें में कुछ नहीं किया। नगर विधायक हाेने के साथ शहर के हाेकर वे शहर का विकास नहीं कर सके। उनके विधायक व मंत्री रहते किसी राेड का गड्ढा नहीं भरा गया। रामदयालुनगर-मधाैल राेड की दुर्दशा से मुजफ्फरपुर ही नहीं पूरे प्रदेश की छवि खराब हाे रही है। नेपाल से पटना जानेवाले जब रामदयालुनगर एनएच पर पहुंचते हैं ताे बिहार की काफी बुरी छवि बनती है।

मंत्री शर्मा बाेले- 15 दिसंबर तक मधाैल से रामदयालु तक जर्जर सड़क हाेगी माेटरेबल

नगर विकास एवं आवास  मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा कि मधाैल से रामदयालुनगर तक जर्जर सड़क बनाने के लिए NHAI के प्राेजेक्ट डायरेक्टर से बात हुई है। उन्हाेंने टेंडर में किसी के शामिल नहीं हाेने के कारण फिर टेंडर निकालने की बात कही है। लेकिन, हमने उस प्रक्रिया में अधिक समय लगने के कारण तत्काल सड़क काे माेटरेबल करने के लिए बाेला है। हमारी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी से भी बात हुई है। विस का सत्र खत्म हाेने के बाद इस पर विशेष रूप से लगूंगा। 15 दिसंबर तक माेटरेबल कराने के प्रयास में जुटे हैं।

इनपुट : दैनिक भास्कर 

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