दुनिया के सबसे बड़े विमान ने भरी उड़ान, अंतरिक्ष तक ले जायेगा सेटेलाइट को
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दुनिया के सबसे बड़े विमान ने भरी उड़ान, अंतरिक्ष तक ले जायेगा सेटेलाइट को

Santosh Chaudhary

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दुनिया के सबसे बड़े विमान स्ट्रेटोलॉन्च ने कैलिफोर्निया में पहली बार उड़ान भरी है. दो एयरक्राफ्ट बॉडी वाले इस विमान में छह बोइंग-747 इंजन लगे हैं. शनिवार को इस बड़े विमान ने अपनी पहली यात्रा मोजावे रेगिस्तान के ऊपर की. यह विमान 15 हजार फुट की ऊंचाई तक गया और इसकी अधिकतम गति 189 मील (305 किमी) प्रति घंटा रही. इस विमान के 385 फुट लंबे पंख किसी अमेरिकी फुटबॉल मैदान के जितने बड़े हैं.

The world's biggest plane's wingspan measures longer than a football field.

अपनी पहली उड़ान के दौरान यह विमान हवा में करीब ढाई घंटे तक रहा. इस विमान का निर्माण अंतरिक्ष में रॉकेट और सेटेलाइट ले जाने और उसे वहां छोड़ने के लिए किया गया है. इस विमान का निर्माण स्केल्ड कम्पोजिट्स नाम की एक इंजीनियरिंग कंपनी ने किया है. इस कंपनी को माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक पॉल एलन ने 2011 में बनाया था.

The jet's landing gear has 28 wheels.

पहली उड़ान के वक्त

2.5 घंटे तक हवा में रहा यह विमान

15 हजार फुट की ऊंचाई तक गया

305 किमी प्रति घंटे की रही रफ्तार

Virgin Orbit plans to use a customized Boeing 747-400 to compete with Stratolaunch.

सेटेलाइट को कक्षा में पहुंचायेगा विमान

इस विमान को सेटेलाइट के लॉन्च पैड के रूप में तैयार किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में सैटेलाइट को छोड़ने से पहले 10 किलोमीटर तक उड़ना है. यह सेटेलाइट को अंतरिक्ष में उनकी कक्षा तक पहुंचाने में मदद करेगा. मौजूदा समय में टेकऑफ रॉकेट की मदद से सैटेलाइट को कक्षा में भेजा जाता है. अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो अंतरिक्ष में किसी चीज को भेजना जमीन से रॉकेट से भेजने से ज्यादा सस्ता हो जायेगा.

Stratolaunch pops a wheelie during January's high-speed taxi test.

इधर, जेटलाइनर में लगेंगे फोल्डिंग विंग्स

बोइंग कंपनी फोल्डिंग विंग्स वाला पहला कमर्शियल प्लेन तैयार कर रही है. पिछले दिनों 777-9 एक्स जेटलाइनर के फोल्डिंग विंग्स की पहली झलक सामने आयी थी. इसके विंग्स का फैलाव 235 फीट और पांच इंच होगा. 02 एयरक्राफ्ट बॉडी वाले इस विमान में छह बोइंग-747 इंजन लगे हैं.

Input : Prabhat Khabar

 

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नोबेल पुरस्‍कार से ज्‍यादा चर्चा में रहा अभिजीत और डुफ्लो का इंडियन लुक, जीत लिया दिल

Santosh Chaudhary

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पंजाबी स्‍टाइल का बंद गले का कोट और धोती, ये थाा नोबेल पुरस्‍कार ग्रहण करने वाले डॉक्‍टर विनायक बनर्जी आउटफिट। स्‍वीडन के स्‍टॉकहॉम कंसर्ट हॉल में मौजूद सभी पुरुष जहां सूट में थे वहीं भारतीय मूल के बनर्जी और नीली साड़ी पहने उनकी पत्‍नी इस्‍थर डुफ्लो अपनी इसी आउटफिट की वजह से यहां सबसे अलग दिखाई दे रहे थे। इस यादगार पल के वक्‍त बनर्जी की मां, उनके बेटे भाई समेत उनके कुछ दोस्‍त भी वहां पर मौजूद थे। इन दोनों के इस आउटफिट ने जहां कंसर्ट हॉल के लोगों को चौंकाया होगा वहीं हर भारतीय को गर्व करने का मौका भी दे दिया। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस पोशाक ने बता दिया कि भारतीय कहीं भी रहें लेकिन अपनी मूल सभ्‍यता और संस्‍कृति का निर्वाहन करना नहीं भूलते।

आपको बता दें कि इस मौके को यादगार बनाने के लिए हजारों किमी दूर कोलकाता की प्रेसीडेंसी यूनि‍वर्सिटी ने एक थ्री डी वाल बनाई थी, जिसमें 1998 में अर्थशास्‍त्र के लिए नोबेल पुरस्‍कार जीतने वाले अमर्त्‍य सेन और बनर्जी को दिखाया गया था। भारतीय मूल के प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी (Abhijit Vinayak Banerjee) और उनकी पत्‍नी डुफ्लो को अर्थशास्‍त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया है। आपको बता दें कि अभिजीत की मां भी अर्थशास्‍त्री हैं।

आपको जानकर हैरत हो सकती है लेकिन ये सच है कि अर्थशास्‍त्र में नोबेल पाने वाले अभिजीत का पसंदीदा विषय पहले मैथ्‍स हुआ करता था। ये सब्‍जेक्‍ट उनके दिल और दिमाग पर छाया हुआ था। ये भी कहा जा सकता है कि वो इसको लेकर काफी हद तक जुनूनी थे। यही वजह थी कि देश के प्रतिष्ठित आईएसआई (Prestigious Indian Statistical Institute) में एडमिशन लिया था। लेकिन कुछ दिन बाद ही उनका रुझान अर्थशास्‍त्र की तरफ हो गया और उन्‍होंने इस इंस्टिट्यूट को बाय-बाय कह दिया। उनकी मां झीमा अभिजीत को एक्‍सीडेंटल  इकोनामिस्‍ट बताती हैं। जब बनर्जी को नोबेल पुरस्‍कार देने की घोषणा हुई थी तब उनकी मां ने भी बताया था कि वह मैथ्‍स में आगे जाना चाहते थे लेकिन फिर अचानक उन्‍होंने अपनी फील्‍ड बदल ली।

क्‍यों छोड़ा आईएसआई

अभिजीत का मैथ्‍स को छोड़कर अर्थशास्‍त्र की तरफ रुझान बढ़ने की एक वजह उनकी काफी ज्‍यादा ट्रेवलिंग थी। पहले पहल ये बात समझ में आना जरा मुश्किल है। लेकिन अपनी पढ़ाई के दौरान उन्‍होंने ट्रेन से काफी यात्राएं की थीं। इस दौरान उन्‍होंने भारत को और यहां की अर्थव्‍यवस्‍था को काफी करीब से देखा और समझा। साथ ही उनके मन में इसकी वजह जानने और इसकी बारीकियां समझकर इसको दूर करने का ख्‍याल भी आया। यही वजह थी कि आईएसआई जैसे इंस्टिट्यूट में दाखिला लेने के बाद भी उन्‍होंने इसको छोड़कर प्रेसीडेंसी कॉलेज में अर्थशास्‍त्र को चुना और इसी राह पर आगे बढ़ निकले।

अभिजीत ने नोबेल पुरस्‍कार पाते समय जो पोशाक पहनी वह भारत और भारतीयता के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाती है। यह उनकी पसंद भी है। उन्‍हें ज्‍यादातर कुर्ता पहनने का शौक है। उनके दूसरे शौक में क्‍लासिकल म्‍यूजिक सुनना है। अक्‍सर खाल समय में वह यही सुनते हैं। इसके अलावा अभिजीत को स्‍पोर्ट्स में भी काफी दिलचस्‍पी है।समय मिलने पर वह क्रिकेट से लेकर टे‍बल टेनिस तक में हाथ आजमाने से नहीं चूकते हैं। इसके अलावा उन्‍हें खाना बनाना काफी पसंद है। बंगाली और मराठी खाना वो बहुत अच्‍छा बनाते हैं।

आपको बता दें कि 1983 में दिल्‍ली के जेएनयू में एडमिशन रिफॉर्म को लेकर जो प्रदर्शन हुए थे उनमें उन्‍हें जेल तक की हवा खानी पड़ी थी। इस दौरान वह करीब दस दिनों तक जेल में रहे थे। इसी वर्ष भारत के लोकसभा चुनाव में उन्‍होंने कांग्रेस के लिए न्‍याय योजना का अंतिम खाका तैयार किया था। इसको पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। अभिजीत और डुफ्लो द्वारा दिए गए गरीबी से निपटने के सिद्धांतों को कई देशों ने अपने यहां पर लागू भी किया है। इसका इन देशों को फायदा भी हुआ है। एस्‍थर डुफ्लो अर्थशास्‍त्र में नोबेल पाने वाली दुनिया की दूसरी महिला हैं। वहीं एस्‍‍‍‍‍थर और अभिजीत ऐसे छठे दंपत्ति हैं जिन्‍हें ये सम्‍मान मिला है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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तीन सूत्री माँग को लेकर हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चा ने जिला अधिकारी को सौपा ज्ञापन

Abhay Raj

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हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चा ने तीन सूत्री माँगो को लेकर जिलाधिकारी,मुज़फ़्फ़रपुर को ज्ञापन सौंपा है.मोर्चा ने औराई- कटरा को चचरी मुक्त बनाने के साथ ही शहर को जाम से निजात दिलाने का मांग किया है.

मुज़फ़्फ़रपुर जिलाधिकारी को हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चा ने तीन सूत्री मांग को लेकर ज्ञापन सौपा.मोर्चा ने औराई-कटरा को चचरी मुक्त बनाने के साथ ही ज़िले में अविध तरीके से चल रहे नर्सिंग होम ,जांच घर पर नकेल कसने का मांग किया है.इसके साथ ही मोर्चा ने शहर को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने की मांग की है.मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक तमन्ना हाशमी ने बताया कि पूर्व से इन मुद्दों को लेकर मोर्चा लगातार आंदोलन कर रही है.ज़िला प्रशासन जल्द ही इन तीन मुद्दों पर जल्द ही गंभीरता से विचार नही करेगी तो पूरे जिले में मोर्चा उग्र आंदोलन व आमरण अनशन करेगी.जिसकी जिम्मेदारी ज़िला प्रशासन की होगी.

गौरतलब है कि ज़िले के औराई और कटरा प्रखंड को चचरी मुक्त बनाने के लिए मोर्चा लगातार आंदोलन कर रही है.

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शपथ ग्रहण के बाद हिचकाेला खाते मंत्री ने जिस रूट पर राेड शाे किया था, वहां गड्ढे आज भी जस के तस

Santosh Chaudhary

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नगर विधायक सुरेश शर्मा ने जब सूबे के नगर विकास एवं आवास मंत्री पद की शपथ ली थी, ताे शहरवासियाें की उम्मीदें काफी बढ़ गई थी। शपथग्रहण के बाद पहली बार 2 अगस्त 2017 काे शहर में राेड शाे के दाैरान उन्हाेंने स्वयं भी स्मार्ट सिटी का सपना पूरा कराने का वादा किया था। जर्जर सड़काें व जलजमाव जैसी समस्याओं से निजात दिलाने की बात कही थी। उस दिन उनका स्वागत फकुली से ही शुरू हाे गया था। जिस मार्ग से उनका काफिला गुजरा, लाेगाें का अपार समर्थन मिला था। मंत्री खुली जिप्सी से हाथ जाेड़ कर लाेगाें का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। उस दिन मधाैल से रामदयालुनगर की ओर  आगे  बढ़ते ही मंत्री की जिप्सी गड्ढाें में हिचकाेले खाने लगी थी।

उसके 2 वर्ष 3 महीने और  25 दिन गुजर गए। आज  भी मधाैल से रामदयालुनगर तक 1.9 किलाेमीटर की दूरी में सड़क व गड्ढे में फर्क करना मुश्किल है। शहर की अधिकतर सड़काें की स्थिति जस की तस बनी हुई है। बल्कि,और  जर्जर हाे गई हैं। मधाैल-रामदयालुनगर समेत जवाहरलाल राेड, क्लब राेड, बेला राेड, मिठनपुरा- पक्कीसराय राेड समेत अधिकतर प्रमुख सड़काें में भी इतने गड्ढे बन गए हैं कि उन्हें गिनना मुश्किल है। कफेन से रामदयालुनगर तक की सड़क की स्थिति बेहद जर्जर है। जहां कई स्थानों पर 15 से 24 सेंटीमीटर तक गड्‌ढे हैं।

यह तस्वीर 2 अगस्त 2017 की है। नगर विकास मंत्री बनने के बाद पहली बार सुरेश शर्मा अपने शहर आए थे और  रोड शो किया था।

 

NHAI का तर्क- वैसा संवेदक नहीं मिल रहा जाे 2 किमी रोड बनाए

NHAI का तर्क है कि उस स्टैंडर्ड का संवेदक नहीं मिल रहा है, जाे महज दाे किलाेमीटर सड़क बनाने में दिलचस्पी दिखाए। पांच बार पहले भी टेंडर निकाला गया। मानक के अनुसार किसी ठेकेदार ने टेंडर नहीं डाला। अब साढ़े 14 कराेड़ की लागत से 1.9 किलाे मीटर सड़क चाैड़ीकरण व मजबूतीकरण के साथ एक ब्रिज का टेंडर निकालने की प्रक्रिया चल रही है।

इधर, पूर्व विधायक विजेंद्र ने उठाए सवाल, कहा- 9 वर्षों में सुरेश शर्मा ने कुछ नहीं किया

पूर्व विधायक विजेंद्र चाैधरी का कहना है कि 2 साल क्या, सुरेश शर्मा ने ताे 9 वर्षाें में कुछ नहीं किया। नगर विधायक हाेने के साथ शहर के हाेकर वे शहर का विकास नहीं कर सके। उनके विधायक व मंत्री रहते किसी राेड का गड्ढा नहीं भरा गया। रामदयालुनगर-मधाैल राेड की दुर्दशा से मुजफ्फरपुर ही नहीं पूरे प्रदेश की छवि खराब हाे रही है। नेपाल से पटना जानेवाले जब रामदयालुनगर एनएच पर पहुंचते हैं ताे बिहार की काफी बुरी छवि बनती है।

मंत्री शर्मा बाेले- 15 दिसंबर तक मधाैल से रामदयालु तक जर्जर सड़क हाेगी माेटरेबल

नगर विकास एवं आवास  मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा कि मधाैल से रामदयालुनगर तक जर्जर सड़क बनाने के लिए NHAI के प्राेजेक्ट डायरेक्टर से बात हुई है। उन्हाेंने टेंडर में किसी के शामिल नहीं हाेने के कारण फिर टेंडर निकालने की बात कही है। लेकिन, हमने उस प्रक्रिया में अधिक समय लगने के कारण तत्काल सड़क काे माेटरेबल करने के लिए बाेला है। हमारी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी से भी बात हुई है। विस का सत्र खत्म हाेने के बाद इस पर विशेष रूप से लगूंगा। 15 दिसंबर तक माेटरेबल कराने के प्रयास में जुटे हैं।

इनपुट : दैनिक भास्कर 

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