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MUZAFFARPUR

शहर में गहराया पेयजल संकट, पानी को तरस रहे लोग, निगम के नल पर लग जाती कतार

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शहर में पेयजल संकट की समस्या गहराती जा रही है। नगर निगम के कई मोहल्लों में लोग पानी के लिए तड़प रहे हैं। भू-जलस्तर नीचे जाने से कई चापाकल पानी नहीं दे रहे हैं। मोटर भी पानी खींचने में हांफ रहे हैं। चंदवारा, बालूघाट, सिकंदरपुर, अखाड़ाघाट और दादर, पंखा टोली, कन्हौली, सादपुरा, बेला, मिठनपुरा समेत कई मोहल्लों में पेयजल की किल्लत है। निगम के नल पर लोगों की कतार लग रही है। लोग समय से काफी पूर्व पहुंच कर पानी का काफी समय तक इंतजार करने को मजबूर हैं। इन जगहों पर पानी के लिए लोग आपस में उलझ जा रहे हैं।

Pic by Madhav Kumar

नगर निगम व जिला प्रशासन इस समस्या के निदान की ठोस पहल नहीं कर रहा। शहर के उत्तरी भाग विशेषकर नदी से सटे इलाकों में जलस्तर में तेजी से गिरावट हो रही है। अन्य इलाकों में भी जलस्तर गिर रहा है। खादी भंडार सर्वोदय ग्राम परिसर में पेयजल को लेकर हाहाकार मचा है। नगर निगम के नल से जल नहीं आ रहा है।

बिहार खादी ग्रामोद्योग संघ मातृ संस्था के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने कहा कि नगर निगम को कई बार इसकी जानकारी दी गई, मगर समस्या जस की तस है। पानी के लिए लोगों को अलसुबह से ही जगना पड़ रहा है। वहीं चर्च रोड माई स्थान की चंदा देवी व रीना देवी ने कहा कि निगम के नल से पानी नहीं आ रहा है। यहां निगम को प्रतिदिन एक टैंकर पानी देने की आवश्यकता है।

सिर्फ 78 लाख गैलन शहर को मिल रहा पानी

आबादी के हिसाब से शहरवासियों के लिए प्रतिदिन 1 करोड़ 57 लाख 50 हजार गैलन पानी की जरूरत है, लेकिन मात्र 78 लाख गैलन पानी की ही आपूर्ति हो रही है। शहरवासियों को 79.5 गैलन कम पानी मिल पाता है। जिससे आधे से अधिक आबादी को पेयजल की सुविधा से वंचित है। शहर की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 में जलापूर्ति योजना मद में 98 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए थे। नगर निगम, बुडको एवं निर्माण एजेंसी आइभीआरसीएल के बीच योजना को लेकर करार हुआ था। दो साल की समय सीमा यानि 19 दिसंबर 2013 तक योजना को पूरा करने की जिम्मेवारी तय की गई थी।

योजना के अंतर्गत शहर को दस जोन में बांटकर दस जलमीनारों एवं 29 पंप हाउसों का निर्माण करना था। साथ ही शहर के सभी मोहल्लों में पाइप लाइन का विस्तार करना था। एजेंसी पांच साल में दस प्रतिशत काम भी नहीं कर पाई। तब सरकार ने एजेंसी के साथ करार को रद कर दिया। इस बीच करोड़ों रुपये खर्च कर डाले। करार रद होने से करोड़ों रुपये की पाइन लाइन जमीन के भीतर दबकर रह गई। जो काम चल रहा था वह ठप हो गया।

Input : Dainik Jagran

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MUZAFFARPUR

स्वास्थ्य सचिव सेंथिल ने होमी भाभा कैंसर अस्पताल के दक्षिण गेट का किया उद्घाटन

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आज दिनांक 30 नवंबर 2022 को होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के दक्षिणी गेट का उद्घाटन एवं पीडियाट्रिक ऑनकोलॉजी डिपार्टमेंट का शुभारंभ बिहार सरकार में स्वास्थ्य सचिव के सेंथिल के द्वारा किया गया।

इस मौके पर होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के प्रभारी डॉ रविकांत सिंह ने कहा कि हम स्वास्थ्य व्यवस्था में एक कदम और आगे बढ़े हैं। इतने कम समय में ही होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल और अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर ने बिहार में कैंसर के इलाज के साथ रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए है।

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर में सर्जिकल ओंको, गायनिक ओंको, मेडिकल ओंको, ब्रेस्ट ओंको और हेड एन नेक ओंको की सुविधाएं थी अब यहां पीडियाट्रिक ऑनकोलॉजी की भी सुविधाएं मिलेगी।

डॉ रविकांत सिंह ने कहा कि अभी बिहार राज्य में पीडियाट्रिक ऑनकोलॉजिस्ट की बहुत कमी है जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। पहले इस इलाज के लिए होमी भाभा कैंसर अस्पताल वाराणसी जाना होता था लेकिन अब इसके इलाज के लिए बिहार सरकार ने पीकू बिल्डिंग में 15 बेड सिर्फ पीडियाट्रिक कैंसर के इलाज के दिया है। पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट के चालू हो जाने से बच्चों में होने वाले कैंसर के इलाज और देखरेख में तेजी आएगी।

अभी तक इस संस्थान में 4881 से ज्यादा मरीज रजिस्टर्ड हुए है। 11700 से ज्यादा कीमोथेरेपी साइकल हो चुकी है। इस संस्थान में अभी तक मेजर सर्जरी 519 से ऊपर और माइनर सर्जरी 1480 से ऊपर हो चुकी है। जबकि 42644 से ऊपर मरीजों का इलाज यहां पर चला है।

डॉ रविकांत सिंह के अनुसार कि उत्तर बिहार के लोगों को कैंसर के इलाज के लिए पहले अन्यत्र जगहों पर पलायन करना पड़ता था और इसमें कई ऐसे लोग होते है जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होते उनके लिए टाटा स्मारक केंद्र ने मुजफ्फरपुर में अपनी इकाई खोली है ताकि सब्सिडी रेट में उनका इलाज सम्भव हो सके। इसके लिए अस्पताल आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी योजना के लाभ भी प्रदान कराने में मदद करती है।

इस मौके पर बिहार सरकार में स्वास्थ्य सचिव माननीय श्री के. सेंथिल ने यहां काम कर रहे सारे कर्मचारियों को धन्यवाद दिया कि इतने कम संसाधन और समय के वाबजूद इतनी मरीजों को अपनी सेवाएं दी है। यहां का मेडिकल ऑनकोलॉजी विभाग पूरे बिहार और झारखंड से बेहतर है और प्रतिदिन खुद को बेहतर करते जा रही है।

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BIHAR

मुजफ्फरपुर : बेल किसी और की, दूसरे को जेल से छोड़ा ; जेल प्रशासन ने दर्ज कराया केस

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शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा से बंदी को जमानत पर छोड़ने में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। हथौड़ी थाना से आर्म्स एक्ट व बाइक चोरी के साथ गिरफ्तार गुड्डू कुमार की कोर्ट से बेल हुई थी, लेकिन जेल प्रशासन ने अहियापुर थाना से मादक पदार्थ और आर्म्स एक्ट में बंद गुड्डू कुमार को मुक्त कर दिया। जमानत कराने वाले वकील ने इस बारे में आपत्ति की, तब इसका खुलासा हुआ।

मिठनपुरा थानेदार श्रीकांत सिन्हा ने एफआईआर के हवाले से बताया कि हथौड़ी पुलिस ने बीते 25 मई को मीनापुर थाना के शंकरपुर गांव निवासी रामदेव सहनी के पुत्र गुड्डू कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बीते 23 नवंबर को उसकी कोर्ट से जमानत हो गई। रिलीज ऑर्डर आने के बाद बंदी को मुक्त करने के लिए जेल में नाम पुकारा गया। इसके बदले मीनापुर थाने के शंकरपुर गांव निवासी धनेश्वर राय का पुत्र गुड्डू कुमार जेल गेट पर पहुंचा। पूछताछ के बाद उसे ही जेल से मुक्त कर दिया गया। जब रामदेव सहनी के पुत्र गुड्डू के वकील ने आपत्ति की तब खलबली मच गई।

जांच-पड़ताल में पता चला कि जिस गुड्डू कुमार को मुक्त किया गया था, वह अहियापुर थाने में बीते 19 सितंबर को पिस्टल और गांजा के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उसकी बेल अभी नहीं हुई है। अब जमानत पर छूटे रामदेव सहनी के पुत्र गुड्डू कुमार से मिठनपुरा पुलिस पूछताछ करेगी। वहीं, जेल से छूटने के बाद अहियापुर थाने का आरोपित गुड्डू फरार चल रहा है। बताया जाता है कि जेल में हर बंदी का पहचान चिह्न लिखा जाता है। जिस गुड्डू को बेल पर छोड़ा गया, उसके चिह्न का मिलान नहीं किया गया। रिलीज आदेश कांड संख्या के साथ आता है। दोनों का पता समान था, पर पिता का नाम अलग-अलग था। इन बिंदुओं पर भी ध्यान नहीं दिया गया।

जेल प्रशासन ने मंगलवार को मिठनपुरा थाने में इस फर्जीवाड़े की एफआईआर दर्ज कराई है। जेल प्रशासन ने इसमें दोनों बंदियों को नामजद आरोपित बनाया है। हालांकि, जेल से बंदी को मुक्त करने के प्रक्रिया में खुद जेल की लापरवाही सामने आ रही है।

Source : Hindustan

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सरकारी स्कूल के बच्चे अब बनेंगे शतरंज खिलाड़ी, स्कूलों में सीखेंगे शतरंज का चाल

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बिहार के सरकारी स्कूलों के बच्चे अब शतरंज खेलते हुए नजर आएंगे। काली और सफेद मोहरों की बिसात को समझ कर वो ग्रैंडमास्टर बनेंगे बल्कि ऑनलाइन गेम में उलझे बाल मन को मोबाइल के चंगुल से निकालने का भी प्रयास सफल होगा। जिससे उनके मानसिक व नेतृत्व कौशल का विकास होगा। बिहार के प्राथमिक कक्षा में ही बच्चों को शतरंज की पढ़ाई कराई जाएगी। जिसमें उन्हें खेल के नियम, खिलाड़ियों द्वारा चली जाने वाली चाल, मोहरों की चाल से अवगत कराया जायेगा। साथ ही राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक हुए ग्रैंड मास्टरों की कहानी व उनके खेलने के तरीकों की पूरी जानकारी बच्चों को दी जाएगी।

मुजफ्फरपुर समेत 15 जिलों का चयन

इसके लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने मुजफ्फरपुर समेत 15 अन्य जिलों का चयन किया हैं। जिसमें पटना, समस्तीपुर, दरभंगा, रोहतास, लखीसराय, आरा, गया, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, बक्सर, सारण और सिवान आदि जिले शामिल हैं।

प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों को शतरंज की पढ़ाई के साथ अभ्यास कराया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को पहले से ही ट्रेनिंग दी जाएगी।अखिल बिहार शतरंज संघ बच्चों के लिए पाठ्यक्रम उपलब्ध कराएगा।

सूबे के चयनित 15 जिलों के हर प्रखंड से दो-दो शिक्षकों का चयन होगा जिसे शतरंज की ट्रेनिंग दी जाएगी। इनमें महिला शिक्षकों को अधिक प्राथमिकता दी जाएगी।चयनित शिक्षकों को जिला स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रशिक्षक ट्रेनिंग देंगे। प्रशिक्षकों को एक दिन के लिए 3 हजार रुपए मानदेय मिलेगा।

मालूम हो कि राज्य सरकार शतरंज की उच्च स्तर तक पहुंचाना चाहती हैं इसके लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य कर रही हैं। सरकार का पहला उद्देश्य प्राथमिक स्तर से बच्चों में शतरंज के प्रति रुचि पैदा करना हैं।

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