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बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के तारिख का इंतजार खत्म 8 मई से बाबा के श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन

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उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट 8 मई को प्रात: 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर नरेंद्रनगर स्थित राजदरबार में राजपुरोहितों ने महाराजा मनुज्येंद्र शाह की जन्म कुंडली देखकर धाम के कपाट खोलने की तिथि घोषित की।

Badrinath | Char Dham | Uttarakhand Tourism

शनिवार को नरेंद्रनगर राजदरबार में राजपुरोहितों ने टिहरी नरेश महाराजा मनुज्येंद्र शाह की जन्म कुंडली के आधार पर बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि निकाली। भगवान के महाभिषेक के लिए तिलों का तेल 22 अप्रैल को पिरोया जाएगा। बसंत पंचमी के मौके पर नरेंद्रनगर राजमहल में आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ गणेश पूजन, पंचांग पूजन और चौकी पूजन के बाद महाराजा मनुज्येंद्र शाह का वर्षफल और ग्रह नक्षत्रों की दशा देखकर भगवान श्री बदरीनाथ के कपाट खोलने की तिथि घोषित की।

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आपको बता दें कि बदरीनाथ धाम के कपाट 20 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट छह नवंबर को बंद हुए थे।गंगोत्री धाम के कपाट 5 नवंबर को अन्नकूट के मौके पर तो यमुनोत्री धाम के कपाट 6 नवंबर को भैया दूज के अवसर पर विधि विधान पूजा अर्चना व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बंद हुए थे।

भगवान बद्री विशाल के महाभिषेक के लिए स्थानीय सुहागिन महिलाएं टिहरी सांसद महारानी माला राज्य लक्ष्मी शाह के नेतृत्व में 22 अप्रैल को राजदरबार में तिलों का तेल निकालेंगी। उसके बाद गाडू घड़ा यात्रा को लेकर डिम्मर पंचायत के लोग अपने गंतव्य के लिए प्रस्थान करेंगे। इस अवसर पर नरेंद्र नगर राज महल में बद्रीनाथ धाम के रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, राजेश नंबूदरी, बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय, उपाध्यक्ष किशोर पंवार, सदस्य आशुतोष डिमरी, मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, विशेष कार्याधिकारी राकेश सेमवाल, रमेश तिवारी, डॉ हरीश गौड़, प्रमोद नौटियाल, डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के कार्यकारी अध्यक्ष विनोद डिमरी श्रीराम, आदि भी मौजूद थे।

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PM Modi offers prayers at Badrinath temple - Rediff.com India News

आपदा के बाद भी नहीं डिगी आस्था: चारधाम में रिकॉर्ड चार लाख पहुंचे श्रद्धालु

कोरोनाकाल में चारधाम यात्रा देर से शुरू होने के बावजूद उत्तराखंड आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड चार लाख के पार पहुंच गई है। इनमें दो लाख से अधिक यात्री अकेले केदारनाथ धाम ही पहुंचे हैं। रविवार को श्री बदरीनाथ धाम में 5624, श्री केदारनाथ धाम में 4985, श्री गंगोत्री धाम में 168, श्री यमुनोत्री धाम में 440 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कुल 11217 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। अभी तक चार धाम पहुंचे कुल श्रद्धालुओं की संख्या 414607 श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए हैं।

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चारों धामों के कपाट बंद होने की तारीख की घोषणा के बाद तीर्थ यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। केदारनाथ धाम के कपाट छह नवंबर को बंद होंगे। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट पांच और छह नवंबर को बंद हो जाएंगे। कपाट बंद करने को अभी से तैयारी शुरू हो गई है। कोरोनाकाल की वजह से बंद चारधाम 2021 में शुरू होने होने के बाद तीर्थ यात्रियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है।

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चारधाम यात्रा अंतिम पखवाड़े में पहुंचने के साथ ही केदारनाथ धाम के लिए हेली टिकटों की मारामारी शुरू हो गई है। जीएमवीएन की साइट पर 31 अक्तूबर तक एक भी टिकट उपलब्ध नहीं है। दूसरी तरफ ऑफलाइन टिकटों के लिए हेलीपैड पर मारामारी मची हुई है। केदारनाथ धाम के कपाट भैयादूज के दिन छह नवंबर को सुबह छह बजे बंद होंगे। इससे पहले श्रद्धालुओं में धाम में बाबा के दर्शन करने का उत्साह है।

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वैसे भी इस साल यात्रा के शुरुआती साढ़े चार महीने यात्रियों को कोविड के कारण धाम जाने की इजाजत नहीं मिल पाई थी। इसलिए अब अंतिम दो सप्ताह के लिए हेली टिकटों की मारामारी शुरू हो गई है। हेली सेवा के टिकट जीएमवीएन की वेबसाइट से बुक किए जा रहे हैं। गुरुवार दोपहर बाद तीन बजे तक जीएमवीएन की वेबसाइट पर आगामी 31 अक्तूबर तक एक भी टिकट उपलब्ध नहीं था।

Source : Hindustan

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14 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना, जानिये किस तारीख को रहेंगे सावन के सोमवार

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श्रावण मास को बहुत पावन माना गया है। ये मास भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इस मास में आने वाले सोमवार को जो व्रत रखते हैं उन लोगों की हर कामना को शिव जी पूरा कर देते हैं। सावन का महीना पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित है। इस बार सावन का महीना 14 जुलाई से शुरू हो रहा है, जो कि 12 अगस्त तक चलेगा।

सावन मास के सोमवार के दिन विशेष रूप से शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है और कई लोग व्रत भी रखते हैं। इस बार सावन में कुल 4 सोमवार होने वाले हैं। पहला सोमवार 18 जुलाई को आ रहा है। दूसरा सोमवार 25, तीसरा 1 अगस्त को और चौथा सोमवार 8 अगस्त को पड़ेगा।

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पं. शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि इस महीने के सोमवार का विशेष महत्व है। सावन का महीना 30 दिनों का होगा। 24 जुलाई को कामिका एकादशी, 26 जुलाई को मासिक शिवरात्रि एवं प्रदोषव्रत, 31 जुलाई को हरियाली तीज, 2 अगस्त को नागपंचमी, 8 अगस्त को पुत्रदा एकादशी, 9 अगस्त को प्रदोष व्रत, 11 अगस्त को रक्षाबन्धन व 12 अगस्त श्रावणी पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।

महादेव को सावन का महीना अत्यंत प्रिय है। पौराणिक कथा के अनुसार देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण लिया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने हिमालय राज के घर में उनकी पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया था। पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए सावन महीने में कठोर व्रत किए थे और इनकी पूजा की थी।

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इनकी पूजा से प्रसन्न होकर शिव जी इनसे विवाह करने के लिए राजी हो गए थे। तब से महादेव को ये महीना अत्यंत प्रिय हो गया। कहा जाता है कि जो भी लोग सावन के दौरान शिव की पूजा करते हैं। उन लोगों को मन चाहा जीवन साथी मिल जाता है। जीवन में प्यार की कमी नहीं होती है। इसलिए कहा जाता है कि सच्चा जीवन साथी पाने के लिए सावन के दौरान शिव की पूजा जरूर करें

Source: Patrika

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अंबुबाची मेला 2022: कामाख्या मंदिर में आज से शुरू हुआ अंबुबाची मेला, जानिए इसका महत्व

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51 शक्तिपीठों में से एक असम के गुवाहाटी शहर में स्थित कामाख्या देवी मंदिर उनमें से एक है। पुराणों के अनुसार, मां कामाख्या का मंदिर जहां स्थित है, वहां पर माता सती का ‘योनि भाग’ गिरा था। प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां कामाख्या मंदिर में आज 22 जून से अंबुबाची मेले की शुरुआत हो गई है। हर साल अंबुबाची मेले का आयोजन धूमधाम के साथ किया जाता है। इसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु, साधु संत और तांत्रिक आते हैं।

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अंबुबाची मेला कब तक लगेगा?

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अंबुबाची मेल 22 जून से 26 जून तक चलेगा। 22 जून को मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे और 26 जून को सुबह मां को स्नान आदि कराने के बाद मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।

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अंबुबाची मेला क्यों लगता है?

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मान्यता है जब यह मेला लगता है तब मां कामाख्या रजस्वला रहती हैं। अंबुबाची योग के दौरान मां दुर्गा के गर्भगृह के कपाट खुद ही बंद हो जाते हैं। इस दौरान किसी को दर्शन की अनुमति नहीं होती है। तीन के बाद मां की रजस्वला समाप्ति पर उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। चौथे दिन मां कामाख्या के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोले जाते हैं। मान्यता है कि कामाख्या मंदिर में जो भक्त आकर दर्शन करता है, उसे पापों से मुक्ति मिलती है।

मिलता है विशेष प्रसाद-

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कामाख्या मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में एक गीला कपड़ा दिया जाता है। इसे अंबुबाची वस्त्र कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, देवी के रजस्वला के दौरान प्रतिमा के आसपास सफेद कपड़ा बिछा दिया जाता है। तीन दिन बाद जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तब यह वस्त्र माता के रज से लाल हो जाता है।

दर्शन का समय-

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अम्बुबाची मेला आरम्भ: 22 जून 2022, बुधवार

अम्बुबाची मेले समाप्त: 26 जून 2022, रविवार

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मंदिर बंद होने का दिन: 22 जून 2022, बुधवार

मंदिर खुलने का दिन: 26 जून 2022, रविवार

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दर्शन करने का दिन: 26 जून 2022 रविवार

दर्शन का समय: सुबह 5:30 से रात 10:30 बजे

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कैसे पहुंचे कामाख्या मंदिर

आप कामाख्या मंदिर पर ट्रेन और सड़क के रास्ते से पहुंच सकते हैं। कामाख्या मंदिर पहुंचने के लिए आपके लिए बेहतर रहेगा कि आप सबसे पहले गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहीं से आपको ऑटो या टैक्सी मिल जाएगी। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से कामाख्या मंदिर लगभग 8 किलोमीटर दूर है। कामाख्या शक्तिपीठ पहाड़ पर मौजूद है।

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Source : Hindustan

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साल का पहला चंद्र ग्रहण आज, यहां जानें इससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें

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साल का पहला चंद्र ग्रहण आज है. आज सुबह 07 बजकर 58 मिनट पर चंद्र ग्रहण प्रारंभ हो जाएगा. इस साल का पहला चंद्र ग्रहण हिंदू कैलेंडर की तिथि वैशाख पूर्णिमा को लगा है. पूर्णिमा तिथि 15 मई को दोपहर 12:45 बजे से शुरु हुई थी, जो आज 16 मई सोमवार को सुबह 09:43 बजे खत्म होगी. आज वैशाख पूर्णिमा व्रत है और चंद्र देव पर ग्रहण भी. पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और चंद्रमा की पूजा की जाती है. आज चंद्र ग्रहण के समापन के बाद आप स्नान आदि से निवृत होकर शाम को चंद्रमा की पूजा करते हैं, तो चंद्र दोष दूर हो सकता है. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट बता रहे हैं चंद्र ग्रहण का समय, सूतक काल, स्थान और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें.

साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण
आज का चंद्र ग्रहण सुबह 07 बजकर 58 मिनट पर लग रहा है और यह 11 बजकर 25 मिनट पर खत्म हो जाएगा. चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 03 घंटे 27 मिनट की है. 03 घंटे 27 मिनट तक चंद्रमा पर राहु और केतु की बुरी दृष्टि रहेगी. उसके बाद ग्रहण का मोक्ष हो जाएगा.

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चंद्र ग्रहण का सूतक काल
चंद्र ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ से 09 घंटे पूर्व प्रारंभ हो जाता है और इसका समापन ग्रहण के खत्म होने के साथ होता है, लेकिन यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल नहीं होगा.

इन जगहों पर दिखेगा चंद्र ग्रहण
साल का पहला चंद्र ग्रहण उत्तर-दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, पश्चिमी यूरोप, अटलांटिक महासागर, प्रशांत महासागर, अंटार्कटिका आदि क्षेत्रों में दिखाई देगा.

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चंद्र ग्रहण में ध्यान रखें ये बातें
चंद्र ग्रहण में भोजन न करें और न ही भोजन पकाएं. इस दौरान सोना भी मना होता है. इस समय में भगवान की भक्ति करें. गर्भवती महिलाएं भी विशेष ध्यान रखें. भोजन बना हुआ है, तो उसमें में गंगाजल और तुलसी की पत्ती डाल दें, ताकि वह शुद्ध हो जाए. ग्रहण खत्म होने पर स्नान करके साफ कपड़े पहन लें. फिर पूजा पाठ करें.

चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं का दान
आज का चंद्र ग्रहण वैशाख पूर्णिमा व्रत के दिन लगा है. ऐसे में आप पूजा के समय चंद्र देव के बीज मंत्र ॐ सों सोमाय नम: का जप करें. उसके बाद चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं जैसे मोती, सफेद कपड़ा, चावल, दही, चीनी, सफेद फूल आदि का दान करें. ऐसा करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और चंद्र दोष दूर होता है.

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चंद्र ग्रहण 2022 राशियों पर प्रभाव

मेष: स्त्री को कष्ट

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वृष: सुख

मिथुन: मानसिक व शरीर रोग की चिन्ता

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कर्क: संतान कष्ट, अवसाद की स्थिति

सिंह: अप्राप्त लक्ष्मी की प्राप्ति

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कन्या: धन-क्षति

तुला: दुर्घटना का प्रबल योग

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वृश्चिक: मानहानि

धनु: अप्रत्याशित लाभ

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मकर: सुख

कुंभ: स्त्री कष्ट, अपयश

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मीन: मृत्युतुल्य पीड़ा

ग्रहण के अनिष्ट फल से बचने के लिए दान

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कांसे या फूल के पात्र में काला तिल, सफ़ेद वस्त्र, दही, मिश्री, चांदी का चन्द्रमा दान करके दरिद्रनारायण को दे दें.

Source : News18

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