Connect with us

MUZAFFARPUR

उपद्रव करने और हिंसक प्रदर्शन करने वालों की गतिविधियों पर ड्रोन कैमरे से रखी जाएगी नजर

Published

on

मुजफ्फरपुर : कल 20 जून 2022 को चक्का जाम करने एवं दिल्ली मार्च का आह्वान को देखते हुए जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर प्रणव कुमार एवं वरीय पुलिस अधीक्षक जयंत कांत ने आज सभी बीडीओ,सीओ,एसएचओ सभी डीएसपी ,रेलवे डीएसपी एवं दोनों अनुमंडल अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी ने कल चक्का जाम को देखते हुए उपद्रव करने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्ती से निपटने का निर्देश दिया है। कोचिंग संस्थानों पर विशेष तौर पर नजर रखने का निर्देश भी दिया है। उन सभी स्थलों को खंगालने का निर्देश दिया गया है जहां पर विधि व्यवस्था का उल्लंघन करने की संभावनाएं है। वैसे सभी तत्वों को चिन्हित किया जा रहा है जिनके द्वारा विद्यार्थियों को भड़काने या उन्हें दिग्भ्रमित करने की कोशिश करते हुए माहौल को बिगाड़ने का कार्य किए जाने की संभावना है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि सभी वरीय पदाधिकारी कल सुबह 5:00 बजे से ही भ्रमणशील रहेंगे और विधि व्यवस्था बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने की दिशा में प्रभावी कार्य करना सुनिश्चित करेंगे।

Advertisement

रेलवे स्टेशनों एवं जिले के महत्वपूर्ण स्थलों पर ड्रोन कैमरे से निगरानी करने का भी निर्देश दिया है। साथ ही केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार की सभी एजेंसियों यथा- रेलवे, टोल प्लाजा, पोस्ट ऑफिस, बैंक, बस स्टॉप पर लगातार वीडियोग्राफी कराने का भी निर्देश दिया गया। सभी सीसीटीवी कैमरे के निगरानी में रहेंगे। कोचिंग संस्थानों पर विशेष रूप से नजर रखी जाएगी।

जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर ने कहा है कि अग्निपथ भर्ती योजना के विरोध में हिंसक प्रदर्शन करने वालों से कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा। सीसीटीवी फुटेज, वीडियो कैमरा, सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर दोषियों की पहचान कर चिन्हित करते हुए कार्रवाई की जाएगी।

Advertisement

Genius-Classes

उन्होंने कहा है कि विधि व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें व्यवधान उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध विधि सम्मत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।*

वही वरीय पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया तथा फेसबुक टि्वटर, व्हाट्सएप, इंस्टाग्रा इत्यादि पर विशेष नजर रखें। कहा कि व्हाट्सएप ग्रुप और यूट्यूब चैनलों के माध्यम से भ्रामक ,मिथ्या और हिंसक मैसेज, फोटो, वीडियो पोस्ट, करने वाले तत्वों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सोशल मीडिया का बेजा इस्तेमाल करने वाले सलाखों के पीछे रहेंगे। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी एसएचओ, सभी डीएसपी को विधि व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न करने वाले तत्वों से सख्ती से निपटने का निर्देश दिया है।

Advertisement

अपील

वही बैठक के बाद जिलाधिकारी ने जिले वासियों से अपील की है कि अफवाहों एवं अपुष्ट सूचनाओं पर ध्यान ना दें। सोशल मीडिया यथा फेसबुक, टि्वटर, व्हाट्सएप इंस्टाग्राम इत्यादि पर किसी भी तरह के तथ्यहीन,हिंसक, भ्रामक मैसेज, फोटो, वीडियो को शेयर /कमेंट ना करें ।एक अच्छे नागरिक के तौर पर कानून का पालन करें। प्रजातांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखें। सरकारी संपत्ति आप ही की संपत्ति है।इसे नुकसान न पहुंचाएं।रेलवे यातायात को बाधित ना करें।

Advertisement

umanag-utsav-banquet-hall-in-muzaffarpur-bihar

nps-builders

Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

BIHAR

खुदीराम बोस के शहादत से प्रेरणा लेकर उभरे सैंकड़ों क्रांतिकारी

Published

on

दास्तान-गो : किस्से-कहानियां कहने-सुनने का कोई वक्त होता है क्या? शायद होता हो. या न भी होता हो. पर एक बात जरूर होती है. किस्से, कहानियां रुचते सबको हैं. वे वक़्ती तौर पर मौज़ूं हों तो बेहतर. न हों, बीते दौर के हों, तो भी बुराई नहीं. क्योंकि ये हमेशा हमें कुछ बताकर ही नहीं, सिखाकर भी जाते हैं. अपने दौर की यादें दिलाते हैं. गंभीर से मसलों की घुट्‌टी भी मीठी कर के, हौले से पिलाते हैं. इसीलिए ‘दास्तान-गो’ ने शुरू किया है, दिलचस्प किस्सों को आप-अपनों तक पहुंचाने का सिलसिला. कोशिश रहेगी यह सिलसिला जारी रहे. सोमवार से शुक्रवार, रोज़… 

जनाब, हिन्दुस्तान की तारीख़ी क़िताबों में कमाल के किरदार दर्ज़ हैं. ऐसे कि दुनिया के किसी और मुल्क में शायद ही कहीं मिलें. मिसाल के लिए एक वाक़ि’अे पर ग़ौर कीजिए. अंग्रेजों के ज़माने की बंगाल प्रेसिडेंसी (सूबा) में मुज़फ्फरपुर शहर की अदालत है. वहां 18 बरस और आठ महीने से कुछ ज़्यादा के एक लड़के को लाया गया है. साल है 1908 का. तारीख़ शायद 26 या 27 मई की है. इस लड़के का मुक़दमा 21 मई से शुरू हुआ है. आरोप है कि इसने उसी साल 30 अप्रैल को मुज़फ्फरपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डगलस हॉलिंसहेड किंग्सफोर्ड को जान से मारने की कोशिश की है. इस कोशिश के दौरान उनकी घोड़ा-गाड़ी पर बम फेंका. उस वक़्त चूंकि किंग्सफोर्ड घोड़ा-गाड़ी में नहीं थे, इसलिए वे तो बच गए. लेकिन मुज़फ्फरपुर की अदालत के वरिष्ठ वकील प्रिंगल कैनेडी की पत्नी और बेटी की जान चली गई. क्योंकि घोड़ा-गाड़ी में हमले के वक़्त वे दोनों बैठी थीं. मसला संगीन है. हालात को देखते हुए तय लगता है कि लड़के को मौत की सज़ा मिलेगी.

Advertisement

Independence Day | Remembering Khudiram Bose: The 18-year-old martyr who smiled at death | Deccan Herald

तीन जजों की बेंच है. इसके मुखिया हैं- जज कॉर्नडॉफ. जज नाथुनी प्रसाद और जनक प्रसाद. लड़के ने पहले-पहल बचाव के लिए कोई वकील लेने से मना कर दिया. पर कई वकील उसके पक्ष में दलीलें देने को तैयार हैं. उन सभी ने मनाया, तब वह वकालत-नामे पर दस्तख़त करने को राज़ी हुआ. बचाव पक्ष ने वरिष्ठ वकील नरेंद्र कुमार को लड़के की तरफ़ से अदालत में पेश होने के लिए तैनात किया. लेकिन इससे पहले कि वे उस लड़के को बचाने का कोई कानूनी रास्ता ढूंढते, उसने अपना ज़ुर्म क़बूल कर लिया. अब आज फ़ैसले का दिन है. वकील साहब ने अब भी हार नहीं मानी है. वे दलील दे रहे हैं, ‘मी लॉर्ड, आरोपी अभी कम-उम्र है. ज़रा सोचिए योर ऑनर, इतनी सी उम्र में क्या ये बम बना सकता है? मुमकिन है, जोश-जोश में इससे कोई नादानी हुई हो. जिस तरह सीना तानकर उसने ज़ुर्म क़बूल किया, उससे भी उसकी कम-समझ ज़ाहिर होती है. इसे राहत दी जाए’.

ज़िरह पूरी होने के बाद अब जजों की बारी है. बचाव पक्ष की दलीलों का कोई ख़ास असर नहीं हुआ है. अभियोजन पक्ष ने तमाम गवाह और सुबूत पेश किए हैं. इनसे पता चलता है कि यह लड़का 14-15 साल की उम्र से ही अंग्रेज सरकार के ख़िलाफ़ क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल रहा है. इन्हीं वजहों से पहले दो बार जेल गया है. क्रांतिकारी गतिविधियां चलाने वाली बड़ी तंज़ीम (संगठन) ‘अनुशीलन समिति’ से इसका सीधा तअल्लुक़ रहा है. इसी तंज़ीम के नेताओं ने इसको बम बनाना भी सिखाया है. इस तरह, तमाम सबूत पुख़्तग़ी करते हैं कि इसने कम-उम्र के बावजूद हर काम होश-ओ-हवास में किए हैं. जनाब, अभियोजन पक्ष के गवाहों, सुबूतों, दलीलों से जज मुतमइन दिख रहे हैं. लिहाज़ा, ऐसे संगीन ज़ुर्म के लिए कानूनन जो सजा तय रही, वही सुनाई जानी है. लड़के को फ़ांसी पर चढ़ाए जाने का फ़ैसला दिया जाना है.

Advertisement

हालांकि इससे पहले बेंच के जज कॉर्नडॉफ सवाल करते हैं, ‘क्या तुम्हें फ़ांसी की सज़ा का मतलब पता है?’. जनाब, इस सवाल पर उस लड़के ने जो ज़वाब दिया, उस पर ग़ौर कीजिए, ‘जी, माई लॉर्ड. अच्छी तरह जानता हूं, इस सज़ा का मतलब. और उस दलील को भी समझ रहा हूं, जो मेरे वकील साहब ने मुझे बचाने के लिए दी है. उन्होंने कहा है कि मैं अभी कम-उम्र हूं. इस उम्र में बम नहीं बना सकता. जज साहब, मेरी आपसे गुज़ारिश है कि मुझे थोड़ा सा वक़्त दिया जाए. आप ख़ुद मेरे साथ चलें. मैं उतने वक़्त में आपको भी बम बनाना सिखा दूंगा’. भरी अदालत में अंग्रेज जज को इस तरह का ज़वाब देने वाले लड़के के साथ क्या हुआ होगा जनाब? क्या लगता है आपको? उसे राहत मिली होगी? यक़ीनी तौर पर नहीं. अदालत ने उसे फ़ांसी की सज़ा सुना दी. ऊपर अपील का वक़्त भी दिया. लेकिन ऊपरी अदालतों ने मुज़फ्फरपुर की अदालत के फ़ैसले पर मुहर ही लगाई. उस लड़के को फ़ांसी दे दी गई फिर.

वह तारीख़ आज, यानी 11 अगस्त की थी. साल 1908 का ही. और उस लड़के का नाम था खुदीराम बोस. खुदीराम, जिनको फांसी पर चढ़ाने के बाद वह हुआ, जिसकी बहुतों को उम्मीद नहीं थी. मसलन, 11 अगस्त को ही कलकत्ते की सड़कों पर हजारों नौजवान अंग्रेज सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आए. बताते हैं कि उस विरोध-प्रदर्शन के दौरान कई लड़कों ने ख़ास क़िस्म की धोतियां पहनी थीं. उन पर कढ़ाई से खुदीराम बोस लिखा हुआ था. बाद में, यह नाम लिखी धोती पहनने वाले युवाओं की तादाद, कहते हैं, हजारों में हुई. क्योंकि कलकत्ते और आस-पास के जुलाहों ने लंबे वक़्त तक ‘खुदीराम बोस’ लिखी हुई धोतियां बनाने का काम किया था. गोया कि एक खुदीराम को फ़ांसी पर लटकाते ही अंग्रेज सरकार के सामने सीना तानकर खड़े होने के लिए हजारों पैदा हो गए हों. जनाब सोचकर देखिए, तारीख़ में ऐसी दीवानगी किसी और के लिए हुई, याद आता है क्या?

Advertisement

All India Radio News on Twitter: "Tributes were paid to fearless freedom fighter Khudiram Bose at Muzaffarpur Central jail in Bihar. Bose was executed on August 11, 1908 in Muzaffarpur jail after

‘खुदीराम’ ख़ुद भी तो एक दीवाने का ही नाम हुआ है न. इनके बारे में सरकारी दस्तावेज़ के अलावा सरकार की ही एक वेबसाइट (इंडियनकल्चरडॉटगॉवडॉनइन) पर ठोस जानकारियां दर्ज़ है. इनके मुताबिक, तीन दिसंबर 1889 को बंगाल के मिदनापुर जिले के हबीबपुर गांव में खुदीराम की पैदाइश हुई. पिता तहसीलदार थे और खुदीराम उनके इक़लौते लड़के. सबसे छोटे. इनसे ऊपर तीन लड़कियां थीं. हालांकि खुदीराम के जन्म के कुछ साल बाद ही माता-पिता का इंतिक़ाल हो गया. इसके बाद बड़ी बहन ने इनकी ज़िंदगी में मां-बाप का किरदार निभाया. अलबत्ता खुदीराम के ज़ेहन में छुटपन से देश के लिए कुछ कर गुज़रने का ज़ुनून सवार हो गया. अभी वे बहन के गांव हाटगच्छा में हेमिल्टन हाईस्कूल में पढ़ ही रहे थे कि उन्होंने वहां महर्षि अरबिंदो और सिस्टर निवेदिता के भाषण सुन लिए. ये दोनों ही उन दिनों गांव-क़स्बों में जाकर लोगों को जगाने का काम किया करते थे.

महर्षि अरबिंदो और सिस्टर निवेदिता के भाषणों ने खुदीराम के दिमाग पर ऐसा असर किया कि वे जल्द ही क्रांतिकारियों की तंज़ीम ‘अनुशीलन समिति’ के कामों में हिस्सा लेने लगे. ऐसे ही 1905 में एक बार उन्हें गिरफ़्तार भी कर लिया गया. वे तब 1905 में हुए बंगाल-बंटवारे के विरोध में जनता के बीच पर्चे बांट रहे थे. तभी पकड़े गए. हालांकि बाद में कम-उम्र की वज़ह से उन्हें छोड़ भी दिया गया. इस वक़्त खुदीराम की उम्र 15 बरस के आस-पास रही. हालांकि इस गिरफ़्तारी से जैसे खुदीराम का हौसला बढ़ गया. वे जल्द ही ‘अनुशीलन समिति’ के सीधे मेंबर बन गए और वहां उन्होंने बम वग़ैरा बनाना भी सीख लिया. बताते हैं, इसी दौरान एक बार और पकड़े गए लेकिन सुबूतों की कमी के कारण छोड़ दिए गए. अलबत्ता, तीसरे मौके पर ऐसा न हो सका. यह मौका था, किंग्सफोर्ड की घोड़ा-गाड़ी पर बम फेंकने का. उस वक़्त जज किंग्सफोर्ड से क्रांतिकारी बहुत ख़फ़ा रहा करते थे.

Advertisement

इसकी वज़ह ये थी कि जब किंग्सफोर्ड कलकत्ते में चीफ़ प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट हुआ करता था, तो उसने कई क्रांतिकारियों को फांसी पर चढ़ाने की सजाएं सुनाई थीं. छोटी सी वज़हों के लिए सरकार का विरोध करने वालों को कोड़े मारने की सजा सुना दिया करता था. इसीलिए क्रांतिकारियों ने उसे मारने का मंसूबा बांध लिया. सरकार को इसकी भनक लग चुकी थी. इसलिए किंग्सफोर्ड का तबादला मुज़फ्फरपुर कर दिया गया. लेकिन क्रांतिकारियों ने वहां भी उसे ख़त्म करने की योजना तैयार कर ली. ख़ुदीराम इस काम के लिए आगे आए. उनके साथ हुए प्रफुल्ल कुमार चाकी. दोनों नाम बदलकर मुज़फ्फरपुर पहुंचे. खुदीराम बने हरेन सरकार और प्रफुल्ल चाकी ने नाम लिया दिनेश राय का. वहां पहुंचकर एक बिहारी ज़मींदार परमेश्वर नारायण महतो की धर्मशाला में ठहरे. पहले पूरी तैयारी की उन्होंने. ये पता किया कि किंग्सफोर्ड कब किस वक़्त कहां आता-जाता है.

जब सब कुछ पुख़्ता हो गया तो रात के आठ-साढ़े आठ का वक़्त तय किया गया. इस वक़्त अंग्रेज अफ़सरों के क्लब से फ़ारिग़ होकर किंग्सफोर्ड अपनी बग्घी से घर के लिए निकला करता था. तभी रास्ते में एक सुनसान जगह पर उसकी बग्घी पर बम फेंके जाने की तैयारी हुई थी, जो कि फेंका भी गया. इसके बाद खुदीराम और प्रफुल्ल अलग-अलग दिशाओं में भागे. लेकिन इधर, बम फेंके जाने की घटना होते ही सरकारी मशीनरी हरक़त में आ चुकी थी. इसलिए पुलिस ने रात को कुछेक घंटों में ही चाकी को घेर लिया. हालांकि वह पकड़े जाते कि इससे पहले ही उन्होंने ख़ुद को गोली मार ली. उधर, खुदीराम वैनी की तरफ़ भागे थे. वहां तक पहुंचते-पहुंचते उन्हें सुबह हो गई थी. क़रीब 25 किलोमीटर का सफ़र तो उन्होंने भागकर या पैदल ही तय किया. कहते हैं, वैनी रेलवे स्टेशन पर वे रेलगाड़ी में सवार भी हो गए थे कि तभी पुलिस ने तलाशी के दौरान संदेह के आधार पर उन्हें पकड़ लिया.

Advertisement

All India Radio News on Twitter: "Tributes were paid to fearless freedom fighter Khudiram Bose at Muzaffarpur Central jail in Bihar. Bose was executed on August 11, 1908 in Muzaffarpur jail after

खुदीराम को हथकड़ी डालकर वैनी से मुज़फ्फरपुर लाया गया. उन्हें गिरफ़्तार किए जाने की ख़बर आग की तरह इलाके में फैल चुकी थी. मुज़फ्फरपुर रेलवे स्टेशन और पुलिस थाने में युवाओं की भीड़ लग गई थी. इतनी कि उसे संभालने के लिए पुलिस को मशक़्कत करनी पड़ रही थी. देश के लिए जान देने को तैयार एक दीवाने को देखने के लिए हजारों की तादाद में दीवानों का हुज़ूम उमड़ आया था मानो. ऐसी किसी शख़्सियत को भला अंग्रेज सरकार क्यों अपनी मुसीबत बनने, बने रहने के लिए छोड़ती भला? फ़ांसी पर लटका दिया उसने. यह सोचकर कि उसने ‘खुदीराम को ख़त्म कर दिया’. हालांकि बंगाल और ख़ासकर कलकत्ते की सड़कों उभर आए ‘हजारों खुदीराम’ ने अंग्रेजों की सोच ग़लत साबित कर दी. और फिर कवि पीतांबर दास ने तो ‘एक बार बिदाई दे मां’ जैसा गीत लिखकर खुदीराम को हमेशा के लिए बंगाल की लोक-संस्कृति का हिस्सा ही बना दिया.

Source : News18 | Nilesh Diwedi

Advertisement

nps-builders

Genius-Classes

Continue Reading

BIHAR

मुजफ्फरपुर में तैनात दो पुलिस पदाधिकारी को राष्ट्रपति पुलिस मेडल सम्मान

Published

on

पहली बार फील्ड में तैनात मुजफ्फरपुर जिला बल के दाे पुलिस ऑफिसर एएलटीएफ व डीईयू प्रभारी माे. शुजाउद्दीन और टेक्निकल सेल में पदस्थापित एएसआई मधुसूदन पासवान काे स्वतंत्रता दिवस के माैके पर राष्ट्रपति पुलिस मेडल मिला है। माे. शुजाउद्दीन काे पिछले 20 साल के बेहतर कार्य के लिए यह मेडल दिया गया है। 2005 में पटना जिले के पंडारक थानेदार रहते हुए माे. शुजाउद्दीन उस टीम में शामिल थे, जिसने विधायक अनंत सिंह के ठिकाने पर घंटाें मुठभेड़ किया था। मुठभेड़ में आठ लाेग मारे गए थे। वहीं, खगड़िया के बेलदाैर थानेदार रहते हुए कुख्यात फन्ना मियां व चंदेश्वरी पासवान का माे. शुजाउद्दीन ने एनकाउंटर किया था।

खगड़िया में एके-47 समेत अत्याधुनिक हथियाराें के जखीरे की बरामदगी में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा मुजफ्फरपुर में मुथूट फाइनेंस से कराेड़ाें का साेना लूट कांड के बाद गिरोह के खुलासा व केला के पेड़ के नीचे से साेना बरामदगी में माे. शुजाउद्दीन की अहम राेल रहा है। पीएनबी में साढ़े पांच कराेड़ के साइबर क्राइम के उद्भेदन व कई बैंक डकैती के खुलासे में इंस्पेक्टर शुजाउद्दीन का महत्वपूर्ण इनपुट रहा।

Advertisement
एएसआई मधुसूदन

एएसआई मधुसूदन

इंस्पेक्टर माे. शुजाउद्दीन का कहना है कि मुजफ्फरपुर में जाे भी उपलब्धि मिली। उसके पीछे सीनियर एसएसपी की माॅनिटरिंग महत्वपूर्ण है। वहीं, एएसआई मधुसूदन पासवान की पिछले दाे साल से ज्यादा समय से कई महत्वपूर्ण घटनाओं के खुलासे में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एसएसपी जयंत कांत, टाउन डीएसपी रामनरेश पासवान, डीएसपी पूर्वी मनाेज पांडेय, डीएसपी पश्चिमी अभिषेक कुमार व सरैया एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा ने दाेनाें अधिकारियाें काे बधाई दी है।

Source : Dainik Bhaskar

Advertisement
Continue Reading

MUZAFFARPUR

महिला सिपाही कविता की गर्दन की हड्डी टूटी, गले पर गहरा निशान

Published

on

पुणे के होटल में ब्रह्मपुरा थाना की महिला सिपाही कविता की संदिग्ध स्थिति में हुई मौत के दो दिन बाद शनिवार की शाम शव का पोस्टमार्टम कराया गया। परिजन एंबुलेंस से शव लेकर मुजफ्फरपुर लौट रहे हैं। कविता के पिता बृज पासवान ने बताया कि पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने गर्दन की हड्डी टूटे होने की बात बताई है। शरीर पर चोट का जिक्र नहीं किया है। पैथोलॉजिकल जांच के लिए भी नमूना एकत्रित किया गया है। बृज पासवान ने बताया कि कविता के गले पर गहरा निशान था। उन्होंने एसएसपी जयंतकांत से मोबाइल पर बात की। एसएसपी ने भरोसा दिया कि शव लाने और पुणे में हुए तमाम खर्च मुजफ्फरपुर आने के बाद उन्हें दे दिया जाएगा। इधर, मां माया देवी ने बताया है कि कविता गर्भवती भी थी। वहीं, ब्रह्मपुरा थाने के दारोगा, सिपाही और दो अन्य लोगों को पुणे पुलिस ने शव के साथ नहीं आने दिया। अभी पुलिस टीम पुणे में रुकेगी। 94 लाख गबन के दो आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए दारोगा ओमप्रकाश प्रसाद ने शनिवार को छापेमारी करने की जानकारी दी। इधर, एसएसपी जयंतकांत लगातार पुणे पुलिस और कविता के परिजनों के संपर्क में हैं। पुणे के हिंजवड़ी थाने की पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट होगा। इसपर ही आगे की कार्रवाई निर्भर होगी।

सोशल मीडिया पर उठी जांच की मांग

Advertisement

सोशल साइट्स पर कविता की मौत की उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। अकेली महिला सिपाही को पुरुष टीम के साथ भेजने पर भी सवाल उठाया है। पोस्ट में कहा गया है कि शव का पोस्टमार्टम 24 घंटे के अंदर होना चाहिए था। हालांकि, सोशल प्लेटफॉर्म पर चलाये जा रहे अभियान की ‘हिन्दुस्तान’ पुष्टि नहीं करता है। पुलिस मेंस एसोसिएशन के सचिव रामेंद्र सिंह यादव ने कहा कि शव मुजफ्फरपुर आने के बाद ही संगठन की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया दी जाएगी।

परिजनों के पहुंचने से पहले आत्महत्या का आवेदन

Advertisement

पिता बृज पासवान व पति भूपेंद्र पासवान ने बताया कि उनलोगों के पहुंचने से पहले ही ब्रह्मपुरा थाना के दारोगा हिंजवड़ी थाने में आत्महत्या का आवेदन दे चुके थे। पिता और पति का भी पुणे पुलिस ने बयान दर्ज किया। इसमें कविता हत्या की आशंका जताई है। सवाल उठाया कि मौत के करीब चार घंटे के बाद परिजनों को सूचना दी गई।

छापेमारी के लिए गई टीम के साथ वादी पक्ष भी

Advertisement

पुणे गई ब्रह्मपुरा पुलिस टीम के साथ वादी पक्ष के भी दो लोग साथ में हैं। इसपर भी कविता के परिजनों ने सवाल उठाया है। होटल में तीन कमरे लिए गए थे। एक कमरे में कविता अकेली थी जबकि डबल बेड के दो कमरे में अन्य साथी सिपाही रुके थे। दूसरे कमरे में ठगी का केस करने वाले पक्ष के दो लोग ठहरे थे।

15 दिन पहले कविता को भेजा गया था आगरा

Advertisement

बृज पासवान ने बताया कि पुणे जाने से 15-20 दिन पहले कविता को ब्रह्मपुरा पुलिस टीम के साथ आगरा भेजा गया था। उस समय भी पुरुष टीम के साथ अकेली महिला सिपाही को भेजा गया था। उसे ही बार-बार बाहर भेजने के लिए कमान काटा जा रहा था। आगरा से लौटने के बाद वह पुणे नहीं जाना चाह रही थी।

Source : Hindustan

Advertisement

nps-builders

Genius-Classes

Continue Reading
BIHAR1 hour ago

खुदीराम बोस के शहादत से प्रेरणा लेकर उभरे सैंकड़ों क्रांतिकारी

BIHAR4 hours ago

शहीद की मां के रास्ते में बिछा दी हथेलियां, गलवान मुठभेड़ में शहीद हुआ था वैशाली का जवान

INDIA4 hours ago

38 साल बाद मिला शहीद चंद्रशेखर का पार्थिव शरीर, हल्द्वानी में होगा अंतिम संस्कार

BIHAR5 hours ago

जज़्बा है बिहारी, जुनून है बिहार! बदलेगी सूरत… 10 नहीं, 20 लाख नौकरियां देगी नीतीश सरकार

INDIA6 hours ago

आज 15 अगस्त पर जानिए ध्वजारोहण और झंडा फहराने में क्या है अंतर?

BIHAR7 hours ago

जेल की जगह आनंद मोहन के घर पहुंचने पर मुख्यालय ने एसपी लिपि सिंह से मांगी रिपोर्ट, कई पुलिसकर्मी निलंबित

WORLD8 hours ago

इमरान खान ने रैली में चलाया एस जयशंकर का वीडियो, कहा- यह होता है आजाद देश

INDIA8 hours ago

लाल किले पर देश ने बनाया नया रिकॉर्ड, पहली बार मेड इन इंडिया तोप ने दी सलामी

BIHAR8 hours ago

मुजफ्फरपुर में तैनात दो पुलिस पदाधिकारी को राष्ट्रपति पुलिस मेडल सम्मान

INDIA1 day ago

मूसेवाला के पिता बोले- मेरे बेटे की हत्या के पीछे कुछ सिंगर और सफेदपोश, जल्द करूंगा खुलासा

job-alert
BIHAR2 weeks ago

बिहार: मैट्रिक व इंटर पास महिलाएं हो जाएं तैयार, जल्द होगी 30 हजार कोऑर्डिनेटर की बहाली

BIHAR4 weeks ago

बिहार में तेल कंपनियों ने जारी की पेट्रोल-डीजल की नई दरें

BIHAR2 weeks ago

बीपीएससी 66वीं रिजल्ट : वैशाली के सुधीर बने टॉपर ; टॉप 10 में मुजफ्फरपुर के आयुष भी शामिल

BIHAR1 week ago

एक साल में चार नौकरी, फिर शादी के 30वें दिन ही BPSC क्लियर कर गई बहू

BUSINESS2 weeks ago

पैसों की जरूरत हो तो लोन की जगह लें ये सुविधा; होगा बड़ा फायदा

BIHAR1 week ago

ग्राहक बन रेड लाइट एरिया में पहुंची पुलिस, मिली कॉलेज की लड़किया

BIHAR4 weeks ago

बिहार : अब शिकायत करें, 3 से 30 दिनों के भीतर सड़क की मरम्मत हाेगी

INDIA2 weeks ago

बुढ़ापे का सहारा है यह योजना, हर दिन लगाएं बस 50 रुपये और जुटाएं ₹35 लाख फंड

BIHAR2 weeks ago

बीपीएससी 66 वीं के रिजल्ट में परफेक्शन आईएएस के 131 अभ्यर्थी सफल..

BIHAR4 weeks ago

सात समुंदर पार कर इंग्लैंड से सुल्तानगंज गंगा घाट पहुंची भोलेनाथ की दीवानी रेबेका

Trending